बहराइच में अचानक बदले मौसम के मिजाज, तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने खेती-किसानी को गहरा आघात पहुंचाया है. तूफानी हवाओं के चलते जिले के कई हिस्सों में बिजली के खंभे उखड़ गए और विशाल पेड़ धराशायी हो गए, वहीं खेतों में पककर तैयार खड़ी फसलें जमीन पर बिछ गईं. इस गंभीर स्थिति को देखते हुए शासन ने त्वरित संज्ञान लिया है. प्रशासन के आदेश पर राजस्व विभाग और कृषि विभाग के अधिकारियों ने क्षति के सटीक मूल्यांकन और राहत राशि वितरण की व्यवस्था को तेज गति से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है.
फलदार और बहुवर्षीय फसलों को सबसे ज्यादा आघात
जिले के ग्रामीण अंचलों में केला, धान समेत कई फसलों को भारी क्षति पहुंची है. बहराइच के मिर्जापुर गांव के किसान त्रिलोकी जैसे कई काश्तकारों की तैयार फसल इस प्राकृतिक मार की भेंट चढ़ गई. कई एकड़ में फैली केले की उपज, जिसकी कटाई महज 15 से 20 दिनों के भीतर शुरू होने वाली थी, तेज हवाओं और जलजमाव के कारण 90 प्रतिशत तक नष्ट हो चुकी है. कई किसानों ने निजी जरूरतों और खेती की लागत निकालने के लिए बैंकों से कर्ज या क्रेडिट ले रखा था. अब पूरी फसल बर्बाद होने और पानी में डूब जाने से ग्रामीण परिवारों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
आपदा राहत कोष से मिलने वाले मुआवजे की दरें
शासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने साफ किया है कि जिन किसानों ने औपचारिक बीमा नहीं करवाया है, उन्हें भी बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा. ऐसे किसानों को आपदा राहत कोष के जरिए सीधी आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी, बशर्ते लेखपाल की आधिकारिक सर्वे रिपोर्ट में फसल की क्षति न्यूनतम 33 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज हो. तय किए गए नियमों के अनुसार प्रति हेक्टेयर मुआवजे की दरें इस प्रकार रखी गई हैं
- असिंचित क्षेत्र: एकवर्षीय फसलों के नुकसान के लिए ₹8,500 प्रति हेक्टेयर की दर निर्धारित की गई है.
- सिंचित क्षेत्र: सिंचित भूमि पर खड़ी एकवर्षीय फसलों की क्षति होने पर ₹17,000 प्रति हेक्टेयर का मुआवजा मिलेगा.
- बहुवर्षीय फसलें: केला, आम, पपीता या एक साल से अधिक अवधि वाली बागवानी फसलों के बर्बाद होने पर ₹22,500 प्रति हेक्टेयर की सहायता राशि दी जाएगी.
बीमित किसानों के लिए 72 घंटे में सूचना देना जरूरी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के दायरे में आने वाले किसानों के लिए प्रक्रिया को अलग रखा गया है. योजना के तहत नामांकित किसानों को आपदा आने के 72 घंटे के भीतर टोल-फ्री नंबर 14447 पर कॉल करके अपनी शिकायत अनिवार्य रूप से दर्ज करानी होगी. जैसे ही किसान की सूचना दर्ज होगी, उप निदेशक कृषि (DD Agriculture) के दिशानिर्देश में गठित विशेष जांच टीम सीधे मौके पर जाकर नुकसान का भौतिक सत्यापन करेगी.
सर्वे से वंचित किसानों को गूगल फॉर्म का नया विकल्प
यदि किसी वजह से क्षेत्रीय लेखपाल या कृषि विभाग का सर्वे दल किसी खेत तक समय पर नहीं पहुंच पाता है, तो किसानों की सुविधा के लिए प्रशासन ने एक विशेष गूगल फॉर्म का प्रबंध किया है. इस डिजिटल माध्यम का उपयोग करके किसान खुद अपने खसरा और खतौनी के विवरण के साथ बर्बाद हुई फसल की तस्वीरें अपलोड कर सकते हैं. फॉर्म में दर्ज संपर्क नंबर के आधार पर ही सत्यापन टीम सीधे किसान से संपर्क साधेगी और मौके की जांच करेगी. पूरी प्रक्रिया की निगरानी अपर जिलाधिकारी (ADM)/नोडल अधिकारी कर रहे हैं. अधिकारियों के अनुसार अगले 2 से 3 दिनों के भीतर जिले का व्यापक क्षति आंकड़ा तैयार कर लिया जाएगा, जिसके बाद पात्र लाभार्थियों के खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से राहत राशि भेज दी जाएगी.


















