पश्चिम बंगाल की हवा को साफ करने के लिए एक अनूठी और अनोखी योजना सामने आई है, जिसके तहत आने वाले दिनों में पानी की फुहारों में गुलाब जल मिलाने की तैयारी की जा रही है। शहर की बिगड़ी हुई आबोहवा और लगातार गिरते वायु गुणवत्ता सूचकांक को सुधारने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरीके से न केवल धूल के कणों को दबाने में मदद मिलेगी, बल्कि आसपास का पूरा वातावरण भी महक उठेगा। हालांकि इस योजना के सामने आते ही पर्यावरण विशेषज्ञों की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं।
गुलाब जल छिड़कने की योजना का ऐलान
पश्चिम बंगाल की नगर मामलों और शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक विस्तृत पोस्ट के माध्यम से इस पूरी योजना की जानकारी सार्वजनिक की है। उन्होंने बताया कि कोलकाता नगर निगम यानी KMC राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देशों के तहत शहर के तमाम संवेदनशील इलाकों में नियमित रूप से पानी की महीन फुहारें यानी मिस्ट स्प्रे का छिड़काव कर रहा है। यह विशेष अभियान खासतौर पर उन इलाकों में केंद्रित है जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI का स्तर लगातार सामान्य से ऊपर बना रहता है। मंत्री के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य लक्ष्य हवा में तैर रहे हानिकारक धूल कणों की मात्रा को कम करना और सूचकांक को नियंत्रण में रखना है। इसी विशेष अभियान के तहत अब काली पूजा समेत देश के अन्य बड़े त्योहारों और महत्वपूर्ण अवसरों पर मिस्ट स्प्रे के पानी में गुलाब जल मिलाने का निर्णय लिया गया है। उनका मानना है कि इससे न केवल धूल पर लगाम लगेगी, बल्कि पूरा इलाका एक भीनी-भीनी खुशबू से तरोताजा महसूस होगा।
लंदन की आबोहवा से तुलना और हैरान करने वाले आंकड़े
इस योजना के पीछे की प्रेरणा के बारे में बात करते हुए अग्निमित्रा पॉल ने अपनी हालिया लंदन यात्रा का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अपनी उस यात्रा के दौरान उन्होंने वहां के कई हिस्सों में AQI का स्तर 10 से भी नीचे और कुछ जगहों पर तो लगभग 1 के आसपास दर्ज होते हुए देखा था। उनके लिए यह एक बेहद हैरान करने वाला अनुभव था, क्योंकि कोलकाता में हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। मंत्री के मुताबिक कोलकाता का AQI साल के अधिकांश महीनों में 200 के नीचे भी बहुत मुश्किल से पहुंच पाता है। उन्होंने शहर की इस मौजूदा स्थिति को स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बताया और स्पष्ट किया कि प्रशासन अपनी सीमित क्षमताओं के बावजूद इसे बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है।
पर्यावरणविदों की कड़ी आपत्ति और मूल समस्याओं पर सवाल
मंत्री के इस गुलाब जल वाले प्रस्ताव पर पर्यावरणविदों की तरफ से कड़ी आपत्ति जताई गई है। प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोमेंद्र मोहन घोष ने इस कदम को सिरे से खारिज करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने रविवार को अपने बयान में दो टूक कहा कि कोलकाता को किसी भी तरह के परफ्यूम या खुशबू की नहीं, बल्कि प्रदूषण से स्थायी मुक्ति दिलाने के लिए ठोस और जमीनी कदमों की जरूरत है। घोष का कहना है कि पानी में गुलाब जल मिलाकर छिड़कने से भले ही कुछ पलों के लिए अच्छी खुशबू महसूस होने लगे, लेकिन इससे प्रदूषण की असल और गहरी समस्या का कोई समाधान नहीं निकलने वाला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गुलाब जल की महक चंद मिनटों में हवा में उड़कर गायब हो जाएगी, जबकि जरूरत इस बात की है कि सीधे तौर पर प्रदूषण फैलाने वाले मुख्य स्रोतों पर कड़ा प्रहार किया जाए।
प्रदूषण के असली कारणों पर लगाम लगाने की मांग
पर्यावरणविद् सोमेंद्र मोहन घोष ने शहर की आबोहवा को जहरीला बना रहे वास्तविक कारणों की ओर इशारा करते हुए पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सड़कों पर दौड़ने वाली पुरानी गाड़ियां PM2.5, PM10 और खतरनाक ब्लैक कार्बन के भारी उत्सर्जन के लिए सीधे तौर पर उत्तरदायी हैं। इसके अलावा उन्होंने सड़क किनारे लगने वाली खाने-पीने की दुकानों और ठेलों पर लकड़ी या कोयले से खाना पकाने की पुरानी प्रथा पर पूरी तरह रोक लगाने की सख्त मांग उठाई। घोष का यह सुझाव है कि सरकार को छोटे और मध्यम दुकानदारों को आर्थिक सहायता और जरूरी संसाधन मुहैया कराने चाहिए, ताकि वे एलपीजी या बिजली से चलने वाले साफ-सुथरे कुकिंग सिस्टम को आसानी से अपना सकें। साथ ही उन्होंने पूरे महानगर में लगभग 100 बड़े वॉटर कैनन तैनात करने का प्रस्ताव भी रखा है, जिनके जरिए सड़कों, फ्लाईओवर और धूल से पटे रास्तों की नियमित धुलाई की जा सकेगी। उनके मुताबिक इस प्रक्रिया से हवा में तैर रहे धूल के कण जमीन पर बैठ जाएंगे और पेड़ों की पत्तियों पर जमी हुई धूल भी आसानी से साफ हो जाएगी।
मौजूदा वायु गुणवत्ता और विभिन्न इलाकों के आंकड़े
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रविवार की दोपहर काली पूजा और दिवाली के ठीक पहले कोलकाता का औसत AQI यानी PM2.5 स्तर 165 दर्ज किया गया था। केंद्रीय बोर्ड के निर्धारित मानकों के अनुसार 101 से 200 के बीच का यह स्कोर मध्यम श्रेणी के अंतर्गत आता है। हालांकि पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी WBPCB के अलग-अलग मॉनिटरिंग स्टेशनों पर दर्ज किए गए आंकड़ों में शहर के भीतर भारी भिन्नता देखने को मिली है। आगामी 7 नवंबर को कोलकाता का कुल AQI उछलकर सीधे 232 तक पहुंच गया था, जो सीधे तौर पर खराब श्रेणी में गिना जाता है। इस अवधि के दौरान जादवपुर और बिधाननगर जैसे इलाकों में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से काफी ऊपर रिकॉर्ड किया गया। इसके विपरीत बालीगंज, फोर्ट विलियम, रवींद्र भारती विश्वविद्यालय, रवींद्र सरोवर और विक्टोरिया जैसे क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता किसी तरह मध्यम श्रेणी में बनी रही। ऐसे में यह सवाल अपनी जगह पूरी तरह कायम है कि हवा को महकाने का यह प्रयोग अंततः कितना सफल साबित होगा।
























