ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने शनिवार को एक खतरनाक मोड़ ले लिया। ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने कुवैत में मौजूद दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कामिकाजे ड्रोन से हमला किया है। तेहरान ने इस पूरी कार्रवाई को अपनी ज़मीन पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों का सीधा जवाब बताया।
सरकारी टेलीविज़न पर जारी बयान में इस्लामिक रिपब्लिक की सशस्त्र सेनाओं ने कहा कि ड्रोन ने कैंप उडैरी स्थित अमेरिकी गोला-बारूद डिपो के साथ-साथ अली अल सलेम एयरबेस पर तैनात पैट्रियट रडार और हवाई निगरानी रडार को निशाना बनाया। दोनों ठिकाने कुवैत में हैं, जो खाड़ी का एक छोटा देश है और लगातार इस संघर्ष की चपेट में आता जा रहा है।
ताज़ा टकराव की वजह क्या बनी
यह ड्रोन हमला उस वक्त हुआ जब कुछ ही घंटे पहले अमेरिका ने रविवार को ईरान पर हवाई हमलों का नया दौर शुरू किया था। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई शुक्रवार को जॉर्डन में एक सैन्य चौकी पर हुए घातक ड्रोन और मिसाइल हमले के जवाब में की गई। उस हमले में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए, एक लापता हो गया और चार अन्य को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
क्षेत्र में अमेरिकी सेना की कमान संभाल रहे अधिकारियों ने कहा कि जवाबी हमलों का मकसद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड को "तुरंत सज़ा देना" और होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही रोकने की तेहरान की क्षमता को कमज़ोर करना था। होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है।
ईरान के दक्षिणी होर्मोज़गान प्रांत के स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट के किनारे सिरिक के पास का एक इलाका स्थानीय समयानुसार करीब रात डेढ़ बजे निशाने पर आया। ये हमले ऐसे समय हुए जब पूरे क्षेत्र में तनाव फैल रहा था, इराक में ड्रोन हमलों की खबरें आईं, तेहरान से नई धमकियां आईं और कुवैत में आम नागरिकों तथा ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचा।
लगातार बढ़ता मौतों का आंकड़ा
अमेरिकी कमान ने ब्योरा बहुत कम दिया और जॉर्डन में मारे गए दोनों सैनिकों के नाम उजागर नहीं किए। फिर भी रक्षा अधिकारियों ने माना कि संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब सीधे ईरानी हमले में अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार लड़ाई शुरू होने के बाद से अब तक 16 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 430 से ज़्यादा घायल हुए हैं।
जनहानि का सिलसिला युद्ध के शुरुआती हफ्तों तक जाता है। जॉर्डन की मौतों से पहले सबसे हालिया अमेरिकी नुकसान एक हेलीकॉप्टर पायलट का था, जो इसी महीने अरब सागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। शुरुआती दौर में कुवैत में एक कमांड चौकी पर हुए ईरानी ड्रोन हमले में छह सैनिक मारे गए थे, सऊदी अरब में एक ठिकाने पर हमले में एक सैनिक की जान गई, और इराक में एक ईंधन भरने वाला विमान गिरने से छह अन्य सैनिकों की मौत हो गई थी।
कूटनीति पूरी तरह टूटी
जो थोड़ी-बहुत बातचीत की गुंजाइश बची थी, वह अब खत्म हो चुकी है। शनिवार को वॉशिंगटन के सैनिकों की मौत की पुष्टि करने से ठीक पहले ईरान के सर्वोच्च नेता ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने इस्लामिक रिपब्लिक पर हमले जारी रखे तो उसे "न भूलने वाले सबक" मिलेंगे।
टेलीविज़न पर आया यह बयान मोजतबा खामेनेई का बताया गया, जो युद्ध शुरू होने के बाद से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हस्ताक्षर को "बेकार और अमान्य" भी करार दिया। संकट को और गहरा करते हुए एक ईरानी वार्ताकार ने कहा कि तेहरान करीब एक महीने पहले हुए अंतरिम समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं से औपचारिक रूप से पीछे हट रहा है। यह समझौता लड़ाई को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए किया गया था।
तेहरान ने साफ कर दिया कि उसकी चेतावनी सिर्फ उसकी अपनी सेना तक सीमित नहीं, बल्कि उन क्षेत्रीय लड़ाकों तक भी है जिन्हें वह "एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस" कहता है। बढ़ते खतरे को देखते हुए वॉशिंगटन ने दुनिया भर के लिए यात्रा चेतावनी जारी कर दी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टेलीविज़न से कहा कि अमेरिका ने अंतरिम समझौते की अपनी शर्तों का उल्लंघन किया है और ईरान अब "उन्हें लागू नहीं कर रहा"। मध्यस्थता दोबारा शुरू होने के बारे में उन्होंने कुछ नहीं बताया।
होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण की जंग
इस पूरे टकराव की जड़ में होर्मुज स्ट्रेट है, एक संकरा समुद्री रास्ता जहां से युद्ध से पहले दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुज़रता था। जैसे-जैसे हवाई अभियान फैला है, आम लोगों और ज़रूरी ढांचों पर खतरा तेज़ी से बढ़ा है, जिनमें समुद्री पानी को पीने लायक बनाने वाले डिसैलिनेशन संयंत्र भी शामिल हैं।
सबसे ज़्यादा चोट कुवैत को
शनिवार के ईरानी हमलों की सबसे बड़ी तात्कालिक मार कुवैत पर पड़ी। वहां एक डिसैलिनेशन संयंत्र और एक पेट्रोलियम ठिकाने को निशाना बनाया गया, हालांकि कुवैती अधिकारियों और कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने सटीक जगहों का खुलासा नहीं किया। यह 48 घंटे के भीतर दूसरी बार था जब इस रेगिस्तानी देश में किसी डिसैलिनेशन संयंत्र पर हमला हुआ, जो अपनी 90 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति इसी प्रक्रिया से पूरी करता है।
हमलों में तेल ठिकाने पर कई लोग घायल हुए और डिसैलिनेशन संयंत्र में आग लग गई, जिससे बिजली बनाने वाली कई इकाइयां ठप हो गईं। कुवैत फायर फोर्स ने बताया कि बमबारी से भड़की दो अन्य आग पर काबू पाने के दौरान कई दमकलकर्मी और एक कर्मचारी घायल हो गए। अधिकारियों ने कुछ समय के लिए कुवैत का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, जिससे कुवैत एयरवेज को राजधानी से अपनी ज़्यादातर उड़ानें दोबारा तय करनी पड़ीं।
पड़ोसी देश बचाव में जुटे
यह उथल-पुथल तेज़ी से सीमाओं के पार फैली और आसपास के देशों को सतर्क कर दिया। जॉर्डन ने कहा कि उसकी वायु रक्षा इकाइयों ने कई आती हुई ईरानी मिसाइलों को रोककर मार गिराया। वहीं बहरीन में दिनभर बार-बार हवाई हमले के सायरन बजते रहे और सऊदी अरब में सुबह के समय सायरन गूंजे, क्योंकि पूरा क्षेत्र आगे की आशंका से खुद को संभालने में लगा रहा।




















