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अरुणाचल प्रदेश में कॉफी की खेती को बड़ा बढ़ावा देने की तैयारी, ईटानगर में पहली आधिकारिक कार्यशालाअरुणाचल प्रदेश
3 अक्तू॰ 2026, 4:31 pm (24 दिन पहले)· 0

अरुणाचल प्रदेश में कॉफी की खेती को बड़ा बढ़ावा देने की तैयारी, ईटानगर में पहली आधिकारिक कार्यशाला

अरुणाचल प्रदेश में कॉफी उत्पादन और संपूर्ण वैल्यू चेन स्थापित करने के लिए पहली आधिकारिक कार्यशाला आयोजित की गई। राज्य में अनुकूल जलवायु को देखते हुए 600 हेक्टेयर से आगे खेती का दायरा बढ़ाने की योजना है।

अरुणाचल प्रदेश में कृषि और ग्रामीण उद्यम को नई दिशा देने के उद्देश्य से कॉफी की खेती को बड़े पैमाने पर विस्तार देने की ठोस पहल शुरू की गई है। ईटानगर में शनिवार को राज्य स्तरीय पहली आधिकारिक कॉफी कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका मकसद स्थानीय उत्पादकों को एक मंच पर लाना और उत्पादन से लेकर बाजार तक की संपूर्ण वैल्यू चेन तैयार करना है। इस कार्यक्रम के जरिए पहाड़ी राज्य में मौजूद अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियों का लाभ उठाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

कॉफी बोर्ड और कृषि विभाग का संयुक्त प्रयास

यह महत्वपूर्ण कार्यशाला भारतीय कॉफी बोर्ड और अरुणाचल प्रदेश सरकार के कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। इस साझा पहल का मुख्य लक्ष्य राज्य में कॉफी को केवल एक पारंपरिक फसल के रूप में नहीं, बल्कि एक उभरते हुए कृषि आधारित उद्यम के रूप में स्थापित करना है। दोनों विभागों के विशेषज्ञ अब मिलकर ऐसी योजनाएं तैयार कर रहे हैं जिससे किसानों को वैज्ञानिक पद्धति, उन्नत रोपण सामग्री और आधुनिक तकनीकों की जानकारी मिल सके।

वर्तमान में 600 हेक्टेयर में खेती, विस्तार की भारी संभावनाएं

आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान समय में अरुणाचल प्रदेश में कॉफी की खेती लगभग 600 हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही है। हालांकि, राज्य की भौगोलिक स्थिति और अनुकूल जलवायु परिस्थितियां इसके उत्पादन को कई गुना बढ़ाने के भरपूर अवसर प्रदान करती हैं। पूर्वोत्तर का यह पहाड़ी क्षेत्र कॉफी के बेहतरीन स्वाद और गुणवत्ता के लिए पूरी तरह उपयुक्त माना जा रहा है, जिससे भविष्य में बड़े पैमाने पर उत्पादन की राह खुल सकती है।

राज्यभर के उत्पादक पहली बार साझा मंच पर

इस आधिकारिक कार्यशाला के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग जिलों और दूरदराज के इलाकों से आए कॉफी उत्पादकों को पहली बार एक साथ आने का मौका मिला। इस साझा मंच पर किसानों ने अपनी व्यावहारिक चुनौतियों, रोपण के अनुभवों और बाजार तक पहुंच से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों के साथ सीधे विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों ने किसानों को फसल की तुड़ाई, प्रोसेसिंग और बेहतर ग्रेडिंग के तौर-तरीकों से भी अवगत कराया।

पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर सरकार का जोर

पहल के संबंध में जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बताया कि प्रशासन का ध्यान केवल उपज बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक मजबूत आर्थिक तंत्र खड़ा करना है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि लक्ष्य केवल अधिक मात्रा में उत्पादन करना नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण वैल्यू चेन का निर्माण करना है ताकि उत्पादकों को सीधा आर्थिक लाभ मिले।

मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्यभर के किसानों का इस मंच पर जुटना राज्य की कृषि और उद्यमशीलता की यात्रा में एक नया अध्याय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय कॉफी बोर्ड और राज्य कृषि विभाग के समन्वित प्रयासों के जरिए इस क्षेत्र को एक संगठित और लाभदायक उद्योग का रूप दिया जाएगा।

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सवाल-जवाब

अरुणाचल प्रदेश में वर्तमान में कितने क्षेत्र में कॉफी की खेती हो रही है?
वर्तमान समय में अरुणाचल प्रदेश में लगभग 600 हेक्टेयर क्षेत्र में कॉफी की खेती की जा रही है।
ईटानगर में कॉफी कार्यशाला का आयोजन किन संस्थाओं द्वारा किया गया?
इस कार्यशाला का आयोजन भारतीय कॉफी बोर्ड और अरुणाचल प्रदेश सरकार के कृषि विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कॉफी क्षेत्र के विकास को लेकर क्या दृष्टिकोण रखा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ देने के लिए एक संपूर्ण वैल्यू चेन स्थापित करना है।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य राज्यभर के कॉफी उत्पादकों को एक आधिकारिक मंच पर लाना और खेती के विस्तार व मूल्य संवर्धन की संभावनाओं पर चर्चा करना था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·23 दिन पहले

पूर्वोत्तर में चाय के बाद अब कॉफी की यह पहल वाकई दिलचस्प है। अगर मौसम वाकई इतना अनुकूल है, तो क्या यहां दक्षिण भारत जैसी खास किस्म की कॉफी उगाई जा सकेगी? किसानों को इसके लिए अभी और कितना इंतजार करना होगा?

Ravikash Gupta@ravikash·23 दिन पहले

पिछली बार जब मैं पूर्वोत्तर गया था, एक स्थानीय किसान ने मुझे अपने खेत की ताज़ा कॉफी पिलाई थी। वहाँ की मिट्टी में वाकई गजब का स्वाद है, अगर सही बाज़ार मिल जाए तो किसानों की ज़िंदगी बदल जाएगी।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·23 दिन पहले

रविकेश भाई, बिल्कुल सही कहा आपने! अगर किसानों को सही प्लेटफॉर्म और मार्केट मिल जाए, तो पूर्वोत्तर की कॉफी सच में कमाल कर देगी।

Rohan Verma@rohan-verma·23 दिन पहले

सिर्फ छह सौ हेक्टेयर में कॉफी उग रही है अभी, सोच रहा था कि पहाड़ी इलाकों में इसका दायरा बढ़ने से किसानों की आय सचमुच सुधर सकती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·23 दिन पहले

रोहन भाई, नीति तो सही दिशा में है पर पूर्वोत्तर में ट्रांसपोर्ट और प्रोसेसिंग यूनिट्स न बैठें तो किसानों को फायदा मिलने में दिक्कत आ ही जाती है।

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