मेघालय में छोटे पैमाने पर कोयला खनन के पुनरुद्धार की दिशा में एक अहम प्रशासनिक कदम उठाया गया है। केंद्रीय कोयला मंत्रालय की एक विशेष तकनीकी टीम ने पिछले सप्ताह राज्य के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी परिस्थितियों का विस्तृत जायजा लिया। इस दल ने विशेष रूप से ईस्ट जयंतिया हिल्स और खासी हिल्स के चिन्हित खनन क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस संयुक्त निरीक्षण दल में सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (CMPDIL) तथा खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) के वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे। उनके साथ मेघालय सरकार के खनिज संसाधन निदेशालय के अधिकारी भी मौजूद रहे।
यह दौरा राज्य प्रशासन और केंद्र सरकार के बीच चल रहे उस संवाद का हिस्सा है, जिसके तहत मेघालय में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से लगाई गई रोक के बाद से ठप पड़ी खनन गतिविधियों को दोबारा सुरक्षित रूप से संचालित करने के रास्ते तलाशे जा रहे हैं। एनजीटी द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण राज्य में पारंपरिक खनन पूरी तरह निलंबित रहा है, जिसका सीधा असर स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर पड़ा है।
जमीनी कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन
क्षेत्रीय दौरे के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों ने इन इलाकों में पहले से प्रचलित खनन पद्धतियों का गहन अध्ययन किया। टीम ने इस बात की पड़ताल की कि क्या मौजूदा कानूनी और नियामक ढांचे के भीतर रहकर यहां सुरक्षित, वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टि से टिकाऊ तरीके से कोयला उत्खनन फिर से शुरू किया जा सकता है। मेघालय की विशिष्ट भूगर्भीय संरचना और यहां की पारंपरिक भूमि-स्वामित्व व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए खनन सुरक्षा के विशेष मानकों की जरूरत है, जिसका आकलन इस दल ने किया।
स्थलीय निरीक्षण पूरा करने के बाद तकनीकी टीम ने मेघालय सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक भी की। इस बैठक में स्थानीय खनिकों के सामने आने वाली दिक्कतों, आधुनिक वैज्ञानिक खनन के लिए जरूरी तकनीकी और सुरक्षा उपायों तथा आगामी कदमों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई।
आजीविका और पर्यावरण संतुलन पर जोर
इस पूरे मामले को गति देने के लिए मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने 7 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से मुलाकात की थी और कोयला क्षेत्र पर निर्भर परिवारों की चिंताओं को प्रमुखता से उठाया था। राज्य सरकार का मानना है कि इस क्षेत्र से हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है, इसलिए कड़े नियमों के साथ इसका समाधान निकालना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री संगमा ने इस प्रक्रिया को लेकर कहा, “हमारी सरकार मेघालय में कोयला खनन को फिर से शुरू करने के व्यावहारिक विकल्पों की तलाश के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें आर्थिक प्रगति और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि कोयला मंत्रालय और स्थानीय खनिकों के साथ मिलकर काम करने से एक ऐसा तंत्र तैयार किया जा सकता है जो टिकाऊ, सुरक्षित और वैज्ञानिक खनन संचालन सुनिश्चित करे।
आगामी हफ्तों में आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
राज्य सरकार ने तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय, सीएमपीडीआईएल और डीजीएमएस के प्रति आभार व्यक्त किया है। आने वाले हफ्तों में इस संबंध में और अधिक विस्तृत तकनीकी आकलन किए जाने और दोनों पक्षों के बीच अनुवर्ती बैठकें आयोजित होने की संभावना है। राज्य का खनिज संसाधन निदेशालय इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कोयला मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखेगा।
























