त्योहारी सीजन में सोने और चांदी के दामों में नरमी, जानें प्रमुख महानगरों के ताजा रेटदवा दुकान का बिजनेस शुरू करने की पूरी गाइड, जानें शुरुआती लागत और लाइसेंस प्रक्रियाकैलेंडर पर तय होने लगी अंतरंगता तो रिश्ते में घुटन बन गई शारीरिक नजदीकीडॉलर में सुस्ती के बीच वैश्विक बाजारों की नजर चीन की जीडीपी और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर टिकीघरेलू गैस सिलेंडर के दामों में राहत बरकरार, महानगरों में जानिए 16 अक्टूबर के ताजा एलपीजी रेटहवा में उछलने वाली टेस्ला रोडस्टर का हुआ प्रदर्शन, लेकिन सड़कों पर उतरने के लिए 2028 तक करना होगा इंतजारबिहार के एनएच 80 पर टोल टैक्स महंगा, बालगुदर टोल प्लाजा पर इस साल तीसरी बार बढ़ी दरेंअमेरिकी डॉलर की मजबूती और ऑस्ट्रेलिया के कमजोर रोजगार आंकड़ों से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में उतार-चढ़ाववर्ष 2047 तक विकसित देश बनने का लक्ष्य, भारत को हर साल चाहिए 8 से 9 फीसदी की रफ्तारउत्तराखंड की लोक परंपरा में रचा-बसा हुड़का, जानिए क्यों माना जाता है यह भगवान शिव का प्रिय वाद्य
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ऑस्ट्रेलिया के कमजोर रोजगार आंकड़ों से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में उतार-चढ़ावबाज़ार
17 अक्तू॰ 2026, 1:24 am (1 घंटे पहले)· 1

अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ऑस्ट्रेलिया के कमजोर रोजगार आंकड़ों से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में उतार-चढ़ाव

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सुधार और ऑस्ट्रेलिया में रोजगार घटने से करेंसी बाजार में हलचल तेज हो गई है, जिससे वैश्विक संपत्तियों की चाल प्रभावित हुई है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की हालिया बढ़त पर अचानक ब्रेक लग गया है, क्योंकि अमेरिकी डॉलर ने निचले स्तरों से संभलकर अपनी स्थिति मजबूत की है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महंगाई के ऊंचे स्तर बने रहने के कारण निवेशक इस बात को लेकर सतर्क हैं कि फेडरल रिजर्व चालू वर्ष के समाप्त होने से पहले उधारी लागत में एक और बढ़ोतरी कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया के घरेलू मोर्चे पर रोजगार के ताजा आंकड़ों ने बाजार विश्लेषकों को चौंका दिया है। वहां नौकरियों में दर्ज की गई अप्रत्याशित गिरावट के कारण रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत दरों को और सख्त किए जाने की संभावनाओं पर पानी फिरता नजर आ रहा है। इन दोनों बड़े आर्थिक घटनाक्रमों ने मिलकर मुद्रा विनिमय दरों को व्यापक रूप से प्रभावित किया है।

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड की स्थिति

अमेरिकी मुद्रा की व्यापक ताकत को दर्शाने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स, जो दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य को मापता है, 101.90 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। इससे ठीक पहले यह दो सप्ताह के सबसे निचले स्तर 101.58 तक फिसल गया था। डॉलर इंडेक्स में इस निचले स्तर से आया तकनीकी सुधार यह संकेत देता है कि वैश्विक निवेशक डॉलर में बिकवाली को लेकर अत्यधिक आक्रामक होने से बच रहे हैं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती और लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति निवेशकों को डॉलर के पक्ष में खड़े रहने का आधार प्रदान कर रही है।

ये भी पढ़ें

मुद्रा बाजार के साथ-साथ अमेरिकी ऋण बाजार में भी हलचल तेज रही है। बेंचमार्क 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड सुधरकर 5.11 प्रतिशत की ओर बढ़ गई है, जो गुरुवार को तीन सप्ताह के निचले स्तर 5.04 प्रतिशत के पास पहुंच गई थी। सरकारी बॉन्ड यील्ड में यह तेजी आमतौर पर निवेशकों द्वारा भविष्य में ब्याज दरों के उच्च स्तर पर बने रहने के अनुमान को दर्शाती है। जब सरकारी प्रतिभूतियों पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय पूंजी अमेरिकी वित्तीय संपत्तियों की ओर तेजी से आकर्षित होती है, जिससे अमेरिकी डॉलर को प्रत्यक्ष रूप से समर्थन मिलता है।

फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति और दर वृद्धि की संभावनाएं

आर्थिक संकेतकों के मजबूत रहने के बावजूद ब्याज दर वायदा बाजार में कारोबार करने वाले प्रतिभागियों का मानना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक अपनी 27-28 अक्टूबर की आगामी बैठक के दौरान ब्याज दरों में किसी प्रकार का बदलाव नहीं करेगा और नीतिगत दरों को स्थिर रखेगा। बाजार की अधिकांश उम्मीदें अब दिसंबर की बैठक पर केंद्रित हो गई हैं। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की लगभग 90 प्रतिशत संभावना जताई जा रही है। इसका अर्थ यह है कि निवेशक साल के अंत तक मौद्रिक सख्ती के एक और दौर के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं।

एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान मुद्रा बाजार में फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष वॉर्श की टिप्पणियों ने भी ध्यान खींचा। वॉर्श ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे मूल्य स्थिरता स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, हालांकि उन्होंने भविष्य में ब्याज दरों के मार्ग को लेकर कोई ठोस या सीधा संकेत नहीं दिया। भविष्य की मौद्रिक सख्ती पर उनकी इस गैर-प्रतिबद्धता वाली टिप्पणी ने अमेरिकी डॉलर पर कुछ समय के लिए बिकवाली का दबाव बनाया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी को एशियाई सत्र में सुधरकर 0.6950 के स्तर तक चढ़ने का मौका मिला।

ऑस्ट्रेलिया के कमजोर श्रम बाजार आंकड़े और रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की रणनीति

ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा के लिए घरेलू आर्थिक आंकड़े किसी झटके से कम साबित नहीं हुए। गुरुवार को जारी हुए श्रम बाजार के आंकड़ों ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी किए जाने के सट्टों को पूरी तरह धीमा कर दिया। विश्लेषकों को उम्मीद थी कि सितंबर के महीने में ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में 20 हजार नए रोजगार जुड़ेंगे, लेकिन वास्तविक आंकड़ों में रोजगार संख्या में 39.3 हजार की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के साथ ऑस्ट्रेलिया में बेरोजगारी दर 4.7 प्रतिशत पर पहुंच गई।

रोजगार बाजार में इस अप्रत्याशित सुस्ती ने नीति निर्माताओं के सामने एक गंभीर दुविधा खड़ी कर दी है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया देश की मौद्रिक नीति का प्रबंधन करता है और आधिकारिक नकद दर तय करता है। ब्याज दरों से जुड़े निर्णय गवर्नर बोर्ड द्वारा एक वर्ष में आयोजित होने वाली 11 नियमित बैठकों में लिए जाते हैं, और यदि गंभीर आर्थिक स्थिति उत्पन्न हो तो आपातकालीन बैठकें भी बुलाई जा सकती हैं। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया का प्राथमिक अधिदेश मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका व्यावहारिक अर्थ 2 से 3 प्रतिशत की सीमा में मुद्रास्फीति दर को नियंत्रित रखना है। इसके साथ ही बैंक का दायित्व राष्ट्रीय मुद्रा की स्थिरता, पूर्ण रोजगार का सृजन, तथा ऑस्ट्रेलियाई जनता की आर्थिक समृद्धि और कल्याण में योगदान देना भी है।

मुद्रास्फीति, ब्याज दरें और पूंजी प्रवाह का सीधा संबंध

पारंपरिक आर्थिक सिद्धांतों के अनुसार मुद्रास्फीति को किसी भी मुद्रा के लिए नकारात्मक कारक माना जाता था, क्योंकि महंगाई मुद्रा की आंतरिक क्रय शक्ति को कम कर देती है। हालांकि, आधुनिक वित्तीय व्यवस्था में सीमाओं के पार पूंजी आवाजाही पर लगे प्रतिबंधों के हटने के बाद यह समीकरण पूरी तरह बदल चुका है। आधुनिक दौर में जब किसी देश में मुद्रास्फीति मध्यम रूप से अधिक होती है, तो वहां का केंद्रीय बैंक कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। उच्च ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करती हैं, जो अपने धन पर अधिक रिटर्न की तलाश में रहते हैं। इस विदेशी पूंजी के अंतर्वाह से स्थानीय मुद्रा की मांग बढ़ जाती है, जिसके परिणामस्वरूप ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी मुद्राओं को मजबूती मिलती है।

मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा किसी भी देश की आर्थिक सेहत का प्राथमिक पैमाना होता है और यह मुद्रा के मूल्य पर सीधा असर डालता है। वैश्विक निवेशक अपनी पूंजी को ऐसे देशों में लगाना पसंद करते हैं जो आर्थिक रूप से सुरक्षित हों और जहां विकास की गति तेज हो, न कि उन देशों में जो मंदी या संकुचन के दौर से गुजर रहे हों। जब सकल घरेलू उत्पाद, विनिर्माण और सेवा पीएमआई, रोजगार के आंकड़े, और उपभोक्ता धारणा सर्वेक्षण बेहतर आते हैं, तो अर्थव्यवस्था मजबूत मानी जाती है। एक मजबूत अर्थव्यवस्था केंद्रीय बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सीधा सहारा मिलता है। इसके विपरीत, रोजगार में गिरावट जैसे कमजोर आंकड़े दर वृद्धि की रफ्तार को रोकते हैं, जिससे मुद्रा पर दबाव बढ़ता है।

क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का प्रभाव

रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया मौद्रिक प्रबंधन के लिए पारंपरिक ब्याज दरों के अलावा अपरंपरागत उपकरणों का भी उपयोग करता है। इनमें क्वांटिटेटिव ईजिंग एक ऐसा उपकरण है जिसे अत्यधिक विषम परिस्थितियों में तब लागू किया जाता है जब केवल ब्याज दरों में कटौती करने से अर्थव्यवस्था में ऋण का प्रवाह बहाल नहीं हो पाता। क्वांटिटेटिव ईजिंग की प्रक्रिया में केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थानों से सरकारी या कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदने के लिए ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का निर्माण करता है, जिससे बैंकिंग प्रणाली में आवश्यक नकदी पहुंचाई जाती है। प्रणाली में मुद्रा की आपूर्ति बढ़ने के कारण क्वांटिटेटिव ईजिंग का सामान्य परिणाम ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की कमजोरी के रूप में सामने आता है।

क्वांटिटेटिव टाइटनिंग इसके बिल्कुल उलट प्रक्रिया है। इसे क्वांटिटेटिव ईजिंग के बाद उस समय शुरू किया जाता है जब आर्थिक सुधार गति पकड़ लेता है और मुद्रास्फीति बढ़ने लगती है। क्वांटिटेटिव ईजिंग में जहां केंद्रीय बैंक प्रतिभूतियों की खरीद करता है, वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया नई संपत्तियों की खरीद पूरी तरह बंद कर देता है। इसके साथ ही, अपने पास मौजूद बॉन्ड के परिपक्व होने पर मिलने वाले मूलधन का पुनर्निवेश करना भी रोक दिया जाता है। प्रणाली से अतिरिक्त नकदी वापस खींचने की यह प्रक्रिया ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए सकारात्मक और तेजी लाने वाली मानी जाती है।

अन्य वैश्विक संपत्तियों और मुद्राओं पर असर

अमेरिकी डॉलर के उतार-चढ़ाव और मौद्रिक नीति की अनिश्चितता का असर केवल ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा तक सीमित नहीं रहा है। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर पर भी ताजा बिकवाली का दबाव देखा गया। अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान 158.00 का अहम स्तर गंवा बैठी। फेडरल रिजर्व प्रमुख द्वारा ब्याज दरों की भावी दिशा पर कोई स्पष्ट वादा न किए जाने से डॉलर में जो नरमी आई, उसने इस मुद्रा जोड़ी को नीचे की ओर धकेल दिया।

कमोडिटी बाजार में सोने के भाव में भी भारी उठापटक दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना शुक्रवार को 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के प्रमुख स्तर के नीचे कभी लाभ तो कभी नुकसान के बीच झूलता रहा। अमेरिकी डॉलर में आई मामूली गिरावट और ट्रेजरी यील्ड में आई हल्की रिकवरी के चलते पीली धातु की कीमतों में किसी एक दिशा में मजबूत रुझान देखने को नहीं मिला।

डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में भी सतर्कता का माहौल बना रहा। अक्टूबर के महीने में क्रिप्टोकरेंसी बाजार लगातार दबाव में देखा गया है। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन इस सप्ताह की शुरुआत में 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गई थी, जिसके बाद शुक्रवार को यह संभलकर लगभग 82,000 डॉलर के आसपास पहुंची। व्यापक आर्थिक प्रतिकूलताओं, ब्याज दरों के ऊंचे स्तर और मांग में आई नरमी ने पूरे क्रिप्टो बाजार पर अपना भारी असर बनाए रखा है।

सवाल-जवाब

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स का ताजा स्तर क्या रहा है?
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 101.90 के करीब कारोबार कर रहा है, जो अपने दो सप्ताह के निचले स्तर 101.58 से सुधरा है।
ऑस्ट्रेलिया में सितंबर माह के रोजगार आंकड़े कैसे रहे?
सितंबर में ऑस्ट्रेलियाई रोजगार में 39.3 हजार की गिरावट आई, जबकि 20 हजार नौकरियों की वृद्धि का अनुमान था, और बेरोजगारी दर 4.7 प्रतिशत दर्ज की गई।
फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों को लेकर बाजार की क्या उम्मीदें हैं?
बाजार 27-28 अक्टूबर की बैठक में ठहराव की उम्मीद कर रहा है, जबकि सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार दिसंबर में दर वृद्धि की लगभग 90 प्रतिशत संभावना है।
10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में क्या बदलाव देखा गया?
10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड गुरुवार के 5.04 प्रतिशत के निचले स्तर से उबरकर 5.11 प्रतिशत की ओर बढ़ गई।
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया का मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है?
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया का मुख्य वैधानिक लक्ष्य वार्षिक मुद्रास्फीति को 2 से 3 प्रतिशत की सीमा में बनाए रखना है।
सोने और बिटकॉइन की कीमतों का क्या रुझान रहा?
सोने की कीमत 4,200 डॉलर प्रति औंस के नीचे सीमित दायरे में रही, जबकि बिटकॉइन 80,000 डॉलर से नीचे गिरने के बाद 82,000 डॉलर के पास सुधरा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp