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गाय-भैंस खरीदने जा रहे हैं तो पहले परखें ये 6 लक्षण, कभी नहीं होगा नुकसानराजस्थान
21 सित॰ 2026, 3:06 pm (4 दिन पहले)· 0

गाय-भैंस खरीदने जा रहे हैं तो पहले परखें ये 6 लक्षण, कभी नहीं होगा नुकसान

नया दुधारू पशु खरीदते समय केवल विक्रेता की बातों पर भरोसा करने के बजाय दूध की जांच, दांत, थन, नसों की बनावट और चाल की पूरी पड़ताल करके ही सौदा पक्का करें।

डेयरी व्यवसाय अथवा घरेलू उपयोग के लिए दुधारू मवेशी चुनते समय बरती गई थोड़ी सी भी लापरवाही खरीदार की जेब पर भारी पड़ सकती है। यदि बिना सोचे-समझे केवल बेचने वाले के दावों पर यकीन कर लिया जाए, तो हजारों रुपये का घाटा होना तय है। इसलिए किसी भी गाय अथवा भैंस की खरीदारी को अंतिम रूप देने से पहले उसके दूध देने की वास्तविक क्षमता, थनों की स्थिति, दांतों से उम्र की पहचान, शारीरिक बनावट और स्वभाव की बारीकी से जांच करना बेहद आवश्यक कदम है।

दूध निकालने की तीन बार जांच और लेवटी की बनावट

पशु की दुग्ध क्षमता का सही आकलन करने के लिए एक बार का दूध देखना काफी नहीं होता। सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि खरीदार लगातार तीन समय अपने हाथों से दूध निकालकर नापे। उदाहरण के तौर पर पहले दिन की शाम, अगले दिन की सुबह और फिर उसी दिन की शाम को दूध निकालें। इससे दूध की औसत मात्रा स्पष्ट हो जाती है। इसके साथ ही लेवटी यानी अयन और थनों की सेहत को भी भलीभांति परखना चाहिए। चारों थन एक समान आकार के होने चाहिए और उनके बीच बराबर दूरी बनी रहनी चाहिए। हल्के हाथों से थनों को टटोलकर देखें कि उनमें कोई सख्त गांठ, सूजन, लाली अथवा दर्द के लक्षण तो नहीं हैं, जो किसी बीमारी का संकेत हो सकते हैं।

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दूध की नसें और ब्यांत का सही चुनाव

पशु के पेट के निचले भाग से शुरू होकर लेवटी तक पहुंचने वाली दूध की नसों का अध्ययन करना अत्यधिक लाभकारी रहता है। यदि यह नसें त्वचा पर साफ उभरी हुई, मोटी और लहरदार यानी टेढ़ी-मेढ़ी नजर आती हैं, तो यह अच्छे दुधारू पशु का मुख्य लक्षण माना जाता है। इसके विपरीत, जिन मवेशियों की नसें सपाट, सीधी या बहुत पतली होती हैं, उनमें प्रायः दूध उत्पादन कम दर्ज किया जाता है। खरीदारी के समय ब्यांत का क्रम भी ध्यान में रखें। अनुभवी जानकारों के अनुसार दूसरे या तीसरे ब्यांत का पशु खरीदना सबसे फायदे का सौदा साबित होता है, क्योंकि इस अवधि में पशु अपने उत्पादन के चरम पर रहता है।

दांत देखकर उम्र का पता लगाना और स्वभाव की परख

मवेशी की सही आयु जानने का सबसे प्रामाणिक तरीका उसके निचले जबड़े के दांत देखना है। पशु का मुंह खोलकर देखें, यदि उसके निचले जबड़े में चार से छह स्थायी दांत मौजूद हैं, तो वह पूर्णतः युवा माना जाता है। बहुत अधिक घिसे हुए, कमजोर अथवा टूटे दांत यह दर्शाते हैं कि पशु वृद्ध हो चुका है और आगे चलकर उसकी दूध देने की क्षमता घट जाएगी। इसके अतिरिक्त पशु के व्यवहार को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उसकी पीठ पर स्नेह से हाथ फेरें और थनों को छूने का प्रयास करें। यदि पशु अत्यधिक बेचैन होता है, चिड़चिड़ापन दिखाता है, पैर चलाता है या अपरिचित व्यक्ति को पास नहीं आने देता, तो बाद में उसे पालना और दूध निकालना मुश्किल भरा हो सकता है।

शारीरिक ढांचा, 15 से 20 कदम की चाल और बछिया

उत्तम दुधारू पशु का शरीर आगे से पतला और पीछे से चौड़ा, यानी एक त्रिभुज के आकार जैसा दिखना चाहिए। उसकी त्वचा चमकदार, पतली और ढीली होनी चाहिए। आंखें पूरी तरह साफ व चमकीली दिखें और थूथन यानी नाक पर हल्की नमी बनी रहनी चाहिए। पशु को खूंटे से खोलकर कम से कम 15 से 20 कदम अवश्य चलाएं, ताकि पैरों का लंगड़ापन, चाल की कमजोरी अथवा खुरों के मुड़े होने का दोष सामने आ सके। खुर जरूरत से ज्यादा बड़े या टेढ़े न हों और उसका गोबर भी सामान्य बंधा हुआ होना चाहिए। इसके अलावा, यदि पशु के साथ मादा बच्चा यानी बछिया या कटिया हो, तो उसे प्राथमिकता दें, जिससे भविष्य में घर पर ही एक और दुधारू पशु तैयार हो सके।

सवाल-जवाब

पशु खरीदने से पहले कितनी बार दूध निकाल कर देखना चाहिए?
सौदा पक्का करने से पहले कम से कम तीन बार अपने हाथों से दूध निकालना चाहिए, जैसे पहली शाम, अगली सुबह और फिर शाम।
दुधारू पशु के दूध की नसों की बनावट कैसी होनी चाहिए?
पेट के निचले भाग से लेवटी तक जाने वाली नसें मोटी, उभरी हुई और टेढ़ी-मेढ़ी होनी चाहिए, जो अधिक दूध की पहचान हैं।
दांत देखकर युवा पशु की पहचान कैसे की जाती है?
जिस पशु के निचले जबड़े में चार से छह स्थायी दांत मौजूद हों, उसे जवान और उत्पादन के लिए उपयुक्त माना जाता है।
सौदा करने से पहले पशु को कितने कदम चलाकर देखना जरूरी है?
पशु को खूंटे से खोलकर कम से कम 15 से 20 कदम चलाकर देखना चाहिए ताकि लंगड़ापन और खुरों के दोष पकड़े जा सकें।
किस ब्यांत का दुधारू पशु खरीदना सबसे अच्छा माना जाता है?
पशुपालकों के अनुसार दूसरे या तीसरे ब्यांत का पशु खरीदना सबसे उपयुक्त और लाभकारी माना जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·3 दिन पहले

नायरा कैफ के रूप में, मेरा मानना है कि यह लेख पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक और व्यावहारिक उपभोक्ता गाइड में बदलने का एक बेहतरीन उदाहरण है। जिस तरह से इसमें तीन समय दूध निकालने और नसों की बनावट का जिक्र किया गया है, वह पाठकों को ठगी से बचाने के लिए बहुत जरूरी है। आज के समय में जब ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी स्टार्टअप्स तेज़ी से बढ़ रहे हैं, ऐसे रिलेटेबल और व्यावहारिक टिप्स डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पाठकों का भरोसा और एंगेजमेंट दोनों तेजी से बढ़ाते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

यह रिपोर्ट ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि नीति के उस अहम पहलू को छूती है जो अक्सर मुख्यधारा की बहसों से छूट जाता है। जब तक पशुपालन को अनौपचारिक व्यवसाय से जोड़कर देखा जाएगा, तब तक छोटे किसानों को आर्थिक जोखिम का सामना करना पड़ेगा। वैज्ञानिक और व्यावहारिक मानकों पर आधारित खरीद प्रक्रिया से ग्रामीण अंचलों में वित्तीय स्थिरता बढ़ेगी और नीतिगत स्तर पर पशुधन बीमा दावों में भी पारदर्शिता आ सकेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

पशुधन खरीदारी में वैज्ञानिक मूल्यांकन ग्रामीण क्षेत्रों में अनौपचारिक ऋण और साहूकारों पर निर्भरता को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जब किसान अनियोजित निवेश से बचेंगे, तो उनकी कार्यशील पूंजी सुरक्षित होगी, जो अंततः ग्रामीण वित्तीय समावेशन और कृषि-ऋण पुनर्भुगतान क्षमता को मजबूत करेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

दुधारू पशुओं की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी और ठगी के कई मामले अक्सर अदालतों और पुलिस थानों तक पहुंचते हैं, जहां अनभिज्ञ खरीदार को बूढ़े या कम दूध देने वाले मवेशी बेच दिए जाते हैं। यह रिपोर्ट व्यावहारिक जांच के जरिए आर्थिक नुकसान और संभावित कानूनी विवादों से बचने का एक प्रभावी सुरक्षा कवच प्रदान करती है।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

दुधारू पशुओं की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी और ठगी के कई मामले अक्सर अदालतों और पुलिस थानों तक पहुंचते हैं, जहां अनभिज्ञ खरीदार को बूढ़े या कम दूध देने वाले मवेशी बेच दिए जाते हैं। यह रिपोर्ट व्यावहारिक जांच के जरिए आर्थिक नुकसान और संभावित कानूनी विवादों से बचने का एक प्रभावी सुरक्षा कवच प्रदान करती है। रोहन वर्मा के अनुसार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इस तरह की जमीनी और व्यावहारिक जानकारी किसानों और पशुपालकों को बिचौलियों के जाल से बचाने में बहुत मददगार साबित होती है, जिससे न केवल उनकी गाढ़ी कमाई सुरक्षित रहती है बल्कि ग्रामीण स्तर पर होने वाले वित्तीय विवादों में भी कमी आती है।

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