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बाड़मेर में विद्यार्थियों ने प्रकृति संग रचा रक्षाबंधन का अनोखा धागा, वृक्षों को बांधा रक्षासूत्र और लिया हरित संकल्पराजस्थान
27 अग॰ 2026, 5:12 pm (29 दिन पहले)· 3

बाड़मेर में विद्यार्थियों ने प्रकृति संग रचा रक्षाबंधन का अनोखा धागा, वृक्षों को बांधा रक्षासूत्र और लिया हरित संकल्प

सरहदी जिले बाड़मेर के मॉर्डन स्कूल में रक्षाबंधन का त्योहार एक सामाजिक संदेश के रूप में मनाया गया। कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों ने भाइयों की कलाई के साथ पेड़-पौधों को रक्षासूत्र बांधकर पर्यावरण संरक्षण का दृढ़ संकल्प लिया।

सीमावर्ती बाड़मेर क्षेत्र में इस बार रक्षाबंधन पर्व को एक बिल्कुल अलग और प्रेरणादायक तरीके से मनाया गया। भाई-बहन के अटूट स्नेह, भरोसे और सुरक्षा के पारंपरिक प्रतीक इस त्योहार को यहाँ के युवाओं ने एक व्यापक सामाजिक दायित्व के साथ जोड़ दिया। परंपरागत रूप से जहाँ बहनें केवल अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधती हैं, वहीं इस बार बाड़मेर के मॉर्डन स्कूल परिसर में खुशियों की डोर पर्यावरण की रक्षा के संकल्प तक विस्तृत हो गई। छात्रों ने इस सांस्कृतिक अवसर का उपयोग प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी रेखांकित करने के लिए किया।

वृक्षों को बनाया जीवन का साथी और बाँधा रक्षासूत्र

विद्यालय में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बहनों ने अपने भाइयों को राखी बाँधते समय आपसी संबंधों को सहेजने और हर परिस्थिति में एक-दूसरे के प्रति किए गए वादों को निभाने का वचन लिया। इसके तुरंत बाद छात्रों ने परिसर में स्थित पेड़-पौधों के तनों और शाखाओं पर रक्षासूत्र बाँधे। विद्यार्थियों ने इन वृक्षों को अपने सच्चे साथी के रूप में स्वीकार करते हुए उनकी सुरक्षा और देखभाल की पूरी जिम्मेदारी उठाने की घोषणा की।

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इस अनोखी गतिविधि पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मॉर्डन स्कूल की छात्रा हर्षिता ने बताया कि पेड़-पौधों को राखी बाँधने का मूल उद्देश्य इंसान और प्रकृति के रिश्ते को सम्मान देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार एक भाई जीवन भर अपनी बहन की रक्षा का संकल्प उठाता है, ठीक उसी तरह प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह प्रकृति, पर्यावरण और हरियाली की रक्षा के लिए तत्पर रहे। प्रकृति की सुरक्षा के बिना मानव जीवन की रक्षा अधूरी मानी जाएगी।

शिक्षकों से पढ़ाई और अनुशासन का अनूठा संकल्प

इस वर्ष का आयोजन केवल पारंपरिक अनुष्ठानों और हरियाली तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें शैक्षणिक अनुशासन का भाव भी समाहित था। रक्षाबंधन के इस पावन मंच पर छात्रों ने अपने गुरुजनों और शिक्षकों से भी कई महत्त्वपूर्ण वादे किए। विद्यार्थियों ने अपनी कक्षाओं में लगन से अध्ययन करने, परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए टॉप करने और विद्यालय परिसर में अनुशासित आचरण बनाए रखने का संकल्प दोहराया।

स्कूल की छात्रा अदिति खत्री ने इस संदर्भ में जानकारी साझा करते हुए कहा कि विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों को भरोसा दिलाया है कि वे न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर मुकाम हासिल करेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के अभियानों में भी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। भाइयों की कलाई पर बँधी राखी जहाँ पारिवारिक मजबूती की याद दिला रही थी, वहीं पौधों पर बँधा धागा कुदरत के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का बोध करा रहा था।

त्योहार को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने की पहल

स्कूल के प्रिंसिपल नवनीत पंचोरी ने इस नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि रक्षाबंधन जैसे महान पर्व को केवल व्यक्तिगत या पारिवारिक सीमाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों को जब सामाजिक चेतना, प्रकृति की देखभाल और दायित्वबोध से जोड़ा जाता है, तो उनका महत्त्व कई गुना बढ़ जाता है। बाड़मेर में छात्रों द्वारा उठाई गई यह 'वादों वाली राखी' की पहल न केवल हरियाली की सुरक्षा को बढ़ावा देगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी में अनुशासन और प्रकृति-प्रेम के संस्कारों को भी सिंचित करेगी।

सवाल-जवाब

बाड़मेर के मॉर्डन स्कूल में रक्षाबंधन किस अलग अंदाज में मनाया गया?
मॉर्डन स्कूल में छात्रों ने भाइयों की कलाई के साथ-साथ पेड़-पौधों को रक्षासूत्र बाँधे और पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प लिया।
इस कार्यक्रम में किन कक्षाओं के विद्यार्थियों ने भाग लिया?
इस आयोजन में मॉर्डन स्कूल के कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों से क्या वादे किए?
छात्रों ने पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने, कक्षा में टॉप करने, अनुशासित रहने और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने का वादा किया।
छात्रा हर्षिता के अनुसार पेड़-पौधों को राखी बाँधने का क्या संदेश था?
हर्षिता के अनुसार, जिस तरह भाई बहन की रक्षा करता है, उसी तरह हर इंसान को पेड़-पौधों को साथी मानकर प्रकृति की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।
मॉर्डन स्कूल के प्रिंसिपल नवनीत पंचोरी ने इस पहल के बारे में क्या कहा?
प्रिंसिपल नवनीत पंचोरी ने कहा कि रक्षाबंधन को केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित न रखकर प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ना एक सराहनीय कदम है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·28 दिन पहले

बाड़मेर के इस स्कूल द्वारा रक्षाबंधन पर पेड़ों को रक्षासूत्र बांधने की पहल यह दर्शाती है कि सीमावर्ती जिलों के युवा अब पारंपरिक संस्कारों के साथ गंभीर पर्यावरणीय और शैक्षणिक सरोकारों को भी जोड़ रहे हैं। इस तरह के नवाचारों से विद्यार्थियों में न केवल प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित होता है, बल्कि अनुशासन और अध्ययन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी मजबूत होती है। यदि ऐसे आयोजनों को जन-अभियान का रूप दिया जाए, तो यह रेगिस्तानी क्षेत्र में हरित आवरण को बढ़ाने और सामाजिक चेतना जागृत करने में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·28 दिन पहले

बाड़मेर जैसे सीमावर्ती और शुष्क क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को जन-संस्कार से जोड़ना एक दूरगामी पहल है। जब युवा पढ़ाई और अनुशासन के साथ पौधों की रक्षा का संकल्प लेते हैं, तो यह न केवल पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूत करता है, बल्कि भविष्य के जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम साबित होता है। ऐसे रचनात्मक आयोजनों से सामाजिक संवेदनशीलता बढ़ती है और सामुदायिक स्तर पर सकारात्मक बदलाव की नींव पड़ती है।

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