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छह वर्षों में 114 काले हिरणों का शिकार, नोएडा के आरटीआई कार्यकर्ता ने उजागर किए आंकड़े, आंध्र प्रदेश सबसे ऊपरउत्तर प्रदेश
13 जून 2026, 3:34 am (137 दिन पहले)· 1

छह वर्षों में 114 काले हिरणों का शिकार, नोएडा के आरटीआई कार्यकर्ता ने उजागर किए आंकड़े, आंध्र प्रदेश सबसे ऊपर

नोएडा के आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. रंजन तोमर द्वारा हासिल आंकड़ों के मुताबिक 2020 से अप्रैल 2026 तक देशभर में काले हिरण के शिकार से जुड़ी 114 घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें सबसे ज्यादा मामले आंध्र प्रदेश में सामने आए।

वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर देश में किए जाने वाले बड़े-बड़े दावों के बीच एक चिंताजनक हकीकत सामने आई है। मूल रूप से नोएडा के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. रंजन तोमर ने सूचना का अधिकार कानून के तहत जो जानकारी हासिल की है, उसके अनुसार वर्ष 2020 से अप्रैल 2026 के बीच पूरे देश में काले हिरण (ब्लैकबक) के शिकार या अवैध शिकार से जुड़ी कुल 114 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें इन दुर्लभ जीवों की जान गई।

ये आंकड़े वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), भारत सरकार के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय की ओर से दिए गए हैं। ब्यूरो ने यह भी बताया कि यह जानकारी अलग-अलग राज्यों के वन विभागों और पुलिस विभागों से मिली सूचनाओं को जोड़कर तैयार की गई है। काला हिरण संरक्षित प्रजातियों में आता है और उसका शिकार करना एक गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाता है।

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सबसे ज्यादा घटनाएं आंध्र प्रदेश में

डॉ. रंजन तोमर ने लोकल मीडिया से बातचीत में बताया कि आरटीआई से मिले आंकड़ों के मुताबिक काले हिरणों की मौत और शिकार से जुड़े सबसे ज्यादा मामले आंध्र प्रदेश में सामने आए हैं। हालांकि कार्रवाई के मामले में मध्य प्रदेश सबसे आगे रहा, जहां इस दौरान सबसे अधिक 12 आरोपी पकड़े गए। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 7, कर्नाटक में 6, महाराष्ट्र में 4, झारखंड में 4 और बिहार में 1 आरोपी की गिरफ्तारी दर्ज हुई। ये आंकड़े बताते हैं कि कई राज्यों में शिकार की वारदातें सामने आने के बावजूद आरोपियों तक पहुंचना और उन्हें गिरफ्तार करना आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। उनका मानना है कि वन्यजीव अपराधों की जांच और निगरानी का ढांचा और मजबूत किए जाने की जरूरत है।

जैव विविधता की अहम कड़ी है काला हिरण

डॉ. तोमर का कहना है कि काला हिरण सिर्फ एक वन्यजीव नहीं, बल्कि देश की जैव विविधता और प्राकृतिक धरोहर की एक अहम कड़ी है। इसके बाद भी लगातार सामने आ रही शिकार की घटनाएं गहरी चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि जब वन्यजीव संरक्षण के कानून मौजूद होने के बावजूद छह साल में 114 काले हिरणों की मौत शिकार या उससे जुड़ी घटनाओं में हुई है, तो यह पूरी व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। उनके मुताबिक ये आंकड़े यह भी साफ करते हैं कि वन्यजीव अपराधों को रोकने के लिए राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल, तकनीकी निगरानी और असरदार खुफिया तंत्र विकसित करना बेहद जरूरी है।

डॉ. तोमर ने यह भी कहा कि वन्यजीवों की रक्षा करना केवल सरकारी एजेंसियों की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर नागरिक की भी इसमें अहम भूमिका है। उन्होंने काले हिरण समेत दूसरी संरक्षित प्रजातियों के शिकार से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा, तेज जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग रखी। उनका कहना है कि जब तक आम लोगों में जागरूकता नहीं बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक वन्यजीव अपराधों पर असरदार रोक लगा पाना मुश्किल बना रहेगा। आरटीआई से सामने आए ये आंकड़े एक बार फिर यह सवाल खड़ा करते हैं कि देश की संरक्षित वन्यजीव संपदा को बचाने के लिए आखिर और कितने ठोस कदम उठाने की दरकार है।

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