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मेघालय में छोटे पैमाने पर कोयला खनन फिर शुरू करने की तैयारी, केंद्रीय तकनीकी टीम ने किया खदान क्षेत्रों का दौरामेघालय
11 अक्तू॰ 2026, 1:51 pm (2 घंटे पहले)· 0

मेघालय में छोटे पैमाने पर कोयला खनन फिर शुरू करने की तैयारी, केंद्रीय तकनीकी टीम ने किया खदान क्षेत्रों का दौरा

ईस्ट जयंतिया हिल्स और खासी हिल्स में केंद्रीय कोयला मंत्रालय की संयुक्त टीम ने तकनीकी और सुरक्षा मानकों का जायजा लिया, जिससे मेघालय में लंबे समय से ठप पड़े छोटे पैमाने के कोयला खनन को कानूनी ढांचे के तहत दोबारा शुरू करने की उम्मीद बढ़ी है।

मेघालय में छोटे पैमाने पर कोयला खनन के पुनरुद्धार की दिशा में एक अहम प्रशासनिक कदम उठाया गया है। केंद्रीय कोयला मंत्रालय की एक विशेष तकनीकी टीम ने पिछले सप्ताह राज्य के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी परिस्थितियों का विस्तृत जायजा लिया। इस दल ने विशेष रूप से ईस्ट जयंतिया हिल्स और खासी हिल्स के चिन्हित खनन क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस संयुक्त निरीक्षण दल में सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (CMPDIL) तथा खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) के वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे। उनके साथ मेघालय सरकार के खनिज संसाधन निदेशालय के अधिकारी भी मौजूद रहे।

यह दौरा राज्य प्रशासन और केंद्र सरकार के बीच चल रहे उस संवाद का हिस्सा है, जिसके तहत मेघालय में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से लगाई गई रोक के बाद से ठप पड़ी खनन गतिविधियों को दोबारा सुरक्षित रूप से संचालित करने के रास्ते तलाशे जा रहे हैं। एनजीटी द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण राज्य में पारंपरिक खनन पूरी तरह निलंबित रहा है, जिसका सीधा असर स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर पड़ा है।

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जमीनी कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन

क्षेत्रीय दौरे के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों ने इन इलाकों में पहले से प्रचलित खनन पद्धतियों का गहन अध्ययन किया। टीम ने इस बात की पड़ताल की कि क्या मौजूदा कानूनी और नियामक ढांचे के भीतर रहकर यहां सुरक्षित, वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टि से टिकाऊ तरीके से कोयला उत्खनन फिर से शुरू किया जा सकता है। मेघालय की विशिष्ट भूगर्भीय संरचना और यहां की पारंपरिक भूमि-स्वामित्व व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए खनन सुरक्षा के विशेष मानकों की जरूरत है, जिसका आकलन इस दल ने किया।

स्थलीय निरीक्षण पूरा करने के बाद तकनीकी टीम ने मेघालय सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक भी की। इस बैठक में स्थानीय खनिकों के सामने आने वाली दिक्कतों, आधुनिक वैज्ञानिक खनन के लिए जरूरी तकनीकी और सुरक्षा उपायों तथा आगामी कदमों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई।

आजीविका और पर्यावरण संतुलन पर जोर

इस पूरे मामले को गति देने के लिए मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने 7 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से मुलाकात की थी और कोयला क्षेत्र पर निर्भर परिवारों की चिंताओं को प्रमुखता से उठाया था। राज्य सरकार का मानना है कि इस क्षेत्र से हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है, इसलिए कड़े नियमों के साथ इसका समाधान निकालना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री संगमा ने इस प्रक्रिया को लेकर कहा, “हमारी सरकार मेघालय में कोयला खनन को फिर से शुरू करने के व्यावहारिक विकल्पों की तलाश के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें आर्थिक प्रगति और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि कोयला मंत्रालय और स्थानीय खनिकों के साथ मिलकर काम करने से एक ऐसा तंत्र तैयार किया जा सकता है जो टिकाऊ, सुरक्षित और वैज्ञानिक खनन संचालन सुनिश्चित करे।

आगामी हफ्तों में आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

राज्य सरकार ने तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय, सीएमपीडीआईएल और डीजीएमएस के प्रति आभार व्यक्त किया है। आने वाले हफ्तों में इस संबंध में और अधिक विस्तृत तकनीकी आकलन किए जाने और दोनों पक्षों के बीच अनुवर्ती बैठकें आयोजित होने की संभावना है। राज्य का खनिज संसाधन निदेशालय इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कोयला मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखेगा।

सवाल-जवाब

केंद्रीय तकनीकी टीम ने मेघालय के किन क्षेत्रों का दौरा किया?
केंद्रीय कोयला मंत्रालय की टीम ने ईस्ट जयंतिया हिल्स और खासी हिल्स के प्रमुख कोयला क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया।
इस तकनीकी निरीक्षण दल में कौन-कौन सी संस्थाएं शामिल थीं?
इस दल में सीएमपीडीआईएल (CMPDIL) और डीजीएमएस (DGMS) के विशेषज्ञ शामिल थे, जिनके साथ मेघालय के खनिज संसाधन निदेशालय के अधिकारी भी मौजूद रहे।
मेघालय में कोयला खनन किस वजह से बंद था?
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा पर्यावरण और सुरक्षा चिंताओं के कारण लगाए गए प्रतिबंध के बाद से राज्य में खनन गतिविधियां निलंबित थीं।
मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने केंद्रीय कोयला मंत्री से कब मुलाकात की थी?
मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 7 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से मुलाकात की थी।
इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत सुरक्षित, वैज्ञानिक और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से छोटे पैमाने पर कोयला खनन फिर शुरू करने की संभावनाओं का मूल्यांकन करना था।
इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?
आगामी हफ्तों में विस्तृत तकनीकी आकलन और अनुवर्ती बैठकें आयोजित की जाएंगी ताकि खनन शुरू करने की रूपरेखा तय की जा सके।
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टिप्पणियाँ 5

Vikram Yadav@vikram-yadav·34 मिनट पहले

माइनिंग बंद होने से घर चलाना मुश्किल हो गया था, अब नियम से ही सही पर काम शुरू होना चाहिए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·52 मिनट पहले

एनजीओ और ग्रीन ट्रिब्यूनल की पाबंदियों के बाद कॉनराड संगमा का यूं लगातार केंद्र के चक्कर काटना साफ दिखाता है कि स्थानीय स्तर पर दबाव बहुत ज्यादा है। चुनाव के वक्त ये मुद्दा फिर जोर पकड़ेगा।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·52 मिनट पहले

अरिजन, बात तो सही है। चुनावों से पहले राजनीति गरमाना तय है, लेकिन अगर वैज्ञानिक तरीके से खदानें खुलीं तो लोगों की रोजी-रोटी भी बच जाएगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

सुरक्षा और कानूनी ढांचे की बात तो ठीक है, पर ईस्ट जयंतिया हिल्स में अवैध खनन पर रोक लगाना इतना आसान नहीं होगा। पहले भी कमेटियां बनी हैं और जमीन पर हालात जस के तस रहे हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

करण, बात तो सही है कि ज़मीन पर सख्ती मुश्किल होती है, पर इस बार सीएम संगमा खुद दिल्ली जाकर मिले हैं तो कुछ तो बदलाव दिखेगा ही।

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