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अरुणाचल के याजाली में पानी का कहर, पुल बहा और दर्जनों मकान जमींदोज, असम में बाढ़ का खतरा मंडरायाभारत
24 जून 2026, 3:21 pm (46 दिन पहले)· 3

अरुणाचल के याजाली में पानी का कहर, पुल बहा और दर्जनों मकान जमींदोज, असम में बाढ़ का खतरा मंडराया

अरुणाचल प्रदेश के कीई पन्योर जिले में बुधवार सुबह तेज बारिश के बाद आई फ्लैश फ्लड ने कई मकान और एक पुल बहा दिए, तीन लोग लापता हैं। अब असम के निचले इलाकों में भी बाढ़ का अलर्ट जारी कर दिया गया है।

पहाड़ों से उतरते पानी ने अरुणाचल प्रदेश के कीई पन्योर जिले में बुधवार सुबह जो तबाही मचाई, उसकी तस्वीरें डरा देने वाली हैं। याजाली इलाके में हुई मूसलाधार बारिश के बाद अचानक आई फ्लैश फ्लड ने पल भर में बस्तियों को पानी और मलबे की चपेट में ले लिया। पोजा स्थित NEEPCO कॉलोनी और उसके आसपास के इलाकों में कई घर ढह गए, वहीं मुख्य राजमार्ग पर बना पुल भी तेज बहाव में बहकर गायब हो गया।

शुरुआती जानकारी बताती है कि इस आपदा में तीन लोग लापता हैं और करीब 20 मकान पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। सबसे ज्यादा चोट NEEPCO के क्वार्टरों को लगी है, जहां तकरीबन 20 क्वार्टर मलबे में बदल गए।

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बारिश के तीन घंटों ने बदल दी तस्वीर

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक लोअर सुबनसिरी के याजाली स्टेशन पर बीते 24 घंटों में 72.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग का कहना है कि बुधवार सुबह 6 बजे से 9 बजे के बीच जमकर पानी बरसा, लेकिन असली कहर 6 बजे से 7:30 बजे के बीच टूटा। इन्हीं डेढ़ घंटों की अति तीव्र बारिश ने ऊपरी कैचमेंट इलाकों में जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा दिया कि नीचे बसे इलाकों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

इसी बढ़े हुए बहाव के चलते पन्योर लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के आसपास फ्लैश फ्लड जैसे हालात बन गए। यह वही प्रोजेक्ट है जिसे पहले रंगानदी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के नाम से जाना जाता था। अचानक उमड़ते पानी को संभालने के लिए प्रोजेक्ट प्रबंधन को एक स्पिलवे गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ना पड़ा। याजाली और आसपास से आ रही जानकारी के अनुसार बाढ़ के साथ मलबे का तेज सैलाब भी बहकर आया, जिसने घरों, सड़कों और बाकी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया।

अब असम पर मंडराया खतरा

अरुणाचल में बने इन हालात की आंच अब असम के निचले इलाकों तक पहुंचने की आशंका है। असम सरकार ने साफ कहा है कि लोअर सुबनसिरी और ऊपरी कैचमेंट में हुई भारी बारिश के चलते ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से चढ़ सकता है। इसका सबसे पहला असर धेमाजी, लखीमपुर, बिस्वनाथ और सोनितपुर जिलों में दिखाई दे सकता है। इसके बाद बाढ़ की लहर अगले एक से दो दिनों में दूसरे जिलों से होती हुई धुबरी तक पहुंच सकती है।

हिमंता बिस्वा सरमा के निर्देश पर हाई अलर्ट

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के निर्देश पर असम सरकार ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को पूरी सतर्कता बरतने, नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और राहत व बचाव की तैयारी समय रहते पूरी रखने के निर्देश दिए हैं। SDRF, NDRF और दूसरी आपदा राहत एजेंसियों की टीमों को भी तैनाती के लिए तैयार रखा गया है। प्रशासन ने निचले और बाढ़ संभावित इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें, जरूरत पड़ने पर सुरक्षित जगहों पर चले जाएं और ब्रह्मपुत्र समेत दूसरी नदियों में छोटी नावों से सफर करने से बचें।

सवाल-जवाब

यह हादसा कहां और कब हुआ?
यह घटना अरुणाचल प्रदेश के कीई पन्योर जिले के याजाली इलाके में बुधवार सुबह हुई, जब तेज बारिश के बाद अचानक फ्लैश फ्लड आ गई।
इस आपदा में कितना नुकसान हुआ है?
शुरुआती जानकारी के मुताबिक तीन लोग लापता हैं और करीब 20 मकान तबाह हो गए, जिनमें NEEPCO के करीब 20 क्वार्टर शामिल हैं।
इलाके में कितनी बारिश दर्ज हुई?
लोअर सुबनसिरी के याजाली स्टेशन पर बीते 24 घंटों में 72.8 मिमी बारिश दर्ज की गई, और सबसे तेज वर्षा सुबह 6 से 7:30 बजे के बीच हुई।
स्पिलवे गेट क्यों खोलना पड़ा?
अचानक बढ़े जलप्रवाह को संभालने के लिए पन्योर लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के प्रबंधन को अतिरिक्त पानी छोड़ने के लिए एक स्पिलवे गेट खोलना पड़ा।
असम के कौन से जिले प्रभावित हो सकते हैं?
सबसे पहले धेमाजी, लखीमपुर, बिस्वनाथ और सोनितपुर जिलों पर असर पड़ सकता है, और एक से दो दिनों में बाढ़ की लहर धुबरी तक पहुंच सकती है।
असम सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के निर्देश पर हाई अलर्ट जारी किया गया है और SDRF, NDRF समेत आपदा राहत टीमों को तैनाती के लिए तैयार रखा गया है।
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