अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों पर भारी दबाव देखा जा रहा है, जिसके चलते हाजिर सोना और चांदी दोनों ही अपने दो महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गए हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड में रिकॉर्ड उछाल ने गैर-ब्याज वाली संपत्तियों की चमक फीकी कर दी है। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अक्टूबर 2026 की अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में एक जटिल आर्थिक परिदृश्य का सामना कर रहा है, जहां उसे ब्याज दरों में बढ़ोतरी या यथास्थिति बनाए रखने के बीच बड़ा निर्णय लेना है।
वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में नरमी
वैश्विक बाजार में हाजिर सोना फिसलकर 4,150 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है। सोने के साथ-साथ चांदी में भी बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे हाजिर चांदी लुढ़ककर 61 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई है। सोने और चांदी जैसी गैर-उपज परिसंपत्तियों पर डॉलर की मजबूती का सीधा असर पड़ा है। अमेरिकी डॉलर वर्तमान में अप्रैल 2025 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा अमेरिका के 10-वर्षीय और 30-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 24 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे वित्तीय जोखिम और मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक के समक्ष नीतिगत दर को लेकर कड़ा विकल्प
घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर 2026 की नीतिगत बैठक में एक कठिन परिस्थिति में है। चुनौतीपूर्ण व्यापक आर्थिक माहौल, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और चढ़ती ट्रेजरी यील्ड केंद्रीय बैंक के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। नीतिगत ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करने या वर्तमान दरों को जस का तस रखने का निर्णय वित्तीय बाजारों पर व्यापक प्रभाव डालेगा। इस फैसले का सीधा असर आम लोगों की बचत, बैंक से लिए जाने वाले कर्ज की लागत और देश में महंगाई की स्थिति पर पड़ेगा। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख का अनुसरण करते हुए रेपो दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर सकता है।
अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और फेडरल रिजर्व की संभावित दिशा
आईएसएम के ताजा आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि पिछले महीने अमेरिकी सेवा क्षेत्र में लागत का दबाव चार साल से अधिक समय में सबसे तेज गति से बढ़ा है। दूसरी ओर, उम्मीद से कमजोर आए अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद वित्तीय बाजार लगभग 78 प्रतिशत संभावना जता रहे हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस महीने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और उन्हें स्थिर रखेगा। ब्याज दरों को लेकर बने इस मिले-जुले माहौल ने वित्तीय परिसंपत्तियों की दिशा को प्रभावित किया है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिली कुछ राहत
कमोडिटी बाजार के दूसरे हिस्से में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। मध्य पूर्व से आपूर्ति बढ़ने के संकेतों के कारण कच्चे तेल के भाव गिरे हैं। तेल की कीमतों में आई इस नरमी से मुद्रास्फीति और आगे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंकाओं में कुछ कमी आई है। हालांकि, बॉन्ड यील्ड और डॉलर के ऊंचे स्तर बने रहने तक कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

















