उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से सटी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दोनों देशों की ऐतिहासिक नजदीकियों को एक नया भव्य प्रतीक मिला है। बहराइच जिले की 101 किलोमीटर लंबी सीमा नेपाल के भूभाग से जुड़ी हुई है, जहाँ सदियों से पारिवारिक, सामाजिक, व्यापारिक और रणनीतिक रिश्ते फलते-फूलते रहे हैं। इन्हीं प्रगाढ़ संबंधों को और सुदृढ़ करने के साथ-साथ सीमाई सुरक्षा और क्षेत्रीय कारोबार को नई ऊर्जा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से रुपईडीहा में इंडो-नेपाल मैत्री द्वार का निर्माण पूरा कर लिया गया है। आधुनिक वास्तुकला से सजा यह विशाल प्रवेश द्वार अब सीमा पार आने-जाने वाले लोगों के लिए आकर्षण का एक प्रमुख केंद्र बन गया है।
643.28 लाख रुपये की लागत से हुआ भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण
बाराबंकी-बहराइच-रुपईडीहा राष्ट्रीय राजमार्ग के आखिरी मुहाने पर इस विशाल संरचना को स्थापित किया गया है। पूरी परियोजना के निर्माण में कुल ₹643.28 लाख का खर्च आया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए तहसील नानपारा के अधीन आने वाले रुपईडीहा कस्बे में जमीन का अधिग्रहण किया गया। प्रशासन ने इसके लिए संबंधित भू-स्वामियों के साथ पारदर्शी तरीके से आपसी सहमति बनाई और समझौते के आधार पर भूमि खरीदी, जिसके बाद निर्माण कार्य को गति देकर पूरा किया गया।
चार पिलरों का मजबूत ढांचा और सुगम आवागमन की व्यवस्था
रुपईडीहा सीमा पर इस प्रवेश द्वार के अस्तित्व में आने के बाद सीमाई इलाके में आवागमन काफी व्यवस्थित और सुचारू हो गया है। तकनीकी बनावट के लिहाज से यह द्वार चार-चार सुदृढ़ पिलरों के ढांचे पर टिका हुआ है, जिसकी भव्यता दूर से ही राहगीरों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है। यात्रियों की सहूलियत के लिए गेट पर दोनों दिशाओं में स्पष्ट संकेत अंकित किए गए हैं। नेपाल की ओर से भारत में प्रवेश करने वाली लेन पर मैत्री द्वार लिखा गया है, जबकि भारत से नेपाल जाने वाले रास्ते पर नेपाल बॉर्डर राष्ट्र का बोर्ड लगाया गया है। इसके ठीक समीप सीमांकन को स्पष्ट करने वाला आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा पिलर भी स्थापित है।
स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और पर्यटकों में दिखा उत्साह
इस आधुनिक और सुंदर प्रवेश द्वार के बनने से सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों, स्थानीय कारोबारियों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में काफी खुशी का माहौल है। नेपाल के कोहलपुर के निवासी देवराज बिष्ट ने इस बदलाव पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए साझा किया कि यह द्वार देखने में बहुत ही खूबसूरत और आकर्षक है। उन्होंने आगे कहा कि यहां की सजावट और व्यवस्था बेहतरीन है। नेपाल के दैलेख, सुर्खेत, महेंद्रनगर और विभिन्न पहाड़ी हिस्सों से आने वाले लोग इस भव्य सीमा द्वार के सामने रुककर तस्वीरें और सेल्फी लेना खासा पसंद कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पूर्व में यहां एक सामान्य सा गेट हुआ करता था, लेकिन अब इस भव्य और संगठित ढांचे के बनने से भारतीय सीमा को एक वैश्विक पहचान और नई गरिमा हासिल हुई है।
सामरिक सुरक्षा और द्विपक्षीय व्यापार को मिलेगा नया संबल
101 किलोमीटर की संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थापित यह मैत्री द्वार दोस्ताना सामाजिक संबंधों के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभाएगा। व्यवस्थित प्रवेश और निकास की सुविधा से सुरक्षा एजेंसियों को निगरानी में मदद मिलेगी, वहीं औपचारिक व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति प्राप्त होगी। बहराइच मार्ग से नेपाल की यात्रा करने वाले सैलानियों के लिए यह नया स्थल एक यादगार ठहराव बन गया है।





















