पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में लगातार हो रही वर्षा के दौरान चिंगरीघाटा फ्लाईओवर पर दोपहिया वाहनों के असंतुलित होकर गिरने की घटनाओं ने भारी विवाद खड़ा कर दिया है। इंटरनेट पर व्यापक रूप से साझा की जा रही एक वीडियो क्लिप में तीन मोटरसाइकिलें एक के बाद एक मार्ग पर फिसलती नजर आ रही हैं। त्योहार के अवसर पर सड़क की ऊपरी परत पर तैयार किए गए रंग-बिरंगे चित्रों को इस फिसलन का कारण बताया जाने लगा, जिससे सड़क उपयोगकर्ताओं की हिफाजत से जुड़े नए सवाल पैदा हो गए हैं।
चिंगरीघाटा मार्ग पर दोपहर का घटनाक्रम
बिधाननगर ट्रैफिक पुलिस के अनुसार दोपहर लगभग 12:30 बजे उक्त फ्लाईओवर पर दो अलग-अलग दोपहिया वाहन अनियंत्रित होकर सड़क पर गिर पड़े। प्राथमिक ब्योरे के मुताबिक इन दुर्घटनाओं में सवार व्यक्तियों को कोई जानलेवा या गंभीर चोट नहीं पहुंची। गनीमत रही कि रफ्तार सीमित होने के कारण कोई बड़ा संकट पैदा नहीं हुआ, मगर इस प्रकरण के फौरन बाद राहगीरों ने हालिया सौंदर्यीकरण कार्य की उपयोगिता और गुणवत्ता पर ऐतराज जताना शुरू कर दिया।
रंगीन सजावट अथवा वर्षा का असर
ऑनलाइन मंचों पर कई नागरिकों का तर्क है कि उत्सव के लिए डामर पर चढ़ाई गई रासायनिक अथवा तेल आधारित सतह ने गीले मौसम में घर्षण पूरी तरह घटा दिया। वहीं अन्य तकनीकी पहलुओं पर गौर कर रहे जानकारों का ध्यान इस बात पर भी है कि क्या तेज मानसूनी फुहारों से सामान्य जलभराव हुआ था या फिर नई परतों ने ही दोपहिया पहियों की पकड़ ढीली की। फिलहाल तकनीकी पड़ताल पूरी हुए बिना केवल पेंट को ही जिम्मेदार ठहराने वाला कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं आया है।
मंत्रालय का रुख और तकनीकी जांच
पश्चिम बंगाल की शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने इस विषय में जानकारी दी कि घटनास्थल का मुआयना करने और कारणों की गहराई से पड़ताल करने के लिए तकनीकी दल भेजा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विशेषज्ञ रिपोर्ट में यह तथ्य पुष्ट हुआ कि सजावटी रंगों के उपयोग से चालकों की दृश्यता या टायरों की ग्रिप प्रभावित हो रही है, तो आम जनमानस की सुरक्षा के मद्देनजर तुरंत वैकल्पिक रास्ते अपनाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और आगे की दिशा
दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने प्राथमिक तौर पर केवल कलाकारी को दोष देने पर असहमति जताई। सुवेंदु अधिकारी ने सवालिया लहजे में कहा, “बिना मौके का मुआयना किए मुझे टिप्पणी क्यों करनी चाहिए?” प्रशासनिक अमले की पूरी तवज्जो अब मौके की भौतिक दशा, जल निकासी, टायरों के फिसलने के कोण और हालिया सजावट के रासायनिक असर की समग्र जांच रिपोर्ट तैयार करने पर टिकी है।



















