वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी मुद्रा का दबदबा लगातार कायम है, जहां व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई आधारित महंगाई दर में नरमी के संकेत मिलने के बावजूद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 101.80 के अपने जून वर्ष के उच्चतम स्तर को छूने में सफल रहा है। आर्थिक आंकड़ों के संशोधित विवरण से यह बात स्पष्ट हुई है कि मूल्य वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है, लेकिन मजबूत उपभोक्ता खर्च और निरंतर बने हुए पूंजीगत व्यय के बल पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बुनियाद बेहद स्थिर बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में कारोबार करने वाले प्रतिभागी अब आगामी गैर-कृषि पेरोल और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के नए आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। इन आंकड़ों के सामने आने से पहले यह विमर्श तेज हो गया है कि क्या मुद्रास्फीति में नरमी फेडरल रिजर्व को नीतिगत दर वृद्धि की गति धीमी करने पर विवश करेगी या फिर मजबूती से टिके आंतरिक मूल्य दबाव डॉलर की इस तेजी को आगे भी बरकरार रखेंगे।
सकल घरेलू उत्पाद और मुद्रास्फीति के आंकड़ों में मिलाजुला रुख
हालिया आर्थिक विश्लेषणों के अनुसार, सकल घरेलू उत्पाद और कोर पीसीई के संशोधित आंकड़े एक मिलाजुला संकेत प्रस्तुत करते हैं। इसमें विकास के पिछले आंकड़ों में आक्रामक समायोजन देखा गया है, जबकि मुद्रास्फीति के मोर्चे पर कुछ नरमी दर्ज की गई है। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित दिशा है, जहां लगातार बढ़ती आर्थिक वृद्धि और मूल्य वृद्धि के जोखिम नीति निर्धारकों के दृष्टिकोण पर हावी रहने वाले हैं। मजबूत उपभोक्ता मांग और पूंजीगत व्यय की निरंतरता को देखते हुए तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि के अनुमान को संशोधित करके 3.0 प्रतिशत तिमाही-दर-तिमाही वार्षिक दर कर दिया गया है। घरेलू मांग के क्षेत्र में मजबूती लगातार बनी हुई है। इसके साथ ही अनुमान लगाया गया है कि कोर पीसीई मुद्रास्फीति 2026 के अंत तक 3.0 प्रतिशत वार्षिक दर पर रहेगी, जबकि अगले वर्ष यह घटकर 2.5 प्रतिशत पर आ सकती है।
एमयूएफजी का दृष्टिकोण और नीतिगत दरों का आकलन
एमयूएफजी में ली हार्डमैन ने रेखांकित किया कि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स का 101.80 के जून के उच्चतम स्तर पर पहुंचना इस बात का परिचायक है कि डॉलर का मोमेंटम बना हुआ है, भले ही नरम मुद्रास्फीति आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के उदार बयानों ने आक्रामक मौद्रिक सख्ती की आशंकाओं को कुछ हद तक शांत किया हो। तीन महीने की वार्षिक कोर पीसीई वृद्धि दर घटकर 2.1 प्रतिशत पर आ गई है। इससे अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले अक्टूबर के महीने में लगातार दूसरी बार ब्याज दरों में तीव्र बढ़ोतरी होने की संभावना काफी घट गई है। इस बदलाव ने आगामी श्रम बाजार और सीपीआई आंकड़ों के महत्व को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
ली हार्डमैन ने कहा कि
"The US dollar’s upward momentum has continued even after recent Fed rhetoric and softer US inflation data should help to dampen expectations for more aggressive Fed hikes."संशोधित आंकड़ों के बाद केंद्रीय बैंक द्वारा ट्रैक किए जाने वाले अंतर्निहित मुद्रास्फीति दबावों में मंदी के स्पष्ट प्रमाण सामने आए हैं। तीन महीने की वार्षिक दर घटकर 2.1 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच टकराव शुरू होने के बाद से छह महीने की वार्षिक विकास दर धीमी होकर 2.7 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस स्थिति के कारण फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में उतनी आक्रामक वृद्धि करने की संभावना घट जाती है जितनी बाजार ने पहले से मान रखी थी।
वैश्विक मुद्राओं पर दबाव और बॉन्ड यील्ड का प्रभाव
मजबूत अमेरिकी डॉलर के सामने अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं को संघर्ष करना पड़ रहा है। गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) अपने दो महीने के निचले स्तर के करीब स्थिर होकर 0.6900 के मध्य दायरे में कारोबार करता दिखा। हालांकि पीसीई आंकड़ों ने अक्टूबर में ब्याज दरों में तेज वृद्धि की संभावनाओं को कमजोर किया है, लेकिन कच्चे तेल के कारण उत्पन्न महंगाई की चिंताओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊंचे स्तरों पर बनाए रखा है। दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष अगस्त में तेजी से गिरकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, हालांकि इस आंकड़े का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर बेहद सीमित असर देखा गया।
जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) गुरुवार को एशियाई सत्र के दौरान अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी स्तर 158.00 से ऊपर टिका रहा। नरम पीसीई आंकड़ों के बावजूद तेल से जुड़े मुद्रास्फीति जोखिमों ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को बहु-वर्षीय ऊंचाइयों के करीब बनाए रखा है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को बढ़ा रहा है, जिससे इस मुद्रा जोड़ी को निरंतर समर्थन मिल रहा है। डॉलर की व्यापक मजबूती ने बैंक ऑफ जापान की सख्ती की उम्मीदों और जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित बाजार हस्तक्षेप के जोखिम को भी पीछे छोड़ दिया है।
यूरोपीय मोर्चे पर यूरो बनाम अमेरिकी डॉलर (EUR/USD) गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 के स्तर तक लुढ़क गई थी और यह अपने जनवरी के शिखर 1.2082 से काफी नीचे कारोबार कर रही है। हालांकि, यूरो क्षेत्र में मुद्रास्फीति का कोई नया झटका यूरो को अप्रत्याशित सहारा दे सकता है।
सोना और क्रिप्टोकरेंसी बाजार में नरमी का दौर
मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड का सीधा असर सुरक्षित माने जाने वाले सोने पर भी देखा जा रहा है। गुरुवार को सोने की कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया क्योंकि मजबूत डॉलर और बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने कीमती धातु की बढ़त को रोक दिया। सोने का हाजिर भाव 0.26 प्रतिशत की दैनिक बढ़त के साथ लगभग $4,167 प्रति औंस पर दर्ज किया गया, जहां यह धातु अपनी शुरुआती रिकवरी को गति देने के लिए जूझती नजर आई।
डिजिटल एसेट्स यानी क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी दबाव की स्थिति साफ दिखाई दे रही है। बिटकॉइन मोटे तौर पर $82,500 के सपोर्ट और $85,000 के रेजिस्टेंस के बीच एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। इसी प्रकार एथेरियम पर भी लगातार दबाव बना हुआ है, जो $2,700 के नीचे कारोबार कर रहा है, जबकि $2,600 का स्तर इसे तत्काल सहारा प्रदान कर रहा है। इसके साथ ही रिपल भी अपने महत्वपूर्ण $1.50 के स्तर से नीचे फिसल चुका है।
पेरोल आंकड़ों से पहले बंटी बाजार की राय
सितंबर के गैर-कृषि पेरोल आंकड़े जारी होने से पहले अमेरिकी डॉलर अपने वार्षिक उच्चतम स्तर के बेहद करीब बना हुआ है। बाजार के विश्लेषक और रणनीतिकार इस बात को लेकर दो बराबर हिस्सों में बंटे नजर आ रहे हैं। एक पक्ष का मानना है कि रोजगार रिपोर्ट आने तक अमेरिकी डॉलर में खरीदारी का रुझान बना रहेगा और इसमें ऊपर की ओर एक नया ब्रेकआउट देखने को मिल सकता है। वहीं, दूसरा पक्ष यह तर्क दे रहा है कि डॉलर की यह हालिया तेजी अब जरूरत से ज्यादा आगे निकल चुकी है और यहां से इसमें तकनीकी सुधार या मुनाफावसूली की संभावना बढ़ रही है। आने वाले श्रम और मुद्रास्फीति के आंकड़े ही यह तय करेंगे कि अमेरिकी मौद्रिक नीति और डॉलर की आगे की दिशा क्या रहने वाली है।

















