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10 फीट की दुकान में पढ़ाई करने को मजबूर रामपुरा के बच्चे, जर्जर इमारत ढहने के बाद नए स्कूल भवन का इंतजारराजस्थान
2 सित॰ 2026, 12:37 pm (23 दिन पहले)· 0

10 फीट की दुकान में पढ़ाई करने को मजबूर रामपुरा के बच्चे, जर्जर इमारत ढहने के बाद नए स्कूल भवन का इंतजार

जयपुर के रामपुरा गांव में जर्जर इमारत ढहाए जाने के बाद सरकारी स्कूल 10 फीट की परचून की दुकान में चल रहा है। जगह न होने से बच्चे जमीन पर बैठने और खुले आंगन में खाना खाने को मजबूर हैं।

जयपुर के पास स्थित रामपुरा गांव में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहां एक राजकीय विद्यालय भवन की कमी के कारण महज 10 फीट की एक परचून की दुकान में चलने को मजबूर है। इससे पहले भी पक्के परिसर के अभाव में इस स्कूल का संचालन एक तबेले में किया जा रहा था। पुरानी इमारत के असुरक्षित और जर्जर होने के कारण इसे अस्थाई रूप से इस तंग दुकान में स्थानांतरित किया गया है। इस बेहद छोटी जगह में छोटे-छोटे बच्चे जमीन पर ठंस-ठंस कर बैठने और अपनी दैनिक पढ़ाई पूरी करने को विवश हैं।

स्थान की भारी किल्लत और प्रशासनिक दिक्कतें

10 फीट की छोटी सी दुकान में स्कूल चलाने से शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के सामने रोजमर्रा के कामकाज में भारी परेशानियां खड़ी हो रही हैं। दुकान के भीतर स्थान की अत्यधिक कमी के कारण स्कूल प्रशासन केवल अति आवश्यक शिक्षण सामग्री और उपस्थिति रजिस्टर ही वहां रख पाता है। इसके अलावा खेलकूद का सामान, अन्य जरूरी दस्तावेज, पुराने रजिस्टर और अतिरिक्त उपकरण दुकान में नहीं आ सकते। यह सारा महत्वपूर्ण सामान आज भी तबेले वाले कमरे में ही ताले में बंद पड़ा हुआ है, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों के संचालन में बाधा आ रही है।

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दोपहर के भोजन में चुनौती और खुले प्रांगण में बैठने की विवशता

स्थान की इस विकट समस्या का असर बच्चों के दोपहर के भोजन यानी मिड-डे मील की व्यवस्था पर भी साफ देखा जा सकता है। दुकान के भीतर इतनी जगह ही नहीं है कि बच्चे एक साथ बैठकर खाना खा सकें। इस कारण छात्र-छात्राओं को भोजन करने के लिए बाहर निकलकर दुकान मालिक या मकान मालिक के खुले आंगन में जमीन पर बैठना पड़ता है। खुले में बैठकर भोजन करने से बच्चों को मौसम की मार और असुविधा का सामना करना पड़ता है, जिससे स्कूल प्रशासन के लिए भी रोज दोपहर में व्यवस्था संभालना कठिन हो जाता है।

खतरनाक इमारत को किया गया ध्वस्त, नई इमारत की जगी उम्मीद

इस संकटपूर्ण स्थिति के बीच राहत की खबर यह है कि प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लेते हुए स्कूल की पुरानी और अत्यंत जर्जर हो चुकी इमारत को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया है। यह इमारत इतनी खतरनाक हो चुकी थी कि वहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था। पुरानी संरचना को ढहाए जाने के बाद अब रामपुरा गांव में एक नए और आधुनिक स्कूल भवन के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार आगामी कुछ महीनों के भीतर नई इमारत का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा, जिससे बच्चों को इस परेशानी से मुक्ति मिल जाएगी।

ग्रामीणों और अभिभावकों ने की वैकल्पिक व्यवस्था की मांग

भले ही नए भवन के निर्माण की उम्मीद जगी है, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में वर्तमान स्थिति को लेकर गहरी चिंता है। ग्रामीणों का कहना है कि नई इमारत बनकर तैयार होने में कम से कम कुछ महीनों का समय लगेगा। तब तक नन्हें-मुन्ने बच्चों को 10 फीट की तंग दुकान में बिठाकर पढ़ाना उचित नहीं है। अभिभावकों ने मांग उठाई है कि जब तक पक्का भवन नहीं बन जाता, तब तक बच्चों के बैठने और पढ़ाई के लिए किसी सुरक्षित और बड़े वैकल्पिक स्थान का तुरंत प्रबंध किया जाए ताकि उनकी शिक्षा प्रभावित न हो।

सवाल-जवाब

यह सरकारी स्कूल कहां स्थित है?
यह स्कूल राजधानी जयपुर के पास स्थित रामपुरा गांव में संचालित है।
स्कूल को 10 फीट की परचून की दुकान में क्यों शिफ्ट किया गया?
स्कूल की पुरानी इमारत अत्यंत जर्जर और खतरनाक हो गई थी, जिसे ध्वस्त करने के कारण कक्षाएं अस्थाई तौर पर दुकान में चल रही हैं।
परचून की दुकान में आने से पहले यह स्कूल कहां चलता था?
दुकान में आने से पहले भवन के अभाव में यह स्कूल एक तबेले में संचालित हो रहा था।
दुकान में बच्चों को मिड-डे मील कैसे परोसा जा रहा है?
दुकान के भीतर जगह न होने के कारण बच्चों को मकान या दुकान मालिक के खुले आंगन में बैठकर भोजन करना पड़ता है।
नई स्कूल इमारत कब तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है?
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार आगामी कुछ महीनों में नए भवन का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।
स्कूल को लेकर स्थानीय ग्रामीणों की क्या मांग है?
ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि नया भवन बनने तक बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई सुरक्षित और उपयुक्त वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
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