तूरा के जिला सभागार में एक विशेष समारोह के दौरान मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने मंगलवार को 'ट्रेसिंग द रूट्स' नामक महत्वाकांक्षी परियोजना का आधिकारिक शुभारंभ किया। इस नए प्रशासनिक कदम का मुख्य उद्देश्य राज्य के तमाम स्थानीय समुदायों की प्राचीन संस्कृति, जड़ों और ऐतिहासिक पहचान को वैज्ञानिक तरीके से सहेजना तथा उसके बारे में गहरी जानकारी जुटाना है।
समारोह में मंत्रियों और विधायकों की मौजूदगी
इस उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान कला और संस्कृति मंत्री सनबोर शुल्लई तथा विधायक महताब चंडी ए. संगमा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन तूरा शहर के मुख्य जिला सभागार में संपन्न हुआ, जहां स्थानीय प्रशासन और संस्कृति से जुड़े कई गणमान्य लोग भी एकत्र हुए थे।
दिवंगत नेता की प्रेरणा और जन्मदिन का संयोग
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस अनूठी शोध परियोजना की प्रेरणा उन्हें अपने दिवंगत पिता, पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष पूर्णो अगीतोक संगमा के विचारों से मिली थी। उन्होंने इस पूरी रिसर्च पहल को मेघालय की जनता को समर्पित किया और कहा कि उनके पिता की 79वीं जयंती के मौके पर इसकी शुरुआत करना उनके महान राजनीतिक और सामाजिक योगदान को एक सच्ची श्रद्धांजलि है।
अतीत की यादें और वैचारिक नींव
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने पिता के साथ हुई पुरानी बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि उनके पिता इस बात को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे कि मेघालय की मूल जातियों, खासकर गारो समुदाय के इतिहास और प्रवास पर वैज्ञानिक शोध की कमी है। उन्होंने कहा कि उनके पिता का मानना था कि हर समुदाय की जड़ों का दस्तावेजीकरण होना चाहिए।
कॉनराड के संगमा ने बताया कि उनके पिता के साथ हुई वे सामान्य बातचीत उनके जीवन और राज्य के विकास के लिए एक मार्गदर्शिका की तरह साबित हुईं। उन्होंने कहा कि लगभग दो साल पहले उन्होंने यह ठान लिया था कि संस्कृति के सभी पहलुओं का अध्ययन करने के लिए एक ठोस कार्यक्रम शुरू किया जाना चाहिए ताकि वास्तविक पहचान के पुख्ता प्रमाण सामने आ सकें।
शोध का दायरा और अंतरराष्ट्रीय यात्राएं
इस व्यापक परियोजना के तहत कुल 75 शोधार्थी वियतनाम, कंबोडिया और तिब्बत की यात्रा करेंगे ताकि खासी, जयंतिया और गारो समुदायों के उद्गम तथा ऐतिहासिक सफर का बारीकी से अध्ययन किया जा सके। खासी-जयंतिया शोध दल दक्षिण पूर्व एशिया के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक जुड़ाव की पुनः जांच करेगा, जबकि गारो अध्ययन दल तिब्बत या उत्तरी उच्च भूमि की परिकल्पना समेत विभिन्न सिद्धांतों की गहराई से पड़ताल करेगा।
इस संबंध में मुख्यमंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात साझा करते हुए लिखा कि इस पहल की जड़ें उनके पिता के उन विचारों में समाहित हैं जिनमें वे हमेशा स्थानीय इतिहास के वैज्ञानिक अनुसंधान पर जोर देते थे।
एक डिजिटल ई-पोर्टल और व्यापक उद्देश्य
यह परियोजना केवल अकादमिक शोध तक सीमित नहीं रखी जाएगी, बल्कि इसके माध्यम से सामूहिक स्मृति और विरासत को भी सहेजा जाएगा। शोध के निष्कर्षों को आम जनता और शिक्षाविदों तक आसानी से पहुंचाने के लिए एक समर्पित ई-पोर्टल भी लॉन्च किया गया है, जो डेटा और जानकारी का मुख्य केंद्र बनेगा। इससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए डिजिटलアーカイブ और शैक्षिक संसाधन तैयार होने की उम्मीद है।





















