सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अहम तेल-गैस ठिकानों पर हूती लड़ाकों ने व्यापक मिसाइल हमला किया है। इस भीषण कार्रवाई में रियाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दो यात्री टर्मिनल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए, जहां कांच और मलबे की चपेट में आने से 309 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मृतकों में एक अमेरिकी नागरिक के शामिल होने के बाद वॉशिंगटन का रुख अचानक बेहद सख्त हो गया है। अमेरिका ने सीधे तौर पर हूती विद्रोहियों को अंजाम भुगतने की चेतावनी जारी की है, जबकि सऊदी अरब ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हूती नियंत्रण वाले कई इलाकों पर हवाई हमले किए हैं।
रियाद एयरपोर्ट के टर्मिनलों पर मिसाइल प्रहार और हताहतों का विवरण
हूती लड़ाकों ने रियाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के यात्री टर्मिनल 3 और टर्मिनल 4 को सीधे अपना निशाना बनाया। हमले के वक्त दोनों ही टर्मिनलों पर यात्रियों की भारी भीड़ मौजूद थी। जैसे ही मिसाइलें गिरीं, भारी धमाके के साथ कांच की विशाल दीवारें टूटकर बिखर गईं और टर्मिनल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। फर्श पर चारों ओर मलबे और कांच के धारदार टुकड़े बिखर गए, जिसकी जद में आकर सैकड़ों लोग लहूलुहान हो गए।
इस हमले में कुल 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में सऊदी अरब के 4 नागरिक और बांग्लादेश के 2 नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिका, मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, सूडान और फिलिस्तीन के 1-1 नागरिक की जान गई है। घटना में घायल हुए 309 से अधिक लोगों में से कई की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। हताहतों में कोई भी भारतीय, पाकिस्तानी या इजरायली नागरिक शामिल नहीं है।
सऊदी तेल ठिकानों पर प्रहार और वैश्विक प्रतिक्रिया
हवाई अड्डे के अलावा हूती लड़ाकों ने दम्माम और दुनिया के विशालतम तेल क्षेत्रों में शामिल घावर तेल-गैस फील्ड पर भी मिसाइलें दागी हैं। हमले के बाद हूती गुट ने सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने वाली अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों को सीधी चेतावनी दी है कि वे वहां से उड़ान भरने से बचें, क्योंकि सऊदी के नागरिक हवाई अड्डे उनके निशाने पर आ सकते हैं।
इस बड़े हमले के तुरंत बाद सऊदी सेना ने आक्रामक रुख अपनाते हुए हूती के कब्जे वाले कई शहरों में जोरदार बमबारी की। दूसरी तरफ, मक्का शांति समझौते में शामिल रहे पाकिस्तान ने भी नागरिक प्रतिष्ठानों और तेल क्षेत्रों पर हुए इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। हालांकि, क्षेत्र में नागरिक विमानन सेवाओं पर मंडरा रहा खतरा अभी टला नहीं है।
वॉशिंगटन के सख्त रुख के पीछे की असल वजह
इससे पहले भी रियाद पर 4 बड़े हमले हो चुके थे और सऊदी क्राउन प्रिंस की लगातार गुहारों के बावजूद अमेरिकी प्रशासन ने प्रत्यक्ष तौर पर कोई बड़ा कदम नहीं उठाया था। हालिया झड़पों में हूती लड़ाकों ने करीब 4 करोड़ डॉलर मूल्य के आधुनिक अमेरिकी सैन्य साजो-सामान पर भी कब्जा जमा लिया था। इन हथियारों में बारूदी सुरंगों और बमों को झेलने वाले ओशकोश जैसे माइन रेजिस्टेंस वाहन, अमेरिकी जमीनी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हल्के बख्तरबंद हम्वी वाहन, भारी टैंक और लंबी दूरी तक मार करने वाली मोबाइल आर्टिलरी तोपें शामिल थीं।
इतने आधुनिक हथियारों के छिन जाने पर भी जो वॉशिंगटन शांत बैठा था, वह अब एक अमेरिकी नागरिक की मौत होते ही आक्रामक हो उठा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने सऊदी नेतृत्व से बातचीत कर हूती विद्रोहियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अपनी सीमा न लांघें, अन्यथा उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। ट्रंप ने भी हूती गुट को सीधी चेतावनी जारी करते हुए सैन्य विकल्प खुले होने का संकेत दिया है।
ब्रिटेन के एयरबेस से बी-52 बॉम्बर रवाना, बड़े टकराव की आशंका
सऊदी अरब पर हूती हमलों के तार सीधे तौर पर क्षेत्रीय भू-राजनीति से जुड़े हैं। अमेरिकी आर्थिक नाकेबंदी के कारण ईरान अपने कच्चे तेल का निर्यात सामान्य रूप से नहीं कर पा रहा है और समुद्र में उसके जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है। इसी दबाव का मुकाबला करने और बातचीत में बढ़त बनाने के लिए सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है।
तनाव को और बढ़ाते हुए ब्रिटेन स्थित आरएएस फेयरफोर्ड एयरबेस से 3 बी-52 रणनीतिक बमवर्षक विमान मिडिल ईस्ट की दिशा में रवाना किए गए हैं। तीन भारी बॉम्बर्स की इस नई तैनाती के बाद इस बात की आशंका गहरी हो गई है कि अमेरिका और इजरायल मिलकर आने वाले दिनों में हूती ठिकानों अथवा ईरान की युद्धक मशीनरी के खिलाफ किसी बड़े संयुक्त सैन्य अभियान को अंजाम दे सकते हैं।


















