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बहुजन समाज पार्टी की कमान में बदलाव, मायावती ने भतीजे ईशान आनंद को सौंपा राष्ट्रीय संयोजक का पदउत्तर प्रदेश
23 सित॰ 2026, 3:20 pm (35 दिन पहले)· 1

बहुजन समाज पार्टी की कमान में बदलाव, मायावती ने भतीजे ईशान आनंद को सौंपा राष्ट्रीय संयोजक का पद

बसपा प्रमुख मायावती ने लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय बैठक में अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही पार्टी ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में किसी भी दल से गठबंधन न करते हुए अकेले चुनाव लड़ने का संकल्प दोहराया है।

बहुजन समाज पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में एक बड़ा फेरबदल हुआ है। पार्टी प्रमुख मायावती ने लखनऊ में आयोजित देश भर के पदाधिकारियों के सम्मेलन में अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को राष्ट्रीय स्तर की अहम जिम्मेदारी सौंपते हुए नेशनल कोऑर्डिनेटर घोषित किया है। इससे पहले यह पद ईशान के बड़े भाई आकाश आनंद के पास था, लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद उन्हें हटाकर अब ईशान आनंद को संगठन की मुख्य धारा में आगे लाने का निर्णय लिया गया है। इस महत्वपूर्ण सांगठनिक बैठक में मायावती ने औपचारिक रूप से ईशान आनंद को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

लखनऊ की बैठक में नेतृत्व का आशीर्वाद और नई जिम्मेदारी

राजधानी लखनऊ में आयोजित इस व्यापक बैठक में देश भर से आए पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। परंपरा के अनुसार बहुजन समाज पार्टी की बैठकों में केवल पार्टी प्रमुख ही अपना वक्तव्य रखती हैं और अन्य नेताओं को बोलने का अवसर नहीं मिलता है। हालांकि, इस बार स्थिति अलग रही और मायावती के संबोधन के पश्चात नव-नियुक्त राष्ट्रीय संयोजक ईशान आनंद ने भी मंच से अपनी बात रखी।

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ईशान आनंद ने मायावती के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया और इतनी बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपने के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि वह पार्टी सुप्रीमो के दिखाए मार्ग पर निष्ठापूर्वक आगे बढ़ेंगे और कभी किसी को निराश होने का अवसर नहीं देंगे।

चुनावी रणनीति: तीन राज्यों में अकेले मैदान में उतरेगी पार्टी

बैठक के दौरान आगामी चुनावों की रणनीति को लेकर भी महत्वपूर्ण रुख स्पष्ट किया गया। मायावती ने साफ कर दिया कि पार्टी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी चुनावों में पूरी मजबूती के साथ अपने दम पर लड़ेगी। पार्टी नेतृत्व ने दोहराया कि इन तीनों राज्यों में किसी भी अन्य राजनीतिक दल के साथ कोई चुनावी गठबंधन या समझौता नहीं किया जाएगा, बल्कि पार्टी अपने पारंपरिक कैडर और नीतियों के आधार पर मतदाताओं के बीच जाएगी।

परिवार से केवल ईशान को आगे बढ़ाने का फैसला

मायावती ने इससे पहले स्पष्ट घोषणा की थी कि आनंद कुमार के परिवार से अब केवल ईशान आनंद को ही संगठन में आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, पूर्व संयोजक आकाश आनंद और उनकी बहन को पार्टी के किसी भी पद या जिम्मेदारी से पूरी तरह दूर रखने का निर्णय सुनाया गया। पार्टी प्रमुख ने बताया कि अपने छोटे भाई आनंद कुमार के विशेष अनुरोध पर ही उन्होंने उनके बड़े पुत्र आकाश आनंद को राजनीति के मुख्य पटल पर आगे बढ़ाया था।

हालांकि, विवाह के उपरांत आकाश के व्यवहार और उनकी राजनीतिक कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष व्यक्त करते हुए पार्टी प्रमुख ने उन्हें पदमुक्त कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि आकाश अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में आकर फैसले ले रहे थे, और ऐसी परिस्थितियों में उन्हें दोबारा दल में शामिल करना संगठन के साथ विश्वासघात के समान होगा।

कड़े अनुशासन की शर्त के साथ नई शुरुआत

पार्टी नेतृत्व ने विस्तार से बताया कि गंभीर विचार-मंथन के बाद ही यह तय हुआ कि परिवार के किसी ऐसे सदस्य को कमान सौंपी जाए, जो आकाश आनंद के तौर-तरीकों से अलग निष्ठा के साथ काम करे। इसी सोच के तहत ईशान आनंद को सम्मानजनक दायित्व देकर आगे बढ़ाया गया है। इसके साथ ही मायावती ने यह कड़ा संदेश भी दिया कि अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में ईशान भी पार्टी के सिद्धांतों के विरुद्ध किसी गंभीर गतिविधि में लिप्त पाए गए, तो उन्हें भी बिना किसी हिचकिचाहट के संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।

सवाल-जवाब

बसपा का नया राष्ट्रीय संयोजक किसे बनाया गया है?
मायावती ने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को बहुजन समाज पार्टी का नया राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया है।
ईशान आनंद से पहले पार्टी में यह पद किसके पास था?
ईशान आनंद से पहले उनके बड़े भाई आकाश आनंद बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
मायावती ने आकाश आनंद को पद से क्यों हटाया था?
मायावती के अनुसार, शादी के बाद आकाश के रवैये और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में आने के चलते उन्हें पार्टी से अलग किया गया था।
बसपा किन राज्यों में अकेले चुनाव लड़ने जा रही है?
पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनाव लड़ेगी।
बैठक में ईशान आनंद ने क्या संकल्प लिया?
ईशान आनंद ने मायावती का आशीर्वाद लेते हुए कहा कि वह उनके बताए रास्ते पर चलेंगे और पार्टी को कभी निराश नहीं करेंगे।
क्या परिवार के अन्य सदस्यों को भी संगठन में जिम्मेदारी दी जाएगी?
मायावती ने स्पष्ट किया है कि परिवार से केवल ईशान आनंद को आगे बढ़ाया जाएगा, जबकि आकाश और उनकी बहन को दूर रखा जाएगा।
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टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·34 दिन पहले

परिवार के भीतर से ही फिर से जिम्मेदारी सौंपना समझ नहीं आया, जब पहले वाले अनुभव अच्छे नहीं रहे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·35 दिन पहले

परिवार के भीतर इस तरह की अदला-बदली से संगठन पर असर पड़ना तय है। मायावती ने साफ कर दिया है कि फैसले उनके हिसाब से ही चलेंगे और यूपी-पंजाब में अकेले लड़ने का उनका पुराना दांव फिर सामने आ गया है।

Ravikash Gupta@ravikash·35 दिन पहले

अर्जुन जी, अकेले चुनाव लड़ने का मायावती का फैसला इस बार यूपी और पंजाब में क्या रंग लाएगा, देखना दिलचस्प होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·35 दिन पहले

परिवार के भीतर इस तरह की तनातनी और बार-बार बदलाव से पार्टी के कैडर पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 दिन पहले

रोहन भाई, कैडर पर असर तो पड़ेगा ही, पर उससे ज़्यादा दिलचस्प बात यह है कि मंच पर परंपरा तोड़कर ईशान को बोलने की अनुमति क्यों दी गई।

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