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दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में खुलेंगे छात्राओं के लिए हॉस्टल, नए डूसू अध्यक्ष ने की घोषणादिल्ली
20 सित॰ 2026, 2:18 pm (40 दिन पहले)· 0

दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में खुलेंगे छात्राओं के लिए हॉस्टल, नए डूसू अध्यक्ष ने की घोषणा

डूसू अध्यक्ष पद का चुनाव 24,576 वोटों से जीतने के बाद यश डबास ने सत्य निकेतन हादसे की पृष्ठभूमि में सभी पीजी और हॉस्टलों के अनिवार्य सेफ्टी ऑडिट और हर कॉलेज में गर्ल्स हॉस्टल बनाने की घोषणा की है।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद छात्र राजनीति का केंद्र अब वादों को धरातल पर उतारने की रणनीति पर टिक गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बैनर तले अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने वाले यश डबास ने पदभार संभालने के साथ ही अपनी कार्ययोजना सार्वजनिक कर दी है। चुनाव में कुल 24,576 मत हासिल कर जीत दर्ज करने वाले नए अध्यक्ष ने साफ किया है कि उनका पहला और सबसे अहम दायित्व विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और रहने की व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

सत्य निकेतन हादसे के बाद पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा जांच

दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में एक पांच मंजिला इमारत के अचानक गिर जाने से सात लोगों की जान चली गई थी, जिनमें पांच छात्र शामिल थे। इस दर्दनाक हादसे ने विश्वविद्यालय के आसपास चल रहे निजी पीजी और हॉस्टलों के निर्माण मानकों की गंभीर स्थिति को उजागर किया था। यश डबास ने स्पष्ट किया है कि उनके कार्यकाल का सबसे पहला कदम कैंपस और उसके नजदीकी क्षेत्रों में मौजूद सभी किराए के मकानों, हॉस्टलों और पीजी का अनिवार्य सेफ्टी ऑडिट कराना होगा। छात्र प्रतिनिधियों का मानना है कि पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों से आने वाले युवाओं की जान को असुरक्षित इमारतों के जोखिम में नहीं छोड़ा जा सकता, इसलिए सुरक्षा प्रमाणन की व्यवस्था लागू की जाएगी।

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हर कॉलेज में छात्राओं के लिए आवासीय सुविधा का विस्तार

विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं के लिए रहने की उचित जगह मिलना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। नए छात्र संघ नेतृत्व ने इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाने की बात कही है। आंकड़ों का हवाला देते हुए यश डबास ने रेखांकित किया कि वर्ष 2015 के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय में कुल हॉस्टल बेड की संख्या केवल 5,700 थी, जो लगातार प्रयासों के चलते अब बढ़कर 12,000 से अधिक हो चुकी है। इस क्षमता को और आगे ले जाते हुए उन्होंने वादा किया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रत्येक संबद्ध कॉलेज में छात्राओं के लिए अलग गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण कराया जाएगा, ताकि महिला विद्यार्थियों को दूरदराज या असुरक्षित इलाकों में महंगे किराए के कमरे न तलाशने पड़ें।

कार्यकर्ताओं को जीत का श्रेय और विपक्षी छात्र संगठन पर राजनीतिक तंज

अपनी चुनावी कामयाबी पर बात करते हुए यश डबास ने इस जीत को संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं और आम छात्रों के साझे संघर्ष का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष के पूरे 365 दिन छात्रों, महिलाओं और युवाओं के हक में जमीन पर उतरकर काम करने वाले साथी ही इस सफलता के असली हकदार हैं। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की छात्र राजनीति में सक्रियता पर कटाक्ष किया। उन्होंने टिप्पणी की कि विपक्षी दल के बड़े नेता छात्र राजनीति में जितना अधिक हस्तक्षेप करेंगे, उनकी छात्र इकाई एनएसयूआई की स्थिति छात्र समुदाय के बीच उतनी ही कमजोर होती चली जाएगी।

सवाल-जवाब

डूसू अध्यक्ष पद पर किसने जीत हासिल की और उन्हें कितने वोट मिले?
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के यश डबास ने 24,576 वोटों के साथ डूसू अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की।
सत्य निकेतन हादसे में कितने लोगों की जान गई थी?
सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला इमारत ढहने से सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच छात्र शामिल थे।
निजी पीजी और हॉस्टलों के लिए नए छात्र संघ अध्यक्ष ने क्या घोषणा की है?
विश्वविद्यालय के आसपास स्थित सभी हॉस्टलों और निजी पीजी का अनिवार्य सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा।
दिल्ली विश्वविद्यालय में 2015 में कितने हॉस्टल बेड थे और अब कितने हैं?
वर्ष 2015 में कुल 5,700 हॉस्टल बेड थे, जो एबीवीपी के प्रयासों के बाद बढ़कर 12,000 से अधिक हो चुके हैं।
कॉलेजों में छात्राओं के आवास को लेकर क्या वादा किया गया है?
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रत्येक कॉलेज में छात्राओं के लिए अलग गर्ल्स हॉस्टल के निर्माण का वादा किया गया है।
यश डबास ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बारे में क्या टिप्पणी की?
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी छात्र राजनीति में जितने सक्रिय होंगे, एनएसयूआई का ग्राफ उतनी ही तेजी से नीचे गिरेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·39 दिन पहले

शिक्षा केंद्रों के आसपास छात्र आवास और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा केवल विश्वविद्यालय का आंतरिक मामला नहीं, बल्कि शहरी शासन और सार्वजनिक नीति की बड़ी चुनौती है। जब उच्च शिक्षण संस्थानों में सीटों का विस्तार होता है, तो आवासीय क्षमता का उसी अनुपात में न बढ़ना निजी और अनियंत्रित पीजी बाज़ार पर निर्भरता बढ़ाता है, जहाँ अक्सर भवन निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती है। हर कॉलेज में छात्राओं के लिए हॉस्टल निर्माण का संकल्प महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम है, लेकिन इसे ज़मीन पर उतारने के लिए नगर निगम के साथ ठोस समन्वय और स्थायी बजटीय प्रावधान ज़रूरी होंगे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·39 दिन पहले

छात्र संघ चुनावों के परिणाम यह दर्शाते हैं कि केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय स्थानीय मुद्दों और सुरक्षा जैसे जमीनी विषयों पर ध्यान केंद्रित करना चुनावी सफलता की कुंजी है। हालाँकि, हर कॉलेज में महिला हॉस्टल का निर्माण और निजी पीजी का अनिवार्य सेफ्टी ऑडिट कराना केवल छात्र संघ के अधिकार क्षेत्र में नहीं है—इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और नागरिक निकायों (MCD) के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता होगी। आगामी महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया नेतृत्व इन दावों को प्रशासनिक स्तर पर कितनी तेजी से बुनियादी ढांचे और नीतियों में बदल पाता है।

Amit Patel@amit-patel·39 दिन पहले

अर्जुन के प्रशासनिक तालमेल के बिंदु के साथ ही इसका वित्तीय और आर्थिक पहलू भी बेहद अहम है। हर संबद्ध कॉलेज में गर्ल्स हॉस्टल बनाने के लिए भारी पूंजीगत व्यय (CapEx) और विशेष बजटीय आवंटन की दरकार होगी, जिसके लिए संभवतः सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) या संस्थागत वित्तपोषण का सहारा लेना पड़े। वहीं दूसरी ओर, निजी पीजी का अनिवार्य सेफ्टी ऑडिट विश्वविद्यालय के आसपास के असंगठित रेंटल रियल एस्टेट बाज़ार को सीधे प्रभावित करेगा। सुरक्षा मानकों को पूरा करने की अनुपालन लागत बढ़ने से या तो छात्रों के निजी किराए में बढ़ोतरी हो सकती है, या फिर यह संगठित को-लिविंग कंपनियों के लिए बाज़ार में विस्तार का नया रास्ता खोलेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·39 दिन पहले

सत्य निकेतन जैसी दर्दनाक इमारत दुर्घटनाएं स्पष्ट करती हैं कि छात्र सुरक्षा केवल राजनीतिक दावों का विषय नहीं, बल्कि कठोर कानूनी व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा नियमों के अनुपालन का मामला है। अनधिकृत निजी पीजी और हॉस्टलों का अनिवार्य सेफ्टी ऑडिट सुनिश्चित कराने के लिए नगर निगम और स्थानीय पुलिस के साथ कानूनी तालमेल बेहद जरूरी होगा। यदि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर संपत्ति मालिकों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई और जवाबदेही तय नहीं की गई, तो ऐसे वादे महज घोषणाओं तक सीमित रह जाएंगे। छात्राओं के लिए सुरक्षित आवासीय व्यवस्था अपराध नियंत्रण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·39 दिन पहले

छात्र आवास और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों का सीधा संबंध शासन की प्रशासनिक इच्छाशक्ति से है। सत्य निकेतन जैसे हादसों को रोकने के लिए केवल सेफ्टी ऑडिट की घोषणा काफी नहीं होगी; नगर निगम, स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर एक पारदर्शी प्रमाणन और ग्रेडिंग तंत्र विकसित करना होगा। वहीं, सभी संबद्ध कॉलेजों में महिला छात्रावासों के निर्माण के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर भूमि आवंटन और बजट की समयबद्ध निगरानी जरूरी है। जब तक निजी हॉस्टल मालिकों के खिलाफ ठोस कानूनी जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के दावों को धरातल पर पूरी तरह लागू करना चुनौतीपूर्ण रहेगा।

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