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अजमेर के इस 250 साल पुराने मंदिर में भादवा में उमड़ती है रामदेवरा जैसी भीड़राजस्थान
6 सित॰ 2026, 7:22 am (19 दिन पहले)· 3

अजमेर के इस 250 साल पुराने मंदिर में भादवा में उमड़ती है रामदेवरा जैसी भीड़

अजमेर में पुष्कर रोड पर बना 250 साल पुराना पांच गांव के धूणी वाले रामदेव जी मंदिर भादवा महीने में जागरण और भजन संध्या के लिए मशहूर है, जो रामदेवरा नहीं जा पाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ा विकल्प बन गया है।

राजस्थान में भादवा का महीना शुरू होते ही लोकदेवता बाबा रामदेव जी की भक्ति का माहौल पूरे प्रदेश में दिखने लगता है। हर साल लाखों श्रद्धालु जैसलमेर के रामदेवरा धाम पहुंचकर बाबा के दर्शन करते हैं, लेकिन जो लोग किसी वजह से इतनी दूर नहीं जा पाते, उनके लिए अजमेर में ही एक ऐसा मंदिर है जहां वैसी ही आस्था और भक्ति देखने को मिलती है।

250 साल पुराना है यह मंदिर

अजमेर से पुष्कर जाने वाले रास्ते पर स्थित यह रामदेव मंदिर करीब 250 साल पुराना बताया जाता है। इसे पांच गांव के धूणी वाले रामदेव जी के नाम से जाना जाता है। सालों से यह मंदिर सिर्फ अजमेर शहर के लिए नहीं बल्कि आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के लिए भी धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है।

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भादवा में जागरण और भजन संध्या

मंदिर के पुजारी के मुताबिक भादवा महीने में यहां कई तरह के आयोजन होते हैं। इस दौरान मंदिर में विशाल जागरण और भजन संध्या रखी जाती है, जिसमें राजस्थान के साथ-साथ दूसरी जगहों से भी हजारों श्रद्धालु शामिल होने पहुंचते हैं। इस मौके पर पूरा मंदिर परिसर भक्ति संगीत, जलते दीयों की रोशनी और जयकारों से पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। बाबा की दूज के दिन कई अलग-अलग जगहों से मंदिर में झंडा चढ़ाने के लिए लोग आते हैं।

एक ही परिसर में कई देवी-देवताओं के दर्शन

पुजारी बताते हैं कि इस मंदिर परिसर में बाबा रामदेव जी के अलावा भगवान खाटू श्याम जी, राधा-कृष्ण और राम दरबार की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। इसके साथ ही यहां छह फीट ऊंची दक्षिणमुखी हनुमान जी की भव्य प्रतिमा भी है। एक ही जगह पर इतने देवी-देवताओं के दर्शन से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और गहरी धार्मिक अनुभूति मिलती है।

कैसे पहुंचें मंदिर तक

यह मंदिर अजमेर रेलवे स्टेशन से करीब 7 किलोमीटर दूर पुष्कर रोड पर स्थित है। यहां तक बस, टेंपो, ऑटो और ई-रिक्शा के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है। अगर आप अजमेर की धार्मिक यात्रा पर जा रहे हैं तो इस मंदिर के दर्शन जरूर करें। प्राचीन आस्था, शांत वातावरण और भव्य मंदिर परिसर इसे श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी खास आकर्षण बनाते हैं।

सवाल-जवाब

यह मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर अजमेर में पुष्कर रोड पर, अजमेर रेलवे स्टेशन से करीब 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
इस मंदिर को किस नाम से जाना जाता है?
इसे पांच गांव के धूणी वाले रामदेव जी के नाम से जाना जाता है।
यह मंदिर कितना पुराना है?
यह मंदिर करीब 250 साल पुराना बताया जाता है।
भादवा महीने में यहां क्या खास आयोजन होता है?
भादवा में यहां विशाल जागरण और भजन संध्या का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
मंदिर परिसर में और किन देवी-देवताओं के दर्शन होते हैं?
यहां भगवान खाटू श्याम जी, राधा-कृष्ण, राम दरबार और छह फीट ऊंची दक्षिणमुखी हनुमान जी की प्रतिमा के भी दर्शन होते हैं।
मंदिर तक कैसे पहुंचा जा सकता है?
यहां तक बस, टेंपो, ऑटो और ई-रिक्शा के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है।
बाबा की दूज पर मंदिर में क्या होता है?
बाबा की दूज पर अलग-अलग जगहों से लोग मंदिर में झंडा चढ़ाने आते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·18 दिन पहले

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि कैसे पारंपरिक आस्थाएं स्थानीय स्तर पर छोटे बाजारों और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देती हैं। भादवा महीने में उमड़ने वाली भीड़ अजमेर और पुष्कर के बीच के इस क्षेत्र में परिवहन, खानपान और पूजन सामग्री के सूक्ष्म उद्योगों के लिए आर्थिक गतिविधियों को गति देती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी संबल मिलता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·18 दिन पहले

रविकेश जी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह ध्यान देने योग्य है कि अजमेर और पुष्कर के मध्य स्थित यह धार्मिक केंद्र क्षेत्रीय आर्थिकी को गति देने का एक प्रभावी मॉडल है। जब भादवा माह में पारंपरिक आयोजनों पर हजारों श्रद्धालु जुटते हैं, तो यह न केवल सांस्कृतिक निरंतरता को मजबूत करता है, बल्कि परिवहन, सूक्ष्म व्यापार और स्थानीय पर्यटन सर्किट के विस्तार के जरिए विकेंद्रीकृत आजीविका के नए अवसर भी सृजित करता है। नीतिगत और शासन स्तर पर, ऐसे ऐतिहासिक आस्था केंद्रों के आसपास बुनियादी ढांचे का विकास ग्रामीण और अर्ध-शहरी अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान कर सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

भादवा महीने में उमड़ने वाली इस भारी भीड़ के मद्देनजर सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जिला प्रशासन और पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती रहता है। पुष्कर रोड पर यातायात प्रबंधन, श्रद्धालुओं की अनियंत्रित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग और आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं की पुख्ता व्यवस्था करना इस दौरान सबसे अहम होता है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

अजमेर के इस ऐतिहासिक मंदिर में उमड़ने वाली भारी भीड़ सिर्फ आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता प्रशासनिक इंतजामों की मांग करती है। पुष्कर रोड पर इस दौरान बढ़ने वाले दबाव को देखते हुए जिला प्रशासन को ट्रैफिक डायवर्जन, पार्किंग और सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त करने चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को असुविधा न हो और कानून-व्यवस्था सुचारू बनी रहे।

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