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बहरोड़ तहसील परिसर में पार्षदों के शपथ ग्रहण पर भारी हंगामा, विधायक ललित यादव ने पुलिस पर लगाया धक्का-मुक्की का आरोपराजस्थान
19 सित॰ 2026, 12:50 pm (6 दिन पहले)· 1

बहरोड़ तहसील परिसर में पार्षदों के शपथ ग्रहण पर भारी हंगामा, विधायक ललित यादव ने पुलिस पर लगाया धक्का-मुक्की का आरोप

बहरोड़ की नगर पालिका बर्डोद के दो कांग्रेस पार्षदों को पद की शपथ लेने से रोके जाने के आरोप के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखा टकराव हुआ.

राजस्थान के बहरोड़ स्थित तहसील कार्यालय में आयोजित शपथ ग्रहण कार्यक्रम के दौरान अचानक भारी राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया. नगर पालिका बर्डोद के नवनिर्वाचित दो कांग्रेस पार्षदों को पद की शपथ दिलाने की प्रक्रिया चल रही थी, तभी प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस कर्मियों पर उन्हें रोकने के आरोप लगे. इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस विधायक ललित यादव, विधानसभा प्रभारी संजय यादव और पार्टी के अनेक कार्यकर्ता आक्रोशित होकर मौके पर पहुंच गए, जिससे पूरे प्रशासनिक परिसर में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई.

शपथ कक्ष में रोके जाने का दावा और तीखी बहस

प्राप्त विवरण के अनुसार, दोनों निर्वाचित पार्षद औपचारिक प्रक्रिया के तहत सहायक रिटर्निंग अधिकारी (एआरओ) नेहा राठी के समक्ष शपथ ग्रहण करने के लिए पहुंचे थे. कांग्रेस पक्ष का कहना है कि कक्ष में पहले से मौजूद प्रशासनिक तंत्र और पुलिस दल ने पार्षदों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया. आरोप है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को वहां से जबरन हटाने और निर्धारित शपथ प्रक्रिया में सीधा व्यवधान डालने की कोशिश की गई. जनप्रतिनिधियों को उनके वैधानिक अधिकार से वंचित करने की सूचना मिलते ही कांग्रेस विधायक ललित यादव ने तहसील कार्यालय पहुंचकर प्रशासनिक कार्यशैली की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए.

पुलिस अधिकारी पर धक्का-मुक्की का आरोप

विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब और अधिक गरमा गई जब कांग्रेस विधायक ललित यादव और विधानसभा प्रभारी संजय यादव ने पुलिस अधिकारियों पर बदसलूकी का आरोप जड़ा. दोनों नेताओं ने कहा कि जब वे प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ अपना शांतिपूर्ण विरोध दर्ज करा रहे थे, तब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सुरेश खींची ने उनके साथ धक्का-मुक्की की. नेताओं का कहना था कि चुनी हुई सरकार के दबाव में पुलिस बल गैरकानूनी तरीके से काम कर रहा है. इस पूरे विवाद और लगाए गए आरोपों के संबंध में स्थानीय पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों का आधिकारिक बयान आना अभी शेष है.

परिसर में सुरक्षा बढ़ाई गई, प्रदेश स्तर पर राजनीतिक तकरार

घटना के तुरंत बाद बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थकों ने तहसील परिसर में जोरदार नारेबाजी करते हुए धरना शुरू कर दिया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस जाब्ता बुलाकर पूरे इलाके में सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया गया. इस पूरे विवाद पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि पूरे राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की उपेक्षा की जा रही है और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में विपक्षी पार्षदों को उनके दायित्वों से रोका जा रहा है. फिलहाल पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर व्यवस्था सामान्य करने में जुटे हैं.

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सवाल-जवाब

बहरोड़ तहसील कार्यालय में विवाद किस बात को लेकर हुआ?
नगर पालिका बर्डोद के दो नवनिर्वाचित कांग्रेस पार्षदों को पद की शपथ लेने से कथित रूप से रोके जाने के बाद यह हंगामा शुरू हुआ.
इस घटना में किन नेताओं और अधिकारियों के नाम सामने आए हैं?
कांग्रेस विधायक ललित यादव, विधानसभा प्रभारी संजय यादव, एआरओ नेहा राठी और एएसपी सुरेश खींची इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में हैं.
कांग्रेस विधायक ने पुलिस पर क्या गंभीर आरोप लगाया है?
विधायक ललित यादव ने आरोप लगाया कि विरोध दर्ज कराने के दौरान एएसपी सुरेश खींची ने उनके साथ धक्का-मुक्की और अभद्रता की.
हंगामे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के क्या इंतजाम किए?
तहसील परिसर में भारी पुलिस जाब्ता तैनात कर दिया गया है ताकि कानून व्यवस्था और शांति बनी रहे.
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मामले में क्या प्रतिक्रिया दी?
गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया पर सरकार पर तानाशाही करने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को दबाने का आरोप लगाया.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·5 दिन पहले

बहरोड़ तहसील परिसर की इस राजनीतिक खींचतान ने प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब चुने हुए जनप्रतिनिधियों और पुलिस के बीच इस तरह का टकराव सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर तूल पकड़ता है, तो इसका सीधा असर स्थानीय शासन और जन-विश्वास पर पड़ता है। आने वाले दिनों में यदि प्रशासन की ओर से कोई पारदर्शी और आधिकारिक बयान सामने नहीं आया, तो यह विवाद राज्य स्तर पर एक बड़े राजनीतिक विरोध का रूप ले सकता है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली की निष्पक्षता और अधिक प्रभावित होगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

यह घटना राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के बाद स्थानीय प्रशासन और विपक्षी जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ते टकराव का स्पष्ट संकेत है। निर्वाचित पार्षदों को शपथ लेने से रोकना सीधे तौर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनता के जनादेश की अवमानना है। यदि इस मामले में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मुद्दा विधानसभा के पटल पर भी गूंजेगा और राज्य में राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ाएगा।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

यह घटना प्रशासनिक मशीनरी और राजनीतिक सत्ता के बीच बढ़ते संघर्ष को दर्शाती है, जिसका सीधा असर स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली और कारोबारी माहौल पर पड़ सकता है। इस तरह के राजनीतिक तनाव और प्रशासनिक गतिरोध से निवेशकों का भरोसा डगमगाता है, क्योंकि नीतिगत स्थिरता और सुचारू कानून-व्यवस्था किसी भी क्षेत्र के आर्थिक विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए बेहद जरूरी होती हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

तहसील परिसर में निर्वाचित पार्षदों को शपथ से रोकना और पुलिस पर धक्का-मुक्की का आरोप गंभीर प्रशासनिक चूक है। कानून-व्यवस्था की यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि यदि प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच का यह टकराव नहीं थामा गया, तो आने वाले दिनों में यह विवाद अदालती मुकदमों और बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि प्रशासनिक मशीनरी और सत्ता के बीच स्थानीय स्तर पर टकराव किस हद तक बढ़ चुका है। यदि जनप्रतिनिधियों को इस तरह शपथ लेने से रोका जाएगा, तो इससे नौकरशाही और राजनीतिक दलों के बीच अविश्वास और गहराएगा। आने वाले दिनों में यह विवाद क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कामकाज को भी लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है।

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