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मेघालय में रविवार को बैंक खोलने पर टकराव के आसार, सामाजिक संगठन ने दी अंतिम चेतावनीमेघालय
25 सित॰ 2026, 6:40 pm (1 घंटे पहले)· 1

मेघालय में रविवार को बैंक खोलने पर टकराव के आसार, सामाजिक संगठन ने दी अंतिम चेतावनी

मेघालय में 27 सितंबर को रविवार के दिन बैंक शाखाएं खोलने की योजना का कन्फेडरेशन ऑफ मेघालय सोशल ऑर्गनाइज़ेशन्स ने कड़ा विरोध किया है। संगठन ने बैंकों को अंतिम नोटिस भेजते हुए चेताया है कि धार्मिक और सामाजिक भावनाओं की अनदेखी होने पर राज्यव्यापी जनविरोध किया जाएगा।

मेघालय के भीतर रविवार के दिन बैंकिंग कामकाज जारी रखने के प्रशासनिक फैसले को लेकर तीखा विरोध शुरू हो गया है। राज्य की सामाजिक संस्थाओं के साझा मंच कन्फेडरेशन ऑफ मेघालय सोशल ऑर्गनाइज़ेशन्स ने इस कदम पर सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित वित्तीय संस्थानों को सीधे चेतावनी जारी की है। संगठन का स्पष्ट कहना है कि 27 सितंबर 2026 को पड़ने वाले रविवार के दिन यदि बैंक सामान्य कामकाज के लिए खुले, तो समूचे राज्य में जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा और शाखाओं के संचालन का पुरजोर विरोध होगा।

प्रशासनिक फैसलों पर पुनर्विचार न होने का आरोप

संगठन के महासचिव बलकारिन च मारक ने शुक्रवार को इस संदर्भ में एक औपचारिक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि रविवार को शाखाएं खोलने की तैयारी के सामने आते ही आपत्ति दर्ज करा दी गई थी, लेकिन प्रशासनिक तंत्र और बैंक प्रबंधन ने जनता की इस चिंता पर ध्यान नहीं दिया। मारक के अनुसार, मेघालय के नागरिकों की वास्तविक आपत्तियों और सामाजिक संगठनों की आवाज़ को अनसुना कर दिया गया है, जिसके चलते अब कड़े कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

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धार्मिक और सामाजिक परंपराओं के उल्लंघन का मुद्दा

संगठन ने जोर देकर कहा कि मेघालय में रविवार का दिन केवल एक साप्ताहिक अवकाश भर नहीं है, बल्कि इसका गहरा सामाजिक और धार्मिक महत्व है। इस दिन लोग पारिवारिक आयोजनों, सामुदायिक मेलमिलाप और विशेष प्रार्थनाओं में हिस्सा लेते हैं। संगठन का मानना है कि प्रशासनिक सहूलियत का हवाला देकर राज्य के पारंपरिक ताने-बाने और धार्मिक मान्यताओं से समझौता नहीं किया जा सकता। अधिकारियों को यह समझना होगा कि कामकाज के प्रबंधन की आड़ में नागरिकों की आस्था की उपेक्षा कतई स्वीकार्य नहीं होगी।

शाखाओं को अंतिम नोटिस और आगे के कदम

वित्तीय संस्थानों को दिए गए इस निर्देश को संगठन ने एक अंतिम नोटिस करार दिया है। इसमें साफ कहा गया है कि यदि बैंक प्रबंधन अपने रुख पर अड़ा रहा और रविवार को काम शुरू किया, तो घटक संगठनों और स्थानीय निवासियों को सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। संगठन ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस टकराव से पैदा होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति या अव्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी उन अधिकारियों और संस्थानों पर होगी, जिन्होंने राज्य की सामाजिक विशिष्टता और जनभावनाओं का सम्मान करने से इनकार कर दिया। सामाजिक मंच ने बैंकों से तत्काल अपने फैसले को वापस लेने की मांग दोहराई है।

सवाल-जवाब

मेघालय में बैंक खोलने को लेकर विवाद किस तारीख का है?
यह विवाद रविवार, 27 सितंबर 2026 को बैंक शाखाएं सामान्य कामकाज के लिए खोलने के फैसले से जुड़ा है।
बैंकों को अंतिम नोटिस किस संगठन ने जारी किया है?
यह अंतिम नोटिस कन्फेडरेशन ऑफ मेघालय सोशल ऑर्गनाइज़ेशन्स की ओर से जारी किया गया है।
संगठन के किस पदाधिकारी ने यह चेतावनी दी है?
संगठन के महासचिव बलकारिन च मारक ने औपचारिक बयान जारी कर यह चेतावनी दी है।
मेघालय में रविवार को बैंक खोलने का विरोध क्यों हो रहा है?
संगठन के अनुसार मेघालय में रविवार का दिन धार्मिक प्रार्थना, परिवार और सामुदायिक जीवन के लिए पवित्र माना जाता है।
यदि बैंक खुले रहे तो संगठन ने क्या कदम उठाने की चेतावनी दी है?
संगठन ने कहा है कि यदि बैंक खुले तो राज्य के नागरिकों और घटक संगठनों को लामबंद कर शाखाओं के संचालन का विरोध किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·18 मिनट पहले

मुझे शिलोंग में बिताए वे शांत रविवार याद आ रहे हैं जब सब कुछ थम जाता था। इस तरह जबरन बैंक खोलना वहां के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना है।

Kavya Nair@kavya-nair·18 मिनट पहले

रविकेश, आपकी बात सही है। बलकारिन मारक भी तो यही कह रहे हैं कि वहां के लिए रविवार सिर्फ छुट्टी नहीं, आस्था का दिन है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·40 मिनट पहले

मुझे शिलांग में अपनी रिपोर्टिंग के दिन याद आ गए जब स्थानीय संगठनों के ऐसे विरोध पूरे शहर की रफ्तार थाम देते थे। बैंक और प्रशासन को लोगों की धार्मिक भावनाओं को ऐसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, वरना बात सचमुच बिगड़ सकती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·39 मिनट पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। प्रशासन को नीतियां बनाते वक्त स्थानीय परंपराओं का ध्यान रखना चाहिए, वरना ऐसे टकराव से विकास का पूरा माहौल खराब होता है।

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