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गैंगस्टर मंजीत महल के करीबी नफे सिंह उर्फ मंत्री की तिहाड़ जेल में मौत, 12 संगीन मामलों में था बंदभारत
26 अक्तू॰ 2026, 11:20 am (1 दिन पहले)· 1

गैंगस्टर मंजीत महल के करीबी नफे सिंह उर्फ मंत्री की तिहाड़ जेल में मौत, 12 संगीन मामलों में था बंद

मंजीत महल गिरोह के सक्रिय सदस्य नफे सिंह उर्फ मंत्री की तिहाड़ जेल में संदिग्ध दिल का दौरा पड़ने से जान चली गई, जिसकी आधिकारिक पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगी।

दिल्ली के बाहरी इलाकों और नजफगढ़ में संगठित अपराध की दुनिया में सक्रिय रहे नफे सिंह उर्फ मंत्री का तिहाड़ जेल के भीतर निधन हो गया। जेल नंबर 8 में बंद इस कैदी की प्राथमिक तौर पर मौत की वजह दिल का दौरा पड़ना सामने आई है, हालांकि मौत के वास्तविक चिकित्सीय कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। नफे सिंह कुख्यात मंजीत महल गिरोह का एक बेहद सक्रिय सदस्य था और उसके खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के साथ पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी कई संगीन मुकदमे दर्ज थे।

ढाई दशक से आपराधिक गतिविधियों में था शामिल

मूल रूप से दिल्ली के घुम्मनहेड़ा गांव का निवासी नफे सिंह लंबे समय से अपराध जगत से जुड़ा हुआ था। पुलिस अभिलेखों में उसका नाम सबसे पहले वर्ष 1998 में दर्ज किया गया था, जिसके बाद वह लगातार आपराधिक वारदातों में लिप्त होता चला गया। नजफगढ़ और बाहरी दिल्ली के क्षेत्रों में सक्रिय मंजीत महल गिरोह में शामिल होकर उसने गिरोह के प्रभाव को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2015 और 2016 के दौरान जब दिल्ली में विरोधी गुटों के बीच खूनी गैंगवार की कई घटनाएं सामने आई थीं, तब उन वारदातों को अंजाम देने में नफे सिंह का नाम प्रमुखता से उभरा था। अपने विरोधी गिरोहों पर वर्चस्व स्थापित करने और पुरानी रंजिशें साधने के लिए उसने अपने साथियों के साथ मिलकर कई हिंसक हमलों को अंजाम दिया।

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हत्या और आर्म्स एक्ट के दर्ज थे 12 गंभीर मामले

नफे सिंह का आपराधिक रिकॉर्ड काफी लंबा था, जिसमें कत्ल और जानलेवा हमले जैसे अति गंभीर अपराध शामिल थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके ऊपर कुल 12 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। इन मुकदमों में तीन मामले सीधे तौर पर हत्या के थे, जबकि अन्य मामले हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज किए गए थे। इलाके में अपनी दहशत फैलाने के लिए वह आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करने से भी नहीं हिचकता था।

स्पेशल सेल की गिरफ्त में आया था 2017 में

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नफे सिंह की तलाश में लगातार दबिश देने के बाद फरवरी 2017 में उसे ख्याला इलाके से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की थी। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उसके कब्जे से एक.32 बोर की अवैध पिस्टल और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए थे। इस गिरफ्तारी के बाद से ही वह न्यायिक हिरासत में तिहाड़ की जेल नंबर आठ में बंद चल रहा था, जहां अब उसकी मौत की खबर सामने आई है।

सवाल-जवाब

नफे सिंह उर्फ मंत्री कौन था?
वह दिल्ली के घुम्मनहेड़ा का रहने वाला एक अपराधी था, जो कुख्यात मंजीत महल गैंग से सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था।
तिहाड़ जेल में उसकी मौत कैसे हुई?
शुरुआती तौर पर मौत की वजह दिल का दौरा पड़ना बताई गई है, हालांकि असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही स्पष्ट होगी।
नफे सिंह पर कितने आपराधिक मामले दर्ज थे?
उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत कुल 12 संगीन मामले दर्ज थे, जिनमें 3 हत्या के केस शामिल थे।
उसे कब और कहां से गिरफ्तार किया गया था?
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने फरवरी 2017 में ख्याला इलाके से उसे .32 बोर की पिस्टल और पांच कारतूसों के साथ गिरफ्तार किया था।
वह पहली बार पुलिस रिकॉर्ड में कब आया था?
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक नफे सिंह का नाम सबसे पहले वर्ष 1998 में अपराध से जुड़े मामलों में दर्ज हुआ था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·8 घंटे पहले

तिहाड़ जैसी जेल में दिल का दौरा पड़ना और तुरंत मौत हो जाना थोड़ा अजीब सा लगता है, मामला कुछ और भी हो सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

तिहाड़ के अंदर दिल का दौरा पड़ना और वो भी इतने खतरनाक कैदी को, थोड़ा अजीब सा लगता है।

Nyra Kaif@nyra-kaif·1 दिन पहले

अर्जुन, तिहाड़ के अंदर ये सब होना अजीब तो है ही, आजकल जेलों में बंद कैदियों की फिटनेस और हेल्थ ट्रेंड्स पर भी सवाल उठने लगे हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

मुझे अच्छे से याद है जब 2017 में नजफगढ़ और बाहरी दिल्ली में इस गैंगवार का खौफ चरम पर था, तब इलाके के लोग शाम होते ही घरों में दुबक जाते थे। तिहाड़ के अंदर इस तरह संदिग्ध हालात में मौत होना जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान छोड़ जाता है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

रोहन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। 2017 में नजफगढ़ और आउटर दिल्ली में इनका आतंक वाकई बहुत ज्यादा था। जेल के अंदर ऐसी मौत होना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल तो खड़ा करती ही है।

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