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अयोध्या दीपोत्सव: 28 लाख दीये और 35 हजार वालंटियर संभालेंगे मोर्चा, जानें ट्रैफिक और घाटों के खास इंतजामउत्तर प्रदेश
17 सित॰ 2026, 6:01 pm (41 दिन पहले)· 10

अयोध्या दीपोत्सव: 28 लाख दीये और 35 हजार वालंटियर संभालेंगे मोर्चा, जानें ट्रैफिक और घाटों के खास इंतजाम

अयोध्या में इस बार दीपोत्सव को बेहद भव्य बनाने की तैयारी चल रही है, जहां सरयू नदी के घाटों पर 28 लाख दीपक जलाए जाएंगे। इस विशाल आयोजन को सुचारू रूप से चलाने के लिए लगभग 35 हजार वालंटियरों की तैनाती की जा रही है।

राम नगरी अयोध्या में इस साल के दीपोत्सव को ऐतिहासिक और अत्यंत भव्य बनाने के लिए प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। भगवान राम की इस पावन नगरी में होने वाले इस आयोजन को और अधिक दिव्य तथा यादगार रूप देने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। दीपोत्सव के पावन अवसर पर सरयू नदी के सभी घाट लाखों दीपों की जगमगाती रोशनी से आलोकित नजर आएंगे और इस विशाल आयोजन को पूरी तरह सफल बनाने के वास्ते युद्ध स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।

28 लाख दीपों और 35 हजार वालंटियरों की तैयारी

इस बार के दीपोत्सव समारोह में लगभग 28 लाख दीपक प्रज्वलित किए जाने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इतने बड़े पैमाने पर दीपों को पूरी तरह से व्यवस्थित ढंग से सजाने और कार्यक्रम की तमाम व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संभालने के वास्ते करीब 35 हजार वालंटियरों को तैनात करने की पुख्ता तैयारी की जा रही है। प्रशासन की तरफ से दीपोत्सव के संबंध में विभिन्न स्तरों पर तैयारियां पहले ही शुरू कर दी गई हैं।

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घाटों पर सजावट और अनुशासन की जिम्मेदारी

सरयू के विभिन्न घाटों पर दीपों की कतारबद्ध सजावट से लेकर उन्हें तय समय पर प्रज्वलित कराने तक की संपूर्ण प्रक्रिया वालंटियरों और संबंधित विभागों के आपसी सहयोग से पूरी की जाएगी। घाटों पर दीयों की ऐसी लंबी कतारें तैयार की जाएंगी कि दीपों के जलते ही पूरी रामनगरी अलौकिक रोशनी में नहाई हुई दिखाई देगी। इतने बड़े आयोजन में लाखों दीयों को करीने से सजाना और एक साथ जलाना एक बड़ी चुनौती होता है, इसलिए इन 35 हजार वालंटियरों की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है।

वालंटियरों का कार्यभार और सुरक्षा व्यवस्था

इन सभी वालंटियरों को अलग-अलग घाटों और उनके लिए निर्धारित किए गए क्षेत्रों में विशेष जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। दीयों को करीने से लगाने, उनमें तेल और बाती डालने, समय पर दीप प्रज्ज्वलन सुनिश्चित करने और पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन व व्यवस्था बनाए रखने में इनकी सक्रिय भागीदारी रहेगी। जब सरयू के घाटों पर एक साथ लाखों दीये जगमगाएंगे, तो पूरा इलाका प्रकाश से भर जाएगा। दीपों की इस अद्भुत रोशनी के साथ-साथ भव्य सरयू आरती और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनेगा।

प्रशासनिक अधिकारियों के बयान और कार्य योजना

नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि दीपोत्सव को लेकर हमारी सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। घाटों की साफ-सफाई, दीपोत्सव के बाद दीयों को हटाने, उन्हें पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ विसर्जित करने या सुरक्षित एक स्थान पर संरक्षित रखने की तैयारी हम लोगों की तरफ से पूरी कर ली गई है। समय आने पर इन सभी योजनाओं को पूरी तरह से क्रियान्वित किया जाएगा। वर्तमान में जो भी आवश्यक कार्य बचे हुए हैं, उनके लिए टेंडर प्रक्रिया शीघ्र ही प्रारंभ की जाएगी और समय रहते सभी कार्य समय सीमा के भीतर पूरे करा लिए जाएंगे।

यातायात और सजावट के पुख्ता इंतजाम

नगर निगम अयोध्या द्वारा शहर के मुख्य चौराहों और प्रमुख स्थलों पर विशेष सजावट का कार्य कराया जाता है। दीपोत्सव के दौरान जो भी इंटेलिजेंट लाइटिंग लगाई जाती है, उसे पर्यटन विभाग के माध्यम से पूरा कराया जाता है और इस बार भी यह कार्य कराया जाएगा जिसकी प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है। हमें पूरी उम्मीद है कि जैसे ही पर्व का समय नजदीक आएगा, लोगों को इसका एक बेहद भव्य और नया रूप देखने को मिलेगा। दीपोत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, सुगम यातायात, घाटों की समुचित व्यवस्था, साफ-सफाई, निरंतर बिजली आपूर्ति, शुद्ध पेयजल और श्रद्धालुओं की अन्य सभी सुविधाओं के वास्ते भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रशासन और सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करके इन तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस बार का अयोध्या का दीपोत्सव केवल दीपों की रिकॉर्ड संख्या के कारण ही खास नहीं होगा, बल्कि 35 हजार वालंटियरों की व्यापक भागीदारी और 28 लाख दीपों की अनूठी रोशनी इसे वास्तव में ऐतिहासिक और भव्य रूप प्रदान करेगी।

सवाल-जवाब

इस बार अयोध्या दीपोत्सव में कितने दीपक जलाने का लक्ष्य रखा गया है?
इस बार दीपोत्सव के दौरान सरयू के घाटों पर करीब 28 लाख दीपक जलाने का लक्ष्य रखा गया है।
दीपोत्सव की व्यवस्था संभालने के लिए कितने वालंटियर तैनात किए जा रहे हैं?
कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने और दीपों की व्यवस्था संभालने के लिए करीब 35 हजार वालंटियरों की तैनाती की जा रही है।
दीपोत्सव के बाद इस्तेमाल किए गए दीपों का क्या किया जाएगा?
नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार के अनुसार दीपोत्सव के बाद दीपों को सम्मानपूर्वक विसर्जित करने या सुरक्षित एक स्थान पर रखने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
दीपोत्सव के दौरान इंटेलिजेंट लाइटिंग की जिम्मेदारी कौन सा विभाग संभालता है?
दीपोत्सव में लगने वाली इंटेलिजेंट लाइटिंग की व्यवस्था पर्यटन विभाग द्वारा कराई जाती है।
शहर की मुख्य सड़कों और चौराहों की सजावट कौन करता है?
नगर निगम अयोध्या द्वारा शहर के मुख्य चौराहों और प्रमुख स्थलों पर सजावट का कार्य कराया जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·40 दिन पहले

अयोध्या दीपोत्सव जैसे विशाल सांस्कृतिक आयोजनों में 35 हजार वालंटियरों का प्रबंधन और 28 लाख दीपों की सटीक गणना इस बात का प्रमाण है कि बड़े पैमाने पर लॉजिस्टिक्स और क्राउड मैनेजमेंट के लिए अब उन्नत डेटा मैपिंग और डिजिटल प्लानिंग की आवश्यकता कितनी बढ़ गई है। भविष्य में इस तरह के आयोजनों को अधिक सुचारू और पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग और स्मार्ट सॉफ़्टवेयर टूल्स का उपयोग एक नया मानक बन सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·40 दिन पहले

अयोध्या दीपोत्सव का यह भव्य आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके माध्यम से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बूस्ट मिलता है। 28 लाख दीयों के इस विशाल प्रबंधन, परिवहन और पर्यटन से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलती है, जो उत्तर भारत के सेवा और आतिथ्य क्षेत्र के लिए आर्थिक रूप से अत्यधिक लाभकारी है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·40 दिन पहले

रविकश गुप्ता के इस आकलन से यह स्पष्ट है कि अयोध्या दीपोत्सव जैसे वृहद सांस्कृतिक आयोजन अब महज़ धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह 'इवेंट इकोनॉमी' का एक मजबूत मॉडल बन चुके हैं। इतने बड़े पैमाने पर वालंटियर प्रबंधन, सुरक्षा, आवागमन और पर्यटकों की भारी आमद से लॉजिस्टिक्स, आतिथ्य सत्कार और परिवहन क्षेत्रों को एक साथ बढ़ावा मिलता है। भविष्य में इस प्रकार के राजकीय और सांस्कृतिक आयोजन उत्तर भारत के क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन में एक महत्वपूर्ण आर्थिक उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·41 दिन पहले

अयोध्या दीपोत्सव में 28 लाख दीयों और 35 हजार वालंटियरों की यह तैयारी प्रशासनिक और रसद प्रबंधन का एक बेहद विशाल मॉडल पेश करती है। केवल आयोजन करना ही चुनौती नहीं है, बल्कि नगर आयुक्त के हवाले से घाटों की सफाई, दीयों के विसर्जन और संरक्षण की पुख्ता कार्ययोजना यह सुनिश्चित करती है कि इस भव्य धार्मिक उत्सव के बाद पर्यावरण और स्वच्छता का संतुलन भी पूरी तरह बना रहे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·41 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस वृहद आयोजन में 35 हजार वालंटियरों की तैनाती यह दर्शाती है कि कानून-व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और लोक सुरक्षा का समन्वय कितना जटिल है। इतने बड़े पैमाने पर आवागमन और सुरक्षा प्रणालियों को सुचारू रखना स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी, जिससे यह तय होगा कि बिना किसी अव्यवस्था के धार्मिक आयोजन कैसे संपन्न होते हैं।

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