कड़कनाथ मुर्गी पालन से कम लागत में तगड़ी कमाई, जानिए शेड से लेकर बिक्री का पूरा गणितभारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का नया रिकॉर्ड, 12 वर्षों में 843 अरब डॉलर पहुंचा कुल एफडीआईकार्यकाल पूरा होने से पहले ही एलआईसी प्रबंध निदेशक दिनेश पंत ने दिया इस्तीफा, सरकार ने मंजूर की वीआरएस अर्जीवैश्विक बॉन्ड बिकवाली और कच्चे तेल में उछाल से अमेरिकी डॉलर मजबूत, मुद्रा और कमोडिटी बाजारों पर गहराया दबावकर्नाटक में सूखे की मार झेल रहे किसानों को फौरी राहत, हर खाते में 2,500 रुपये की इनपुट सब्सिडी देगी सरकारशाकाहारी थाली से ही हर दिन मिल सकता है 90 ग्राम से अधिक प्रोटीन, जानिए पूरे दिन का आसान मील प्लानछह महीने में 214 फीसदी रिटर्न के बाद रेमंड में मुनाफावसूली, डिफेंस इंडेक्स की बढ़त के बीच गिरा शेयरसिलिकॉन चिप्स के मुकाबले लैब में तैयार इंसानी न्यूरॉन्स से बदल रही कंप्यूटिंग की दुनियाकठोर नारियल से साबुत गिरी निकालना अब नहीं रहेगा मुश्किल, आजमाएं ये 3 आसान घरेलू तरीकेनए आशियाने की पूजा में पारंपरिक साड़ियों से संवारें अपना उत्सव, सिल्क से लेकर सूती तक बेहतरीन विकल्प
अल नीनो से निपटने को मेघालय ने कसी कमर, मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने दिए ब्लॉक स्तर पर टीमें बनाने के निर्देशमेघालय
25 सित॰ 2026, 7:19 pm (36 मिनट पहले)· 0

अल नीनो से निपटने को मेघालय ने कसी कमर, मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने दिए ब्लॉक स्तर पर टीमें बनाने के निर्देश

मेघालय में अल नीनो के संभावित प्रभावों और मौसम से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने पेयजल सुरक्षा, प्राकृतिक खेती और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

मेघालय में अल नीनो और मौसम चक्र में आ रहे बदलावों के संभावित खतरों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा की अध्यक्षता में मेघालय स्टेट काउंसिल ऑन क्लाइमेट चेंज की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें मौसम संबंधी विभिन्न चुनौतियों से निपटने और प्रशासनिक तालमेल को मजबूत करने की योजना की समीक्षा की गई। बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि अल नीनो के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्य की व्यवस्था पहले से तैयार रहनी चाहिए। इस पूरी कवायद में पेयजल सुरक्षा, कृषि क्षेत्र की हिफाजत और संवेदनशील जलग्रहण क्षेत्रों का संरक्षण सबसे प्रमुख चिंताओं के रूप में सामने आए हैं।

जमीनी स्तर पर बनेगी निगरानी व्यवस्था

मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने विभागों के बीच आपसी तालमेल को बेहतर करने के निर्देश दिए हैं। जमीनी स्तर पर जलवायु तैयारियों को प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने ब्लॉक स्तर पर क्लाइमेट एक्शन टीमों के गठन का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट क्लाइमेट एडॉप्टेशन एंड रेजिलिएंस टास्क फोर्स को तुरंत सक्रिय करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि केवल उच्च स्तर पर नीतियां बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर जिले, ब्लॉक और गांव के स्तर पर नियमित समीक्षा और निगरानी होनी चाहिए, जिससे जमीनी असर का सही मूल्यांकन किया जा सके। जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सूचना, शिक्षा और संचार अभियानों को तेज किया जाएगा, जिसमें स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा।

पेयजल सुरक्षा और जल स्रोतों का पुनरुद्धार

बैठक में समीक्षा के दौरान बताया गया कि राज्य में प्री-मानसून का दौर लगभग सामान्य रहा है। हालांकि, भविष्य में संभावित कम बारिश की आशंका को देखते हुए पानी की कमी न हो, इसके लिए पुख्ता रणनीति बनाई जा रही है। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि यदि बारिश सामान्य से कम होती है, तो भी पेयजल आपूर्ति की पर्याप्त तैयारी रहनी चाहिए। इसके समाधान के रूप में प्राकृतिक झरनों और अन्य महत्वपूर्ण जल स्रोतों के पुनरुद्धार पर काम किया जाएगा। संवेदनशील जलसंभर या कैचमेंट क्षेत्रों में सघन पौधारोपण कार्यक्रमों का विस्तार करने की योजना भी बनाई गई है, जिससे भूजल स्तर को स्थिर रखा जा सके।

खेती की सुरक्षा और आगामी महीनों की रूपरेखा

कृषि क्षेत्र को जलवायु जोखिमों से बचाने के लिए विभिन्न विभागों के समन्वय से प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें किसानों को एक-दूसरे से सीखने और प्रशिक्षित करने के मॉडल पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा फसलों को होने वाले रोगों, विशेष रूप से अदरक में लगने वाली सॉफ्ट रॉट बीमारी जैसी चुनौतियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। कॉनराड के संगमा ने एक्स पर लिखा कि नवंबर से मार्च तक का समय तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि संभावित परिस्थितियों के अनुरूप स्पष्ट कार्ययोजना और मानक संचालन प्रक्रियाएं पहले से तैयार रखी जाएं, ताकि किसी भी व्यवधान से निपटा जा सके।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

मेघालय में अल नीनो की तैयारियों की समीक्षा किसने की?
मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने मेघालय स्टेट काउंसिल ऑन क्लाइमेट चेंज की बैठक की अध्यक्षता करते हुए इन तैयारियों की समीक्षा की।
तैयारियों के लिए कौन सी समयसीमा सबसे महत्वपूर्ण बताई गई है?
मुख्यमंत्री ने कहा कि नवंबर से मार्च तक का समय तैयारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा, जिसके लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं बनाई जा रही हैं।
जमीनी स्तर पर जलवायु निगरानी के लिए क्या कदम उठाया जा रहा है?
ब्लॉक स्तर पर क्लाइमेट एक्शन टीमों के गठन का प्रस्ताव रखा गया है और जिला टास्क फोर्स को तुरंत सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में पेयजल सुरक्षा को लेकर क्या योजना बनाई गई?
कम बारिश की स्थिति से निपटने के लिए प्राकृतिक झरनों का पुनरुद्धार करने और संवेदनशील कैचमेंट क्षेत्रों में पौधारोपण बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
कृषि क्षेत्र में किन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई?
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, किसान प्रशिक्षण और अदरक की फसल में लगने वाली सॉफ्ट रॉट बीमारी से निपटने पर चर्चा हुई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 मिनट पहले

अल नीनो का असर सिर्फ मौसम पर नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में कानून-व्यवस्था पर भी पड़ सकता है क्योंकि पानी और खेती के संकट से गांवों में तनाव और अपराध बढ़ने का खतरा रहता है। सरकार का ब्लॉक स्तर पर टीमों को उतारना सही कदम है ताकि वक्त रहते स्थिति संभाली जा सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 मिनट पहले

करण, बात तो बिल्कुल सही है तुम्हारी। पर सवाल ये है कि ब्लॉक स्तर की ये टीमें धरातल पर सचमुच काम कर पाएंगी या सिर्फ कागजों में ही रहेंगी?

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp