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बीकानेर में सोलर कंपनियों से वसूली और खेजड़ी माफिया पर बड़ा एक्शन, दो आईपीएस और एक आईएएस समेत सात अफसरों पर जांचराजस्थान
23 अग॰ 2026, 8:38 am (33 दिन पहले)· 2

बीकानेर में सोलर कंपनियों से वसूली और खेजड़ी माफिया पर बड़ा एक्शन, दो आईपीएस और एक आईएएस समेत सात अफसरों पर जांच

राजस्थान के बीकानेर में सोलर कंपनियों से करोड़ों रुपये की कथित वसूली और पुलिस-माफिया गठजोड़ को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। गोपनीय शिकायत के आधार पर सरकार ने एडीजी सतर्कता को इस मामले की उच्चस्तरीय जांच सौंप दी है।

राजस्थान के बीकानेर जिले में सोलर ऊर्जा कंपनियों से जुड़ी कथित तौर पर करोड़ों रुपये की वसूली का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस और खेजड़ी माफिया के बीच सांठगांठ के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिसने प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हलचल तेज कर दी है। एक गोपनीय शिकायत के आधार पर सरकार ने इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच शुरू करवा दी है, ताकि भ्रष्टाचार की इस परत को पूरी तरह से उजागर किया जा सके।

गोपनीय शिकायत से खुला राज

यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब शासन स्तर पर एक गोपनीय शिकायत पहुंचाई गई। इस शिकायत में मुख्य रूप से यह आरोप लगाया गया कि बीकानेर क्षेत्र में काम कर रही सोलर कंपनियों को निशाना बनाकर भारी-भरकम वसूली की जा रही है। इसके साथ ही, खेजड़ी के पेड़ों से जुड़े मामलों में इन कंपनियों पर लगातार दबाव बनाए जाने और इसके एवज में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर आर्थिक लेनदेन होने का भी जिक्र किया गया है। इन संगीन आरोपों को देखते हुए सरकार ने बिना किसी देरी के मामले का संज्ञान लिया और इसकी जांच के औपचारिक निर्देश जारी कर दिए।

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पवन सिंह और करोड़ों के लेनदेन के आरोप

इस पूरे विवाद के केंद्र में पूगल थाने के पूर्व थाना प्रभारी पवन सिंह का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। शिकायत के दस्तावेजों में दावा किया गया है कि उनके भाई की एक कंपनी और सोलर कंपनियों के बीच करीब 40 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। जांच एजेंसियां इस बात की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं कि इस वित्तीय लेनदेन का वास्तविक स्वरूप क्या था और क्या इसका सोलर परियोजनाओं पर बनाए जा रहे दबाव से कोई सीधा संबंध था या नहीं।

शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस गोपनीय शिकायत में केवल एक थानेदार का ही नहीं, बल्कि दो भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस अधिकारियों, एक भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस अधिकारी और चार राजस्थान पुलिस सेवा यानी आरपीएस अधिकारियों के नाम भी संलिप्त होने का दावा किया गया है। हालांकि, अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और इन तमाम अधिकारियों की भूमिका को लेकर कोई भी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जांच एजेंसी इस बात के पुख्ता दस्तावेज जुटा रही है कि क्या इन वरिष्ठ अधिकारियों का इस कथित वसूली से वाकई कोई वास्ता था।

एडीजी सतर्कता कर रहे हैं पूरे मामले की पड़ताल

आरोपों की नजाकत को भांपते हुए राज्य सरकार ने इस संवेदनशील मामले की संपूर्ण जांच की जिम्मेदारी एडीजी सतर्कता को सौंप दी है। वर्तमान में जांच एजेंसी वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड, सोलर कंपनियों से जुड़े विवाद, खेजड़ी के मामलों और नामजद अधिकारियों के कार्यक्षेत्र से जुड़ी फाइलों की एक-एक कर समीक्षा कर रही है। अधिकारियों का साफ कहना है कि जब तक जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और ठोस सबूत हाथ नहीं लग जाते, तब तक किसी भी अधिकारी या व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। फिलहाल यह पूरा मामला पूरी तरह से जांच के दायरे में है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

सवाल-जवाब

बीकानेर में किस मामले की जांच चल रही है?
बीकानेर में सोलर कंपनियों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की वसूली और पुलिस-माफिया गठजोड़ की गोपनीय शिकायत की जांच चल रही है।
इस मामले की जांच किस एजेंसी या अधिकारी को सौंपी गई है?
सरकार ने इस पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी एडीजी सतर्कता को सौंपी है।
शिकायत में किन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं?
शिकायत में दो आईपीएस, एक आईएएस, चार आरपीएस अधिकारियों और पूगल थाने के पूर्व सीआई पवन सिंह का नाम सामने आया है।
पवन सिंह से जुड़े मामले में कितने पैसों के लेनदेन का आरोप है?
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके भाई की कंपनी से करीब 40 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·32 दिन पहले

बीकानेर के इस मामले में आईएएस और आईपीएस जैसे शीर्ष अधिकारियों के नाम आना और चालीस करोड़ के संदिग्ध लेनदेन की बात प्रशासनिक गलियारों में गहरी सेंध का संकेत देती है। एडीजी सतर्कता द्वारा की जा रही यह उच्चस्तरीय जांच यदि आगे बढ़ती है, तो राज्य के ऊर्जा और नौकरशाही तंत्र में बड़े प्रशासनिक फेरबदल और नीतिगत सुधार देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि इससे निवेशकों के बीच भी गलत संदेश जा रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·32 दिन पहले

इस प्रकरण में खेजड़ी संरक्षण नियमों और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के बीच का टकराव गहरी प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है। जब तक एडीजी सतर्कता इस मामले में वित्तीय प्रपत्रों के साथ-साथ अधिकार क्षेत्र के दुरुपयोग के डिजिटल साक्ष्य सार्वजनिक नहीं करते, तब तक राज्य में ग्रीन एनर्जी इन्वेस्टमेंट पर बना यह अनिश्चितता का बादल निवेशकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता रहेगा।

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