प्रवर्तन निदेशालय (ED) अपनी कार्यप्रणाली में एक बड़ा प्रशासनिक और ढांचागत बदलाव करने जा रहा है, जिससे वित्तीय अपराधों की जांच और कानूनी मुकदमों के निपटारे में तेजी लाई जा सके। बेंगलुरु में आयोजित 36वीं QCZO कॉन्फ्रेंस के दौरान ED निदेशक ने एक व्यापक रणनीति पेश की, जो देश भर में धन शोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच का तरीका पूरी तरह बदल देगी। इस नए एक्शन प्लान के तहत, प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के मामलों की जांच में लगने वाले समय को चार साल से घटाकर केवल 1.5 साल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, हर क्षेत्र के शीर्ष दस हाई-प्रोफाइल मामलों को चिन्हित कर छह से आठ महीने के भीतर उनकी अदालती सुनवाई पूरी कर सजा कराने की योजना बनाई गई है। जांच एजेंसी की इस कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की संख्या में 60 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की गई है, जिससे स्वीकृत पदों की संख्या बढ़कर 3,256 हो गई है। इसके साथ ही, 73,800 करोड़ रुपये से अधिक की जब्त संपत्तियों के कुशल प्रबंधन के लिए जियो-टैगिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा और 'प्रोजेक्ट प्रवर्तन भवन' के तहत 39 शहरों में आधुनिक कार्यालयों का निर्माण किया जाएगा। इस बड़े सुधार कार्यक्रम की रूपरेखा पर 13 सितंबर को IIM बेंगलुरु में आयोजित एक विशेष लीडरशिप और मैनेजमेंट वर्कशॉप में भी विस्तार से चर्चा की गई थी।
अधिकारियों की संख्या में 60 प्रतिशत का इजाफा और नए क्षेत्रों का गठन
प्रवर्तन निदेशालय के इस पुनर्गठन को भारत सरकार की ओर से आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है। लंबे समय से लंबित इस कैडर री-स्ट्रक्चरिंग के तहत स्वीकृत पदों की संख्या को 2,029 से बढ़ाकर सीधे 3,256 कर दिया गया है। कर्मचारियों की संख्या में इस 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी से जटिल वित्तीय मामलों की जांच में लगी टीमों पर काम का दबाव कम होगा और जांच की गुणवत्ता में सुधार होगा।
इस नई योजना के अंतर्गत पूरे देश में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए 50 PMLA जोन्स का गठन किया जाएगा। इसके साथ ही, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी FEMA से जुड़े मामलों के लिए पांच समर्पित जोन्स बनाए जाएंगे, जो दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख महानगरों में काम करेंगे। देश भर में एजेंसी की फंक्शनल यूनिट्स की संख्या को भी 131 से बढ़ाकर 241 करने का फैसला किया गया है। विभाग ने इस नए प्रशासनिक ढांचे को 1 जनवरी 2027 तक पूरी तरह से लागू करने का लक्ष्य रखा है।
मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच और सुनवाई में तेजी लाने का फॉर्मूला
अदालती कार्यवाही और जांच में होने वाली देरी को समाप्त करने के लिए ED ने एक सख्त समयसीमा तय की है। अब जोनल प्रभारियों को बिना किसी अतिरिक्त कागजी कार्रवाई या लंबी चर्चा के सर्च ऑपरेशन और जब्ती जैसी प्रवर्तन कार्रवाइयों पर तुरंत फैसला लेने का अधिकार दिया गया है। इस त्वरित निर्णय प्रणाली से जांच की गति कई गुना बढ़ जाएगी।
इसके अतिरिक्त, प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यालय अपने अधिकार क्षेत्र के 10 सबसे महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल मामलों की पहचान करेगा। इन मामलों की अदालती सुनवाई को फास्ट-ट्रैक मोड पर चलाकर छह से आठ महीने के भीतर आरोपियों को सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, जो मामले 10 साल से अधिक समय से लंबित हैं, उनके लिए एक विशेष मॉनिटरिंग रजिस्टर तैयार किया जाएगा, जिसकी प्रगति की समीक्षा हर महीने संबंधित जोन के प्रमुख द्वारा व्यक्तिगत रूप से की जाएगी।
जब्त संपत्तियों की जियो-टैगिंग और 'प्रोजेक्ट प्रवर्तन भवन'
एजेंसी ने जब्त की गई अकूत संपत्तियों के पारदर्शी रख-रखाव और अपने कार्यालयों के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए भी ठोस कदम उठाए हैं। अब तक 76 मामलों में 73,800 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का रेस्टिट्यूशन यानी संपत्ति वापस लौटाने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। नई नियमावली के अनुसार, जब्त की गई सभी संपत्तियों की जियो-टैगिंग, उनका रचनात्मक कब्जा लेने और सरकारी मूल्यांकनकर्ता से उनकी कीमत का आकलन कराने का काम छह महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा।
दूसरी ओर, विभाग ने अपने खुद के कार्यालयों के निर्माण के लिए 'प्रोजेक्ट प्रवर्तन भवन' की शुरुआत की है। इस परियोजना के तहत देश के 39 प्रमुख शहरों में ED के अपने आधुनिक और सुरक्षित कार्यालय भवन तैयार किए जाएंगे। इसके लिए 31 मार्च 2029 तक की समयसीमा तय की गई है। बेंगलुरु की कॉन्फ्रेंस में जमीन अधिग्रहण की स्थिति, निर्माण कार्य की प्रगति और बाकी बचे कार्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने की तैयारियों की भी गहन समीक्षा की गई।














