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गाजियाबाद के पुराने सुनहरे दिन लौटेंगे, 286 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहरों के कायाकल्प की तैयारीउत्तर प्रदेश
22 जुल॰ 2026, 12:23 am (99 दिन पहले)· 1

गाजियाबाद के पुराने सुनहरे दिन लौटेंगे, 286 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहरों के कायाकल्प की तैयारी

गाजियाबाद नगर निगम ने शहर के तीन प्राचीन द्वारों और ऐतिहासिक टाउन हॉल को उनका पुराना गौरव लौटाने की बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के तहत इन सभी इमारतों का कायाकल्प और सौंदर्यीकरण किया जाएगा।

आज का गाजियाबाद भले ही एक बेहद आधुनिक, घनी आबादी वाला और व्यस्त महानगर बन चुका है, लेकिन इसका इतिहास सदियों पुराना है। करीब 286 वर्ष पहले यह पूरी बसावट महज चार दीवारों और विशाल प्रवेश द्वारों के भीतर ही सिमटी हुई थी। अब स्थानीय प्रशासन ने उस भूली-बिसरी भव्यता को वापस लाने का एक बड़ा फैसला किया है। इसके तहत शहर की पुरानी पहचान रहे प्राचीन द्वारों और ऐतिहासिक टाउन हॉल के संरक्षण का पूरा खाका तैयार किया गया है। नगर निगम प्रशासन अपनी इस नई पहल के माध्यम से न केवल ऐतिहासिक इमारतों को गिरने से बचाना चाहता है, बल्कि वह पुरानी पीढ़ी की यादों को ताज़ा करने और नई युवा पीढ़ी को उनके मूल इतिहास से गहराई से परिचित कराने की कोशिश कर रहा है। यह पूरी योजना शहर के सांस्कृतिक महत्व को फिर से स्थापित करने का एक ठोस प्रयास है।

मुगल काल से जुड़ी है शहर की नींव और कहानी

इस जगह का पुराना नाम गाजीउद्दीननगर हुआ करता था, जो बाद में बदलकर गाजियाबाद हो गया। इसे साल 1740 के करीब मुगल सम्राट मोहम्मद शाह के एक बेहद खास मंत्री गाजीउद्दीन ने बसाया था। उस दौर में बाहरी हमलों से बचाव और शहर की कड़ी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे इलाके को चार बड़े और मजबूत प्रवेश मार्गों से घेरा गया था। इनके नाम दिल्ली गेट, डासना गेट, सिहानी गेट और शाही गेट रखे गए थे। यही द्वार उस समय शहर की असली सीमा हुआ करते थे और व्यापार से लेकर आम लोगों की आवाजाही तक हर चीज़ इन्हीं रास्तों से होकर गुज़रती थी। आज भी पुराने शहर की सबसे घनी बसावट इन्हीं इलाकों के इर्द-गिर्द देखी जा सकती है। वक्त बदलने के साथ ही शाही गेट को एक नया नाम मिला और उसे वर्तमान में जवाहर गेट के तौर पर पहचाना जाने लगा।

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शहरीकरण की भेंट चढ़ गया एक प्राचीन द्वार

जैसे-जैसे समय बीता, आबादी तेजी से बढ़ी और आधुनिक विकास ने रफ्तार पकड़ी, इन सभी प्राचीन संरचनाओं पर काफी बुरा असर पड़ा। कभी पूरे शहर की हिफाजत करने वाले चार ऐतिहासिक द्वारों में से आज जमीनी स्तर पर सिर्फ तीन ही अपनी जगह पर मजबूती से खड़े हैं। इनमें दिल्ली गेट, डासना गेट और जवाहर गेट शामिल हैं। दुर्भाग्य से चौथा द्वार यानी सिहानी गेट अंधाधुंध शहरीकरण और दशकों की प्रशासनिक लापरवाही का शिकार होकर पूरी तरह नष्ट हो गया। अब सिहानी गेट का कोई भौतिक ढांचा मौजूद नहीं है, वह केवल स्थानीय बुजुर्गों की पुरानी कहानियों और इतिहास के पन्नों में ही जिंदा है। बचे हुए तीन द्वारों की हालत भी बहुत अच्छी नहीं थी और वे लंबे अरसे से उचित रखरखाव और मरम्मत की सख्त मांग कर रहे थे। इसी भारी आवश्यकता को करीब से देखते हुए अब नगर निगम ने बचे हुए ढांचे को सहेजने के लिए अहम कदम बढ़ाए हैं।

सौंदर्यीकरण के लिए शुरुआती सर्वे का काम पूरा

गाजियाबाद नगर निगम ने अपनी निर्माण शाखा और विशेषज्ञों के माध्यम से तीनों बचे हुए द्वारों के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण का बीड़ा उठाया है। वर्तमान में संबंधित अधिकारियों द्वारा किए गए शुरुआती विस्तृत सर्वे का काम पूरी तरह खत्म हो चुका है। इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐतिहासिक इमारतों की मरम्मत करते समय उनकी पुरानी वास्तुकला, नक्काशी या मूल बनावट के साथ बिल्कुल भी छेड़छाड़ न हो। पुरानी ईंटों, पारंपरिक शैली और असली डिजाइन को जस का तस रखते हुए इन्हें आधुनिक तकनीक से मजबूती प्रदान की जाएगी। प्रशासन को उम्मीद है कि इस बड़े बदलाव से शहर के पुराने हिस्से की रौनक वापस लौटेगी और यह स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह एक मुख्य आकर्षण का केंद्र बनेगा।

टाउन हॉल के लिए जारी हुआ निर्माण टेंडर

प्रवेश द्वारों के संरक्षण के अलावा शहर के एक अन्य ऐतिहासिक स्थल टाउन हॉल को भी नया रूप देने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने इस अहम प्रोजेक्ट को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी मुहिम को वैज्ञानिक तरीके से पूरा करने के लिए एक विशेषज्ञ धरोहर संरक्षण एजेंसी की मदद ली गई है। इसी एजेंसी ने एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाकर तैयार की है। उनके अनुसार टाउन हॉल के लिए टेंडर प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है और बहुत जल्द ही जमीनी स्तर पर इसका निर्माण कार्य दिखने लगेगा। यह पूरी परियोजना उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना' के तहत स्वीकृत हुई है और इसके लिए बाकायदा फंड भी आवंटित किया जा रहा है। प्रशासन का साफ मानना है कि इस कदम से युवा वर्ग अपने शहर की जड़ों, उसकी संस्कृति और प्राचीन गरिमा को बहुत करीब से समझ सकेगा।

सवाल-जवाब

गाजियाबाद शहर को मूल रूप से कब और किसने बसाया था?
गाजियाबाद (तब गाजीउद्दीननगर) को साल 1740 के आसपास मुगल बादशाह मोहम्मद शाह के मंत्री गाजीउद्दीन ने बसाया था।
गाजियाबाद के चार ऐतिहासिक गेट कौन-कौन से थे?
शहर की सुरक्षा के लिए बनाए गए चार ऐतिहासिक गेटों के नाम दिल्ली गेट, डासना गेट, सिहानी गेट और शाही गेट (जवाहर गेट) थे।
वर्तमान में गाजियाबाद के कितने ऐतिहासिक गेट बचे हैं?
वर्तमान में केवल तीन गेट बचे हैं—दिल्ली गेट, डासना गेट और जवाहर गेट, जबकि सिहानी गेट पूरी तरह नष्ट हो चुका है।
ऐतिहासिक द्वारों और टाउन हॉल का जीर्णोद्धार किस योजना के तहत हो रहा है?
इन ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण और जीर्णोद्धार 'मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना' के तहत किया जा रहा है।
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