मेघालय में अल नीनो और मौसम चक्र में आ रहे बदलावों के संभावित खतरों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा की अध्यक्षता में मेघालय स्टेट काउंसिल ऑन क्लाइमेट चेंज की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें मौसम संबंधी विभिन्न चुनौतियों से निपटने और प्रशासनिक तालमेल को मजबूत करने की योजना की समीक्षा की गई। बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि अल नीनो के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्य की व्यवस्था पहले से तैयार रहनी चाहिए। इस पूरी कवायद में पेयजल सुरक्षा, कृषि क्षेत्र की हिफाजत और संवेदनशील जलग्रहण क्षेत्रों का संरक्षण सबसे प्रमुख चिंताओं के रूप में सामने आए हैं।
जमीनी स्तर पर बनेगी निगरानी व्यवस्था
मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने विभागों के बीच आपसी तालमेल को बेहतर करने के निर्देश दिए हैं। जमीनी स्तर पर जलवायु तैयारियों को प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने ब्लॉक स्तर पर क्लाइमेट एक्शन टीमों के गठन का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट क्लाइमेट एडॉप्टेशन एंड रेजिलिएंस टास्क फोर्स को तुरंत सक्रिय करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि केवल उच्च स्तर पर नीतियां बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर जिले, ब्लॉक और गांव के स्तर पर नियमित समीक्षा और निगरानी होनी चाहिए, जिससे जमीनी असर का सही मूल्यांकन किया जा सके। जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सूचना, शिक्षा और संचार अभियानों को तेज किया जाएगा, जिसमें स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा।
पेयजल सुरक्षा और जल स्रोतों का पुनरुद्धार
बैठक में समीक्षा के दौरान बताया गया कि राज्य में प्री-मानसून का दौर लगभग सामान्य रहा है। हालांकि, भविष्य में संभावित कम बारिश की आशंका को देखते हुए पानी की कमी न हो, इसके लिए पुख्ता रणनीति बनाई जा रही है। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि यदि बारिश सामान्य से कम होती है, तो भी पेयजल आपूर्ति की पर्याप्त तैयारी रहनी चाहिए। इसके समाधान के रूप में प्राकृतिक झरनों और अन्य महत्वपूर्ण जल स्रोतों के पुनरुद्धार पर काम किया जाएगा। संवेदनशील जलसंभर या कैचमेंट क्षेत्रों में सघन पौधारोपण कार्यक्रमों का विस्तार करने की योजना भी बनाई गई है, जिससे भूजल स्तर को स्थिर रखा जा सके।
खेती की सुरक्षा और आगामी महीनों की रूपरेखा
कृषि क्षेत्र को जलवायु जोखिमों से बचाने के लिए विभिन्न विभागों के समन्वय से प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें किसानों को एक-दूसरे से सीखने और प्रशिक्षित करने के मॉडल पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा फसलों को होने वाले रोगों, विशेष रूप से अदरक में लगने वाली सॉफ्ट रॉट बीमारी जैसी चुनौतियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। कॉनराड के संगमा ने एक्स पर लिखा कि नवंबर से मार्च तक का समय तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि संभावित परिस्थितियों के अनुरूप स्पष्ट कार्ययोजना और मानक संचालन प्रक्रियाएं पहले से तैयार रखी जाएं, ताकि किसी भी व्यवधान से निपटा जा सके।





















