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बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच वॉशिंगटन ने खुद चुनी अपनी तन्हाई, दिल्ली में बोले विदेश मंत्री एस. जयशंकरदिल्ली
4 अक्तू॰ 2026, 5:42 pm (26 दिन पहले)· 1

बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच वॉशिंगटन ने खुद चुनी अपनी तन्हाई, दिल्ली में बोले विदेश मंत्री एस. जयशंकर

दिल्ली में म्यूनिख लीडर्स मीटिंग के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था अमेरिका के जानबूझकर खुद को अलग-थलग करने और चीन के विस्तार से तय हो रही है.

अंतरराष्ट्रीय मंच पर शक्ति संतुलन में आ रहे अप्रत्याशित मोड़ों के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मौजूदा भू-राजनीति का एक बेहद गहरा आकलन प्रस्तुत किया है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित म्यूनिख लीडर्स मीटिंग के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आज की दुनिया का कूटनीतिक मिजाज काफी हद तक वॉशिंगटन के अपने रवैये में आए बुनियादी बदलावों की वजह से आकार ले रहा है. यह बदलाव किसी दबाव या मजबूरी की देन नहीं है, बल्कि अमेरिका ने अपनी सोची-समझी रणनीति के तहत यह रास्ता चुना है.

रणनीतिक प्राथमिकताओं को नए सिरे से तय करता वॉशिंगटन

विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समीकरणों की पड़ताल करते हुए स्पष्ट किया कि अमेरिकी विदेश नीति अब पहले जैसी सर्वव्यापी भूमिका में नहीं दिखती. वॉशिंगटन ने अपनी प्राथमिकताओं की सूची को दोबारा तैयार किया है, जिसके चलते वह अतीत के मुकाबले कहीं अधिक अकेला खड़ा दिखाई देता है. महाशक्ति के इस आत्म-केंद्रित रुख ने पूरी दुनिया के शक्ति संतुलन को हिला दिया है और विभिन्न देशों को अपने पुराने गठबंधनों तथा कूटनीतिक रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करने के लिए विवश कर दिया है.

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बैठक में मौजूद राजनयिकों को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा, “इस कमरे में मौजूद कोई भी इस बात से असहमत नहीं होगा कि आज का माहौल मुख्य रूप से अमेरिका की स्थिति में आए बड़े बदलाव से तय हो रहा है.” उन्होंने आगे रेखांकित किया कि यह नीतिगत रूपांतरण किसी बाह्य संकट के कारण नहीं आया, बल्कि अपनी मर्जी से चुनी गई एक विशिष्ट मुद्रा है, जिसके चलते आज अमेरिका खुद को अलग-थलग करने वाली ताकत में बदल चुका है.

बीजिंग की असाधारण महत्वाकांक्षा और वैश्विक स्थिति

भू-राजनीति के दूसरे सबसे बड़े कारक पर चर्चा करते हुए एस. जयशंकर ने चीन के विस्तारवादी प्रभाव की पड़ताल की. उन्होंने बताया कि बीजिंग अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को किसी भी अन्य राष्ट्र से बिल्कुल अलग और अनोखा देश मानता है. कई मायनों में वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में उसकी आर्थिक व रणनीतिक स्थिति भी इस विशिष्ट सोच को समर्थन देती दिखती है.

चीन की वैश्विक भूमिका पर बात रखते हुए उन्होंने कहा, “इस परिदृश्य की दूसरी अहम बात निश्चित रूप से चीन का उदय है.” विदेश मंत्री ने समझाया कि बीजिंग का यह आत्म-मूल्यांकन केवल उसकी अपनी धारणा तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी हकीकत में भी कई मोर्चों पर उसकी मौजूदगी इस विशिष्टता को प्रमाणित करती है. इससे अंतरराष्ट्रीय पटल पर नई चुनौतियां और नए तनाव उभर रहे हैं.

द्विपक्षीय दायरे से बाहर निकला वैश्विक होड़ का मैदान

बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए विदेश मंत्री ने इस आम धारणा को खारिज किया कि आज की प्रतिस्पर्धा सिर्फ अमेरिका और चीन के बीच की जंग है. उनके अनुसार, मौजूदा दौर की होड़ कहीं अधिक व्यापक, बहुआयामी और जटिल हो चुकी है. दुनिया के तमाम देश अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए हर प्रकार के प्रभाव, संसाधन और विशिष्ट बढ़त को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.

इस तीखी होड़ के स्वरूप को समझाते हुए उन्होंने कहा, “हम बहुत कड़ी प्रतिस्पर्धा देख रहे हैं.” उन्होंने रेखांकित किया कि आधुनिक युग में राष्ट्र एक-दूसरे पर अत्यधिक आर्थिक, तकनीकी और राजनीतिक रूप से निर्भर हैं. इसके बावजूद, आपसी निर्भरता के इन जटिल जालों के बीच रणनीतिक टकराव लगातार गहराता जा रहा है, जिससे दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल बन रहा है.

म्यूनिख लीडर्स मीटिंग्स की गोपनीय कूटनीतिक कार्यप्रणाली

दिल्ली का यह आयोजन म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस की खास श्रृंखला का हिस्सा है, जिसे म्यूनिख लीडर्स मीटिंग्स के नाम से जाना जाता है. इस मंच का प्राथमिक उद्देश्य दुनिया की शीर्ष सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े पेचीदा मुद्दों पर केंद्रित, क्षेत्रीय और व्यावहारिक मंथन करना है. इसमें विश्व भर से लगभग 80 वरिष्ठ नीति-निर्माता, राजनयिक और रणनीतिक विशेषज्ञ एक मेज पर जुटते हैं.

यह कूटनीतिक संवाद साल में एक या दो बार दुनिया के प्रमुख नीतिगत केंद्रों और राजधानियों में बंद कमरों के भीतर आयोजित होता है. इन बैठकों का मुख्य आकर्षण यह है कि पूरी चर्चा ‘चैथम हाउस नियम’ के अंतर्गत होती है. इस नियम की वजह से वैश्विक नेता और विशेषज्ञ बिना किसी राजनीतिक हिचक या सार्वजनिक बयानबाजी के डर के, दुनिया के सबसे गंभीर संकटों पर पूरी स्वतंत्रता और ईमानदारी के साथ अपने विचार साझा कर पाते हैं.

सवाल-जवाब

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किस मंच पर यह बयान दिया?
उन्होंने यह बयान दिल्ली में आयोजित म्यूनिख लीडर्स मीटिंग के दौरान दिया.
अमेरिका की मौजूदा वैश्विक स्थिति के बारे में विदेश मंत्री ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन ने अपनी सोची-समझी रणनीति के तहत खुद को पहले से कहीं अधिक अकेला बना लिया है.
चीन की वैश्विक भूमिका को लेकर एस. जयशंकर की क्या राय थी?
उन्होंने बताया कि चीन खुद को एक अनोखा देश मानता है और कई मामलों में उसकी वास्तविक स्थिति भी इस सोच को सही साबित करती है.
क्या मौजूदा अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा सिर्फ अमेरिका और चीन तक सीमित है?
नहीं, विदेश मंत्री के अनुसार यह होड़ अब सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के देश अपनी किसी भी बढ़त को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.
म्यूनिख लीडर्स मीटिंग्स में कितने विशेषज्ञ और नीति-निर्माता भाग लेते हैं?
इस उच्चस्तरीय बैठक में सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े लगभग 80 वरिष्ठ नीति-निर्माता और विशेषज्ञ शामिल होते हैं.
म्यूनिख लीडर्स मीटिंग्स किस नियम के तहत आयोजित की जाती हैं?
ये गोपनीय बैठकें चैथम हाउस नियम के तहत बंद दरवाजों के पीछे आयोजित की जाती हैं.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·25 दिन पहले

जयशंकर की बात सुनकर मुझे पिछले साल वॉशिंगटन में हुई उस मुलाक़ात की याद आ गई, जहाँ एक अमेरिकी अधिकारी ने खुद माना था कि वे अब दुनिया का हर मोर्चा अकेले संभालने के पक्ष में नहीं हैं। बीजिंग का बढ़ता दबदबा और अमेरिका का यह खुद को समेटना वाकई समीकरण बदल रहा है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·25 दिन पहले

पिछली बार जब मैं विदेश मंत्रालय की एक बंद कमरे की बैठक में था, तो अधिकारियों की बातों से साफ़ लग रहा था कि अमेरिका अब अपनी ही धुन में मग्न है।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·25 दिन पहले

अर्जुन, आपकी बात बिल्कुल सही लगी कि अमेरिका इन दिनों वाकई अपनी धुन में मस्त है और दुनिया से कटता जा रहा है।

Rohan Verma@rohan-verma·25 दिन पहले

जयशंकर साहब की बात सही लगती है, पर अमेरिका खुद को अलग कर रहा है, यह मानना थोड़ा ज़्यादा हो जाता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 दिन पहले

रोहन भाई, अगर अमेरिका खुद को अलग नहीं कर रहा, तो क्या आपको लगता है कि उनका ये बदला हुआ रुख सिर्फ एक चाल है?

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