अगरतला गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में बढ़ाई गईं पीजी सीटें, सीएम माणिक साहा ने किया बड़ा ऐलानमैराथन से पहले स्मार्टवॉच की सेटिंग्स में करें ये जरूरी बदलाव, नहीं होगी दौड़ने में परेशानीनिशानेबाज जयपाल मालवीय ने रचा इतिहास, 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक का पहला कोटा देश की झोली में डालाओडिशा में ईडी की छापेमारी के दौरान मिले हाथी के दांत और हिरण के सींग, एक गिरफ्तारधनतेरस पर 15 सालों में 362% उछला सोना, अगले साल 1.71 लाख रुपये तक जाने का अनुमानअरुणाचल प्रदेश को केंद्र से मिले 1,476 करोड़ रुपये, त्योहारों के सीजन में मिला कर डिवॉल्व्यूशन का हिस्साकानपुर को मिली बड़ी सौगात, 150 करोड़ की लागत से बना सरैंया रेलवे ओवरब्रिज जनता को समर्पितड्रोन डिलीवरी स्टार्टअप ज़िपलाइन की वैल्यूएशन 21.5 अरब डॉलर पर पहुंची, वॉलमार्ट के साथ हुआ बड़ा करारबच्चों के लिए 10 बेहतरीन सब्सक्रिप्शन बॉक्स (2026): एसटीईएम, किताबें, कपड़े और बहुत कुछकेंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बारहवीं कक्षा का पूरा परीक्षा शेड्यूल किया जारी
गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का समानांतर अधिकार, सरकार पहुंची ट्रिब्यूनलहरियाणा
21 अक्तू॰ 2026, 8:39 am (17 दिन पहले)· 2

गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का समानांतर अधिकार, सरकार पहुंची ट्रिब्यूनल

हरियाणा नियामक आयोग ने गुरुग्राम व नूंह में इलेवन पावर को 25 साल का समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिया है, जिसके खिलाफ ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने अपील का ऐलान किया है।

हरियाणा के बिजली वितरण ढांचे में एक बड़ा बदलाव सामने आया है, जिसके तहत गुरुग्राम और नूंह जिलों के बाशिंदों को भविष्य में बिजली प्रदाता चुनने का विकल्प मिलेगा। हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) ने एक अहम फैसले में निजी क्षेत्र की कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को इन दोनों जिलों में समानांतर बिजली आपूर्ति का लाइसेंस जारी कर दिया है। 19 अक्टूबर को पारित इस विनियामक आदेश के बाद अब तक दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के एकाधिकार वाले इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का रास्ता खुल गया है। हालांकि इस कदम के साथ ही राज्य की सियासत में भी हलचल तेज हो गई है, क्योंकि खुद राज्य सरकार के ऊर्जा मंत्री ने नियामक के इस फैसले को चुनौती देने की बात कही है।

25 वर्षों के लिए मिला समानांतर वितरण का अधिकार

नियामक आयोग ने बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 14 के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए निजी फर्म को 25 वर्षों की अवधि के लिए यह वितरण अनुमति दी है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद दोनों जिलों के 8.30 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को चरणबद्ध तरीके से अपनी पसंद की वितरण कंपनी चुनने की सहूलियत मिलेगी। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसका नेटवर्क मौजूदा सार्वजनिक वितरण तंत्र को हटाने के बजाय उसके समानांतर काम करेगा। इस निर्णय से आम उपभोक्ताओं की मौजूदा व्यवस्था पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा और सरकारी डिस्कॉम पहले की तरह ही बिजली आपूर्ति जारी रखेगा।

ये भी पढ़ें

इलेवन पावर की ओर से साझा की गई योजना के अनुसार, कंपनी आने वाले पांच वर्षों के दौरान मजबूत बिजली वितरण ढांचा खड़ा करने पर 4,717 करोड़ रुपये का भारी भरकम निवेश करेगी। बुनियादी ढांचे की स्थापना के बाद वित्त वर्ष 2027-28 से उपभोक्ताओं को वाणिज्यिक बिजली आपूर्ति शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत के कुछ प्रमुख महानगरों जैसे मुंबई में पहले से ही एक ही भौगोलिक क्षेत्र में दो वितरण कंपनियों के संचालन का मॉडल सफलतापूर्वक चल रहा है, जिसे अब हरियाणा के इन दो प्रमुख जिलों में आजमाने की तैयारी है।

बिजली की बढ़ती मांग और नेटवर्क विस्तार की योजनाएं

गुरुग्राम, मानेसर, सोहना और नूंह के इलाकों में हो रहे तेज शहरीकरण, औद्योगिक फैलाव तथा वाणिज्यिक गतिविधियों के कारण ऊर्जा की खपत में तेजी से इजाफा दर्ज किया जा रहा है। आयोग द्वारा स्वीकृत अनुमानों के हवाले से कंपनी ने संकेत दिया है कि लाइसेंस क्षेत्र में बिजली की सालाना मांग बहुत तेजी से बढ़ने वाली है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में जहां प्रस्तावित क्षेत्र की वार्षिक बिजली बिक्री करीब 12,220 करोड़ यूनिट आंकी गई है, वहीं वित्त वर्ष 2030-31 तक इसके उछलकर 18,224 करोड़ यूनिट तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इस भारी मांग को पूरा करने के लिए ही समानांतर आधुनिक नेटवर्क तैयार करने की दलील दी गई है।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने जताया कड़ा ऐतराज

नियामक के इस फैसले के फौरन बाद प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि राज्य सरकार निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस सौंपे जाने के इस आदेश को स्वीकार नहीं करेगी। ऊर्जा मंत्री ने इस संबंध में रुख स्पष्ट करते हुए कहा, “हरियाणा विद्युत नियामक आयोग द्वारा इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस देने के आदेश के खिलाफ सरकार विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) में अपील करेगी।”

विज ने इससे पूर्व अगस्त महीने में भी सरकार के इस कड़े रुख का उल्लेख किया था। उनका कहना था कि समानांतर वितरण के लिए निजी कंपनी ने सीधे स्वायत्त नियामक संस्था के समक्ष अपनी अर्जी दाखिल की थी, जबकि इस विषय पर ऊर्जा विभाग से मंजूरी नहीं ली गई थी। जब आयोग ने राज्य सरकार का पक्ष जानने के लिए संपर्क किया, तब शासन स्तर से इस पूरे प्रस्ताव पर हर बिंदु पर सख्त विरोध दर्ज कराया गया था। वर्तमान में इन दोनों जिलों में बिजली पहुंचाने का पूरा जिम्मा पूरी तरह से राज्य सरकार के उपक्रम दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के पास है।

विपक्ष ने भी खड़े किए गंभीर सवाल

इधर इस विनियामक निर्णय पर विपक्षी दल भी हमलावर हो गए हैं। इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) के संरक्षक और पूर्व मंत्री संपत सिंह ने इस कदम को सार्वजनिक क्षेत्र के ढांचे पर सीधा प्रहार बताया है। संपत सिंह ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा, “यह हरियाणा के सार्वजनिक बिजली क्षेत्र, किसानों, ग्रामीण उपभोक्ताओं और गरीबों के हितों पर गंभीर आघात है।”

पूर्व मंत्री ने रेखांकित किया कि हरियाणा के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब एक ही आपूर्ति क्षेत्र के भीतर दो समानांतर वितरण एजेंसियों को प्रतिस्पर्धा के नाम पर उतारा जा रहा है। अब तक राज्य के किसी भी हिस्से में बिजली आपूर्ति का काम या तो पूर्ण रूप से सरकारी निगम संभालते थे या फिर विशिष्ट निजी लाइसेंसधारक, लेकिन एक ही क्षेत्र में दो प्रतिद्वंद्वी एजेंसियों की व्यवस्था कभी नहीं रही। सिंह ने यह तर्क भी दिया कि गुरुग्राम जिला दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के राजस्व का मुख्य आधार है और यह ऐसा क्षेत्र है जहां बिजली चोरी या लाइन लॉस सबसे कम स्तर पर रहता है। ऐसे बेहद मुनाफे वाले इलाके में निजी कंपनी को प्रवेश देकर सार्वजनिक निगम की वित्तीय रीढ़ को कमजोर करने की आशंका जताई जा रही है।

सवाल-जवाब

हरियाणा में किस निजी कंपनी को समानांतर बिजली आपूर्ति का लाइसेंस मिला है?
हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह जिलों के लिए यह समानांतर लाइसेंस प्रदान किया है।
यह लाइसेंस कितने वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा और आपूर्ति कब से शुरू होगी?
कंपनी को 25 साल की अवधि के लिए लाइसेंस दिया गया है और उसकी योजना वित्त वर्ष 2027-28 से बिजली आपूर्ति शुरू करने की है।
इलेवन पावर बुनियादी ढांचे पर कितना निवेश करने जा रही है?
कंपनी अगले पांच वर्षों में बिजली वितरण नेटवर्क स्थापित करने के लिए कुल 4,717 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज इस फैसले के खिलाफ कहां अपील करेंगे?
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने घोषणा की है कि राज्य सरकार इस फैसले के विरोध में विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) में अपील दायर करेगी।
क्या मौजूदा उपभोक्ताओं को अपना बिजली कनेक्शन अभी बदलना होगा?
नहीं, उपभोक्ताओं को अभी कुछ नहीं करना है और वर्तमान सरकारी बिजली प्रदाता डीएचबीवीएन पहले की तरह ही बिजली आपूर्ति जारी रखेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·16 दिन पहले

4,717 करोड़ रुपये का निवेश! देखते हैं गुरुग्राम के लोगों को सच में बेहतर बिजली मिलती है या सिर्फ कागजी बातें रह जाती हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·16 दिन पहले

सरकारी बिजली कंपनी के सामने कोई प्राइवेट खिलाड़ी खड़ा करने की बात तो ठीक है, पर 25 साल का लाइसेंस देना कुछ ज़्यादा ही नहीं हो गया?

Ravikash Gupta@ravikash·16 दिन पहले

अर्जुन जी, मुंबई में तो सालों से दो कंपनियां चल रही हैं, तो गुड़गांव में भी मुकाबला होना चाहिए। 25 साल का वक्त लंबा जरूर है, पर निवेश भी तो बड़ा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 दिन पहले

बिजली कंपनी बदलने का विकल्प सुनने में तो अच्छा है, पर अनिल विज जिस तरह विरोध कर रहे हैं उससे लगता है कि मामला इतना आसान नहीं होगा। निजी कंपनी को इतनी आसानी से मैदान मिलने पर शक है।

Rohan Verma@rohan-verma·16 दिन पहले

करण जी, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। अनिल विज का रुख देखकर लगता है कि सरकार और निजी कंपनी के बीच कानूनी पेंच फंसना तय है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp