दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में आपसी रंजिश और निजी संबंधों को लेकर उपजा तनाव उस समय एक बड़ी आपराधिक घटना में बदल गया, जब परिसर के भीतर एक छात्र पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया गया। इस पूरी हिंसा की जड़ एक छात्रा से जुड़ी दोस्ती को बताया जा रहा है, जिसे लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई और फिर मामला खून-खराबे तक जा पहुंचा।
घटना की शुरुआत 5 नवंबर को दोपहर करीब 3 बजे JNU कैंपस के भीतर स्थित बराक हॉस्टल के कमरा नंबर 119 में हुई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पीड़ित छात्र की पहचान सौरभ के रूप में हुई है, जो विश्वविद्यालय में भाषा विषय का द्वितीय वर्ष का छात्र है। उस पर अजय नामक छात्र ने तीखे हथियार से ताबड़तोड़ प्रहार किए।
आरोपी अजय को सौरभ और एक छात्रा के बीच बढ़ती नजदीकियों पर आपत्ति थी, जो इस खूनी संघर्ष का मुख्य कारण बनी। विवाद बढ़ने पर आरोपी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सौरभ पर कई वार किए, जिससे उसके सिर, चेहरे, हाथों और आंखों पर गंभीर जख्म बन गए।
हमले के फौरन बाद लहूलुहान हालत में सौरभ को फौरी तौर पर दिल्ली के AIIMS ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने के लिए सर्जरी की। चिकित्सीय जांच में यह बात सामने आई कि चेहरे और आंख पर लगे गहरे घावों के कारण उसकी दाईं आंख की दृष्टि हमेशा के लिए समाप्त हो गई है। शनिवार शाम तक पीड़ित का अस्पताल में मेडिकल ऑब्जर्वेशन और इलाज जारी था।
पुलिस अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस हिंसक झड़प में आरोपी अजय को भी कुछ चोटें आईं। अजय विश्वविद्यालय में पोस्टग्रेजुएट कोर्स की पढ़ाई कर रहा है। मारपीट के इस पूरे घटनाक्रम में कुल चार छात्र जख्मी हुए हैं, जिनमें अन्य तीन छात्र भी शामिल हैं जो बीच-बचाव या हाथापाई की चपेट में आ गए।
घटना के तुरंत बाद पीड़ित छात्र की महिला मित्र ने आगे आकर पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दी। इस शिकायत के आधार पर वसंत कुंज उत्तर थाने की पुलिस ने शुक्रवार को भारतीय दंड संहिता और संबंधित कानूनों के तहत हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की।
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने मीडिया को बताया कि पुलिस मामला दर्ज करके तमाम पहलुओं और साक्ष्यों की गहनता से पड़ताल कर रही है। हालांकि, शनिवार शाम तक इस मामले में किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी और पुलिस दबिश दे रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस गंभीर अनुशासनहीनता पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासनिक कार्रवाई की है। प्रॉक्टोरियल जांच पूरी होने तक आरोपी छात्रों के कैंपस में प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है ताकि शैक्षणिक माहौल सुरक्षित रहे।
JNU परिसर के अंदर इस तरह की हिंसक वारदात सामने आने के बाद छात्रों की सुरक्षा और आपसी सौहार्द को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस का कहना है कि जांच मुकम्मल होने के बाद ही इस बात का पूरी तरह खुलासा हो सकेगा कि इस हमले में अन्य किन लोगों की संलिप्तता थी।



















