कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर जारी पुराना विवाद एक बार फिर उग्र रूप ले चुका है. तमिलनाडु को नदी का पानी छोड़े जाने के फैसले के खिलाफ 13 अगस्त को कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों में कन्नड़ संगठनों और किसान गुटों द्वारा विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं. हालांकि आंदोलनकारियों ने राज्यव्यापी बंद की अपील की है, लेकिन प्रशासन और व्यापारिक संगठनों के रुख के कारण सामान्य जनजीवन पूरी तरह ठप नहीं हुआ है. राज्य भर में शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, चिकित्सा दुकानें, बैंकिंग सेवाएं और सार्वजनिक परिवहन की गाड़ियां अपने निर्धारित समय के अनुसार चल रही हैं.
कावेरी बेसिन और मांड्या में किसानों का बढ़ता विरोध
इस विरोध प्रदर्शन की सबसे व्यापक हलचल बेंगलुरु और कावेरी नदी घाटी के इलाकों में देखने को मिल रही है. मांड्या जिले में किसान संगठन सुबह से ही सड़कों पर उतरकर राज्य सरकार और केंद्रीय निकायों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि जब कर्नाटक के अपने जलाशयों में पानी का स्तर चिंताजनक स्थिति में है, तब पड़ोसी राज्य के लिए पानी छोड़ना स्थानीय खेती और पेयजल आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. मांड्या और आसपास के कृषि क्षेत्रों में किसानों ने रैलियां निकाली हैं और कावेरी जल के अधिकार की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाई है.
CWMA का आदेश और बिलिगुंडलु में जल प्रवाह की शर्त
वर्तमान तनाव की मुख्य वजह कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) का ताजा निर्देश है. प्राधिकरण ने कर्नाटक सरकार को आदेश दिया है कि वह अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी तमिलनाडु के लिए जारी करे. इस पानी के बहाव और मात्रा का मापन सीमावर्ती स्थल बिलिगुंडलु में किया जाना तय हुआ है. इससे पूर्व कावेरी जल नियमन समिति (CWRC) ने भी दोनों राज्यों में वर्षा की स्थिति और जल संचय की समीक्षा करने के बाद इसी मात्रा में पानी छोड़ने की सिफारिश की थी. इस प्रशासनिक आदेश के सार्वजनिक होते ही कर्नाटक के कृषि समूहों में आक्रोश फैल गया.
दैनिक गतिविधियों और सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति
प्रशासन द्वारा पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि आवश्यक सेवाओं को किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा. 13 अगस्त की सुबह बेंगलुरु सहित प्रमुख शहरों में सार्वजनिक परिवहन बसें, ऑटो रिक्शा और मेट्रो रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलती हुई दिखाई दीं. अस्पतालों में मरीजों का इलाज, फार्मेसी दुकानों का संचालन और बैंकों का कामकाज रोजाना की तरह जारी है. हालांकि, कुछ व्यापारिक प्रतिष्ठानों और बाजारों में प्रदर्शनकारियों की आवाजाही के कारण ग्राहकों की चहल-पहल थोड़ी सुस्त जरूर रही है, लेकिन किसी बड़ी हड़ताल जैसी स्थिति नहीं बनी है.
बेंगलुरु शहर पुलिस का कड़ा निर्देश और कानून व्यवस्था
राजधानी बेंगलुरु में शांति बनाए रखने के लिए बेंगलुरु सिटी पुलिस ने विस्तृत सुरक्षा योजना लागू की है. पुलिस विभाग की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि लोकतांत्रिक ढांचे में नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी असहमति जताने का पूरा अधिकार है. इसके साथ ही पुलिस ने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन जबरन दुकानें बंद कराने, सड़कों को रोकने या यात्रियों की आवाजाही में बाधा डालने का प्रयास करेगा, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. सुरक्षा बलों को संवेदनशील चौराहे और सरकारी इमारतों के आसपास तैनात किया गया है.
कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जल अधिकार का विवाद
कावेरी नदी के पानी का बंटवारा दशकों से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच एक अतिसंवेदनशील और भावुक राजनीतिक विषय रहा है. कर्नाटक का पक्ष रहा है कि मानसून की स्थिति, जलाशयों के जल स्तर और राज्य के अपने किसानों तथा शहरी निवासियों की प्राथमिक आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद ही पानी छोड़ा जाना चाहिए. वहीं तमिलनाडु का तर्क रहता है कि उसकी फसलों को बचाने के लिए निर्धारित कोटे का जल समय पर मिलना अनिवार्य है. CWMA के ताजा आदेश ने इसी ऐतिहासिक मतभेद को एक बार फिर सड़कों पर ला दिया है.



















