भारत का बुनियादी ढांचा अब केवल कंक्रीट के जंगलों तक सीमित नहीं है। देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई को जोड़ने वाले 1300 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। यह एक्सप्रेसवे भारत के कई महत्वपूर्ण राज्यों से होकर गुजरता है, जिससे माल ढुलाई और लॉजिस्टिक की लागत में भारी कमी आएगी। दिल्ली से मुंबई के बीच का सफर पहले के मुकाबले लगभग आधा रह जाएगा, जो व्यापार और वाणिज्य के लिए एक बड़ी क्रांति है। इसके अलावा, जिन ग्रामीण और पिछड़े इलाकों से यह हाईवे गुजर रहा है, वहां भी रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। यह एक ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसमें तेज रफ्तार और आधुनिक तकनीक के साथ-साथ प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण का भी पूरा ध्यान रखा गया है। भारत के इंजीनियरों ने इस क्लोज्ड एक्सेस हाईवे के निर्माण में एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो पूरे एशिया में अब तक किसी अन्य देश ने नहीं की थी। यह एक्सप्रेसवे अपने रास्ते में पड़ने वाले दो प्रमुख संरक्षित वनों और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरता है। ऐसे में जंगली जानवरों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती थी, जिसे एक बेहद अनोखे तरीके से सुलझाया गया है।
वन्यजीवों के लिए एशिया का पहला अनोखा रास्ता
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसके खास पशु ओवरपास हैं। भारत एशिया का पहला ऐसा देश बन गया है, जिसने जंगली जानवरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के विशेष पुलों का निर्माण किया है। ये पुल कंक्रीट के किसी सामान्य ढांचे की तरह नहीं दिखते। इनका डिजाइन इस तरह से तैयार किया गया है कि ये पूरी तरह से प्राकृतिक जंगल का हिस्सा महसूस हों। इन ओवरपास के ऊपर प्राकृतिक घास, छोटे पौधे और पेड़ लगाए गए हैं। जमीन को बिल्कुल उसी तरह आकार दिया गया है जैसा कि जंगल में होता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि बाघ, तेंदुए, हिरण और अन्य जंगली जानवर बिना किसी घबराहट के इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकें। जब ये बेजुबान जानवर पुल के ऊपर से गुजरते हैं, तो उन्हें एहसास भी नहीं होता कि उनके ठीक नीचे से गाड़ियां फर्राटे भर रही हैं। यह जानवरों के लिए एक सुरक्षित कॉरिडोर का काम करता है, जो उनके प्राकृतिक आवास को दो हिस्सों में बंटने से रोकता है।
शोरगुल से बचाने के लिए खास इंतजाम
वन्यजीवों को सुरक्षित रास्ता देना ही काफी नहीं था। इंजीनियरों के सामने दूसरी बड़ी चुनौती गाड़ियों का शोर थी। अगर तेज रफ्तार गाड़ियों की आवाज और उनका शोर जानवरों तक पहुंचता, तो वे डर जाते और इन ओवरपास का इस्तेमाल करने से कतराते। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए ओवरपास के दोनों ओर विशेष नॉइज बैरियर (ध्वनि अवरोधक) लगाए गए हैं। ये बैरियर ट्रैफिक के शोर को काफी हद तक कम कर देते हैं और जानवरों तक नहीं पहुंचने देते। इस शानदार तकनीक की वजह से जंगल की शांति बनी रहती है। जानवर बिना किसी डर या परेशानी के आराम से एक जंगल से दूसरे जंगल में जा सकते हैं। यह कदम साबित करता है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों एक साथ चल सकते हैं।
फॉरगिविंग हाईवे का सिद्धांत और चालकों की सुरक्षा
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे केवल जानवरों के लिए ही सुरक्षित नहीं है, बल्कि इस पर सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। इस हाईवे को फॉरगिविंग हाईवे के सिद्धांत पर तैयार किया गया है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी चालक से गलती हो भी जाए, तो जानमाल का नुकसान कम से कम हो। इसके लिए हाईवे के बीच में लगभग 21 मीटर चौड़ा घास वाला हिस्सा (मीडियन) बनाया गया है। तेज रफ्तार में गाड़ी चलाते समय अगर कोई ड्राइवर नियंत्रण खो देता है, तो उसकी गाड़ी इसी घास वाले चौड़े हिस्से में जाकर रुक जाएगी। इससे वह दूसरी तरफ से आ रही तेज रफ्तार गाड़ियों से सीधे टकराने से बच जाएगा। यह डिजाइन सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों की आशंका को काफी हद तक कम कर देता है। भारत में हादसों को रोकने के लिए यह एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव है।
भविष्य की चुनौतियों के लिए भी पूरी तरह तैयार
इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को सिर्फ आज की जरूरतों को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है, बल्कि भविष्य के लिए भी इसे तैयार रखा गया है। वर्तमान में यह एक्सप्रेसवे आठ लेन का है, जिसमें दोनों तरफ चार-चार लेन हैं। लेकिन इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका विजनरी डिजाइन है। आने वाले समय में अगर ट्रैफिक का दबाव बढ़ता है, तो इसे आसानी से 12 लेन तक बढ़ाया जा सकता है। सबसे अहम बात यह है कि इस विस्तार के लिए सरकार को आसपास की कोई नई जमीन अधिग्रहित करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। भविष्य में विस्तार के लिए जरूरी जगह पहले से ही इस डिजाइन का हिस्सा है। कुल मिलाकर, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं है। यह आधुनिक भारत के उस इंफ्रास्ट्रक्चर की एक मिसाल है, जहां देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने के साथ-साथ पर्यावरण और बेजुबान जानवरों की सुरक्षा का भी पूरा सम्मान किया गया है। यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि भारत अब दुनिया के सामने टिकाऊ विकास का एक बेहतरीन मॉडल पेश कर रहा है।



















