मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रकों से पुलिस द्वारा कथित अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद छात्र संगठन खासी स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन की केंद्रीय कार्यकारी परिषद ने राज्य के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा को एक विस्तृत पत्र भेजकर मामले में सीधे हस्तक्षेप करने और जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विवेक स्यिएम को तुरंत पद से हटाने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि जिले में मावखानु और डिएंगपासोह के पास राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अवैध चौकियां बनाकर निर्माण सामग्री, मिट्टी और जरूरी खाद्य वस्तुओं को ले जाने वाले ट्रकों से खुलेआम अवैध वसूली की जा रही है।
केएसयू के अध्यक्ष रेमंड खारजाना और महासचिव रूबेन नाज़ियार के निर्देश पर 5 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री को यह औपचारिक पत्र भेजा गया। संगठन का कहना है कि ट्रक एसोसिएशनों और आम नागरिकों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन पुलिसिया प्रताड़ना और प्रतिशोध के डर से लोग थानों में आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज कराने से बच रहे थे। जब सोशल मीडिया और बयानों के जरिए बातें सामने आने के बावजूद पुलिस, जिला प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तब संगठन ने खुद जमीनी स्तर पर पड़ताल करने का फैसला किया।
स्टिंग ऑपरेशन में अवैध वसूली के वीडियो सबूत जुटाने का दावा
छात्र संगठन के अनुसार 30 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 3 बजे केएसयू केंद्रीय कार्यकारी परिषद के शिक्षा सचिव एलेरिक खारजाना के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मावखानु और थांगशलाई में एक स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया। कार्यकर्ताओं ने दोनों स्थानों पर लगभग एक घंटे तक नजर रखी और वीडियो रिकॉर्डिंग की। इस दौरान दोनों जगहों पर अस्थाई शेड जैसी संरचनाओं के पास 30 से 40 ट्रकों को रुकते देखा गया। फुटेज में साफ दिखाई दिया कि ट्रकों के खलासी या ड्राइवर उतरकर इन शेडों तक जाते हैं और वहां तैनात पुलिसकर्मियों को 200 रुपये से लेकर 500 रुपये तक थमाते हैं, जिसके बाद ही उन्हें आगे बढ़ने दिया जाता है।
संगठन ने यह भी बताया कि उसने मौके पर कई ट्रक चालकों के बयान भी रिकॉर्ड किए। ड्राइवरों ने साफ तौर पर कहा कि अगर वे पैसे नहीं देते हैं तो उन्हें पुलिसिया उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है और कई मामलों में तो मारपीट भी की जाती है। सबूत इकट्ठा करने के बाद जब संगठन के सदस्यों ने दोनों जगहों पर मौजूद पुलिसकर्मियों से आमना-सामना किया, तो मावखानु शेड पर एक पुलिसकर्मी पैसों से भरा बैग लेकर मौके से भाग निकला। वहीं थांगशलाई में पुलिसकर्मियों ने नकदी छिपा दी। संगठन के सदस्यों के पास तलाशी का कानूनी अधिकार नहीं होने के कारण उन्होंने कर्मियों की शारीरिक तलाशी नहीं ली। इसी दौरान कई ऐसे ड्राइवर भी कैमरे में कैद हुए जो हाथ में नकदी लिए शेड की तरफ बढ़ रहे थे और उन्हें कार्रवाई की भनक तक नहीं थी।
उच्च अधिकारियों के निर्देश और स्थानीय अधिकारियों की भूमिका
पत्र में उल्लेख किया गया है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने दावा किया कि उच्च अधिकारियों के आदेश मावरिनकनेंग पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी (ओसी) के माध्यम से उन तक पहुंचे थे, जो ईस्ट खासी हिल्स जिले के तहत आने वाली डिएंगपासोह पुलिस चौकी के भी प्रभारी हैं। हालांकि जब कार्यकर्ताओं ने पुलिसकर्मियों से ओसी को मौके पर बुलाने को कहा, तो फोन करने के बावजूद अधिकारी घटनास्थल पर नहीं पहुंचे।
केएसयू का कहना है कि यह पूरा मामला ईस्ट खासी हिल्स में एसपी विवेक स्यिएम की निगरानी में चल रहे एक संगठित और संस्थागत भ्रष्टाचार को दर्शाता है। संगठन का तर्क है कि इतने बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चलने वाला वसूली रैकेट केवल कुछ कांस्टेबलों या थाना प्रभारियों के स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी या मौन सहमति के बिना मुमकिन नहीं है। जिस व्यवस्थित तरीके से हर ट्रक शेड पर रुकता था और ड्राइवर पैसे देते थे, उससे स्पष्ट है कि यह व्यवस्था लंबे समय से चल रही थी और चालकों को व्यवस्था के आगे झुकने पर मजबूर किया गया था।
प्रशासनिक निष्क्रियता और कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल
छात्र संगठन ने बताया कि 18 जून 2026 को भी एक मीडिया चैनल ने पुलिस द्वारा ट्रक चालकों से अवैध वसूली का वीडियो जारी किया था, जो काफी वायरल हुआ था। इसके बावजूद पुलिस, जिला प्रशासन या सरकार ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया, बल्कि आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने पकड़े जाने से बचने के लिए अपने तरीके बदल लिए। केएसयू ने कहा कि यदि जिले के एसपी को इस बात की जानकारी नहीं थी तो यह उनकी प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है, और यदि वे जानते थे और चुप रहे तो वे भी इस वसूली में बराबर के हिस्सेदार हैं। संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि मावरिनकनेंग पुलिस स्टेशन में ओसी और अन्य पुलिसकर्मी कई वर्षों से बिना किसी तबादले के तैनात हैं, जिससे संदेह पैदा होता है कि तंत्र उन्हें संरक्षण दे रहा है।
संगठन ने 30 सितंबर के घटनाक्रम के बाद एसपी की प्रतिक्रिया को चौंकाने वाला करार दिया। पत्र में आरोप लगाया गया कि एसपी के निर्देश पर पुलिस ने तुरंत उन अस्थाई शेडों को ध्वस्त कर दिया, जो सीधे तौर पर फॉरेंसिक सबूतों को नष्ट करने जैसा कदम है। इसके अलावा, शामिल अधिकारियों को गिरफ्तार करने के बजाय केवल कांस्टेबलों को निलंबित किया गया और ओसी का तबादला कर दिया गया। संगठन ने इसे जनता का ध्यान भटकाने और छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाने का प्रयास बताया।
दैनिक वसूली का गणित और महंगाई पर असर
केएसयू ने बताया कि उनका स्टिंग दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे के बीच किया गया था, जब सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही अपेक्षाकृत कम होती है। रात के समय ट्रकों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। संगठन का अनुमान है कि इस मार्ग से रोजाना 500 से 800 ट्रक गुजरते हैं, जिससे हर रोज 1 लाख रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। संगठन ने रेखांकित किया कि ट्रकों से ली जाने वाली इस जबरन वसूली का सीधा बोझ आम जनता पर पड़ रहा है क्योंकि ढुलाई लागत बढ़ने से आवश्यक खाद्य पदार्थों और निर्माण सामग्रियों की कीमतें बढ़ रही हैं।
इसके अलावा, संगठन ने थांगशलाई स्थित अस्थाई पुलिस शेड की वैधता पर भी सवाल खड़े किए। पत्र में 3 अक्टूबर 2026 को स्थानीय समाचार पत्र यू नोंग्सेन हिमा में प्रकाशित थांगशलाई के श्नोंग सचिव यूस्टार खारुमनिद के बयान का हवाला दिया गया, जिसमें उन्होंने पुष्टि की थी कि स्थानीय दोरबार श्नोंग ने इस पुलिस शेड के लिए कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया था। संगठन का आरोप है कि पुलिस ने स्थानीय पारंपरिक प्रशासन की अनुमति के बिना जबरन यह ढांचा खड़ा किया था।
संगठन की तीन प्रमुख मांगें
संगठन ने 19 अगस्त को आयोजित अपनी ब्लैक फ्लैग मोटर रैली के घटनाक्रम का हवाला देते हुए पुलिस के दोहरे रवैये पर भी सवाल उठाए। संगठन ने कहा कि उस रैली में कुछ असामाजिक तत्वों की तोड़फोड़ के बाद केएसयू के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महासचिव को गिरफ्तार किया गया था और पुलिस ने तर्क दिया था कि संगठन के शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदार माना जाएगा। केएसयू ने कहा कि यही तर्क पुलिस महकमे पर भी लागू होना चाहिए और विभाग में होने वाली गड़बड़ियों के लिए एसपी और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराकर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री के समक्ष केएसयू ने निम्नलिखित तीन मुख्य मांगें रखी हैं
- एसपी विवेक स्यिएम को तत्काल पद से हटाया जाए ताकि वे सबूतों से छेड़छाड़ न कर सकें या गवाह बन सकने वाले पुलिसकर्मियों को प्रभावित न कर सकें, साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर संलिप्तता पाए जाने पर गिरफ्तारी हो।
- अवैध वसूली को रोकने में नाकाम रहने और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए ईस्ट खासी हिल्स के उपायुक्त को भी हटाया जाए।
- इस पूरे अवैध वसूली सिंडिकेट की जांच के लिए पुलिस के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त एक स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए।
केएसयू ने स्पष्ट किया कि वह किसी पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज नहीं कराएगा क्योंकि पुलिस खुद अपने खिलाफ निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती। संगठन ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि उसके इस पत्र को ही औपचारिक शिकायत मानकर मामले में तत्काल और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।





















