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गुजरात पुलिस भर्ती में तीसरे जेंडर के लिए अलग कोटे की मांग, हाईकोर्ट ने सरकार और डीजीपी से मांगा जवाबगुजरात
25 सित॰ 2026, 12:18 pm (34 दिन पहले)· 1

गुजरात पुलिस भर्ती में तीसरे जेंडर के लिए अलग कोटे की मांग, हाईकोर्ट ने सरकार और डीजीपी से मांगा जवाब

गुजरात में पुलिस सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबल भर्ती में ट्रांसजेंडर वर्ग के लिए अलग श्रेणी और कट-ऑफ तय करने की मांग पर हाईकोर्ट ने राज्य गृह विभाग और डीजीपी को नोटिस थमाया है।

गुजरात पुलिस की मौजूदा क्लास-3 भर्ती प्रक्रिया में ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों के लिए एक अलग श्रेणी और विशेष चयन मानदंड निर्धारित करने का मामला अब कानूनी रूप ले चुका है। इस संबंध में दायर एक याचिका पर प्राथमिक सुनवाई करते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य के गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी किया है। अदालत ने अधिकारियों से इस मामले में 29 सितंबर तक अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।

आवेदन के दौरान उलझन और महिला वर्ग में चयन प्रक्रिया

याचिकाकर्ता ने अपने वकील हन्नान कुरैशी के जरिए अदालत के समक्ष अपनी स्थिति रखी। उन्होंने अनआर्म्ड कांस्टेबल और पुलिस सब-इंस्पेक्टर (पीएसआई) पदों के लिए अपनी उम्मीदवारी पेश की थी। फॉर्म भरते समय जब याचिकाकर्ता ने डीजीपी कार्यालय से संपर्क कर यह जानना चाहा कि तीसरे जेंडर से होने के नाते उन्हें किस वर्ग का चयन करना चाहिए, तो संबंधित अधिकारियों ने आधार कार्ड पर दर्ज विवरण के अनुसार आगे बढ़ने की सलाह दी। चूंकि आधार कार्ड में महिला लिखा था, इसलिए उन्होंने महिला वर्ग के तहत ही आवेदन प्रक्रिया पूरी की।

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इसके बाद उन्होंने महिला वर्ग के सभी आवश्यक मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसमें शारीरिक मानक परीक्षा (पीएसटी) और शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) दोनों शामिल रहीं। हालांकि, बाद में आयोजित लिखित परीक्षा में याचिकाकर्ता को 94 अंक प्राप्त हुए, जबकि एसईबीसी महिला श्रेणी के लिए कट-ऑफ 98.5 अंक निर्धारित हुआ। 11 जुलाई को जारी हुई चयन मेरिट लिस्ट में नाम न आने पर उन्होंने चयनकर्ताओं से आग्रह किया कि उन्हें पुरुष या महिला के बजाय तीसरे जेंडर के तौर पर देखा जाए और उसी अनुसार मूल्यांकन किया जाए।

समानता के अधिकार और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला

अधिकारियों की तरफ से अलग व्यवस्था न किए जाने पर याचिकाकर्ता ने अदालत की शरण ली। अर्जी में दलील दी गई है कि चयन प्रक्रिया को केवल पुरुष और महिला वर्गों तक सीमित रखना संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत मिले समानता के अधिकार के विपरीत है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक एनएएलएसए (NALSA) फैसले के दिशा-निर्देशों को अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग की गई है, ताकि इस वर्ग को भी सरकारी सेवाओं में निष्पक्ष और बराबरी का अवसर मिल सके।

याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि ट्रांसजेंडर समुदाय लंबे समय से सामाजिक उपेक्षा और गहरी चुनौतियों का सामना करता रहा है, इसलिए उन्हें सामान्य उम्मीदवारों की तुलना में विशेष व्यवस्था अथवा आरक्षण की आवश्यकता है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि चयन बोर्ड द्वारा तीसरे जेंडर के लिए अलग कट-ऑफ मेरिट जारी न करना जेंडर आधारित भेदभाव है, जिसके चलते योग्य होने के बावजूद वे भर्ती दौड़ से बाहर हो गए।

दस्तावेज सत्यापन और अदालत का निर्देश

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि उन्हें 30 सितंबर को प्रस्तावित दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया में शामिल होने दिया जाए और उनके मामले पर तीसरे जेंडर की श्रेणी के तहत विचार किया जाए। बहस के दौरान देश के अन्य राज्यों में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं का भी संदर्भ दिया गया। इन दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस अनिरुद्ध मायी ने राज्य गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक को 29 सितंबर तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

सवाल-जवाब

गुजरात हाईकोर्ट ने किन अधिकारियों को नोटिस जारी किया है?
हाईकोर्ट ने राज्य गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस भेजकर 29 सितंबर तक जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता ने किन पदों के लिए आवेदन किया था?
याचिकाकर्ता ने गुजरात पुलिस में अनआर्म्ड कांस्टेबल और पुलिस सब-इंस्पेक्टर (पीएसआई) पदों के लिए आवेदन किया था।
याचिकाकर्ता ने किस श्रेणी में परीक्षा दी थी?
आधार कार्ड पर महिला दर्ज होने के कारण अधिकारियों की सलाह पर उन्होंने महिला श्रेणी में आवेदन किया और शारीरिक परीक्षाएं पास कीं।
लिखित परीक्षा में याचिकाकर्ता के कितने अंक आए थे?
याचिकाकर्ता को लिखित परीक्षा में 94 अंक मिले थे, जबकि एसईबीसी महिला श्रेणी का कट-ऑफ 98.5 अंक रहा।
याचिका में किस फैसले और कानून का हवाला दिया गया है?
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार और सुप्रीम कोर्ट के एनएएलएसए फैसले के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया गया है।
दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया किस तारीख को होनी है?
दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया 30 सितंबर को निर्धारित की गई है, जिसमें शामिल होने के लिए याचिकाकर्ता ने अनुमति मांगी है।
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टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·33 दिन पहले

आधार कार्ड पर महिला लिखा होने की वजह से फॉर्म भरना पड़ा, यह अजीब उलझन है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·33 दिन पहले

मुझे वो दिन याद आ गया जब एक दोस्त ने फॉर्म भरते वक्त जेंडर के कॉलम को लेकर मुझसे ऐसी ही उलझन साझा की थी।

Ravikash Gupta@ravikash·33 दिन पहले

अर्जुन, फॉर्म भरने में ऐसी उलझन तो आम है, पर क्या कोर्ट के फैसले के बाद भी भर्ती बोर्ड को इसके लिए अलग से नियम क्यों नहीं बनाने चाहिए थे?

Rohan Verma@rohan-verma·33 दिन पहले

आधार कार्ड के हिसाब से फॉर्म भर दिया, तो फिर बाद में अलग कोटे की मांग करना थोड़ा अजीब लग रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·33 दिन पहले

रोहन, बात आधार के हिसाब से फॉर्म भरने की नहीं, अधिकारियों से पूछकर भरने की है। जब पहले ही सही जानकारी मांगी गई थी, तो फिर अलग कोटे का नियम पुलिस विभाग ने अब तक क्यों नहीं बनाया?

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