जयपुर में आयोजित एक राज्य स्तरीय शिखर सम्मेलन के मंच से राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपनी सरकार की उपलब्धियों, भविष्य की प्राथमिकताओं और प्रदेश के समग्र विकास का व्यापक खाका जनता के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता से किए गए वादे सर्वोपरि होते हैं और सरकार ने बीते समय में इसी मूल मंत्र के साथ शासन संचालित किया है। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव के समय भारतीय जनता पार्टी ने अपने संकल्प पत्र के जरिए प्रदेश की जनता से जो वादे किए थे, उनमें से अठहत्तर फीसदी वादों को अमलीजामा पहनाया जा चुका है। सरकार ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद जनहित के मुद्दों पर आम नागरिकों और विशेषज्ञों से सुझाव प्राप्त किए और उन्हीं प्राथमिकताओं को केंद्र में रखकर नीतियों का निर्माण किया।
रोजगार सृजन और युवाओं के लिए तय प्राथमिकताओं पर जोर
युवाओं के भविष्य और राज्य में रोजगार के नए मौकों पर बात करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आगामी दो वर्षों की कार्ययोजना विस्तार से समझाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव के समय राजस्थान के नौजवानों को चार लाख सरकारी व गैर-सरकारी अवसर उपलब्ध कराने का स्पष्ट संकल्प लिया था। इस दिशा में सरकार ने तेजी से कदम बढ़ाते हुए अब तक एक लाख तिरानवे हजार पदों पर नियुक्तियां और अवसर प्रदान कर दिए हैं, जबकि बाकी बचे पदों के लिए चयन और भर्ती की प्रक्रिया निरंतर जारी है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश में चल रही रिफाइनरी परियोजना भी आने वाले दिनों में स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका का बड़ा आधार बनेगी। रिफाइनरी के पूरी तरह संचालित होने पर पेट्रोकेमिकल और सहायक उद्योगों का संजाल खड़ा होगा, जिससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। उन्होंने दोहराया कि महिलाओं, किसानों और नौजवानों से किया गया हर एक वादा अक्षरशः पूरा होगा और सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तय किए गए विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य में राजस्थान को एक विकसित राज्य के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी शक्ति से जुटी है।
आर्थिक संकेतकों में सुधार और प्रति व्यक्ति आय का विस्तार
राजस्थान की भौगोलिक और प्राकृतिक संपन्नता को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को अक्सर केवल रेतीले भूभाग के रूप में देखा जाता है, जबकि हकीकत में यह एक अत्यंत उपजाऊ और संसाधनों से भरपूर राज्य है। राजस्थान में पचासी प्रकार के विविध खनिज पाए जाते हैं, जो देश के औद्योगिक विकास में रीढ़ की भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा यहां की जलवायु और मिट्टी विभिन्न प्रकार की फसलों के उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है।
प्रदेश की आर्थिक सेहत का तुलनात्मक विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि जब वर्तमान सरकार ने कार्यभार संभाला था, तब राज्य में प्रति व्यक्ति आय एक लाख चौंतीस हजार रुपये के स्तर पर थी। नीतिगत सुधारों, व्यापारिक सुगमता और वित्तीय अनुशासन के बल पर आज यह आंकड़ा बढ़कर दो लाख पांच हजार रुपये तक पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रति व्यक्ति आय में दर्ज हुई यह भारी बढ़ोतरी दर्शाती है कि राज्य की आर्थिक बुनियाद पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है और विकास के लाभ सामान्य जनता तक पहुंच रहे हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार और चौबीस घंटे आपूर्ति का संकल्प
बिजली उत्पादन और कृषि क्षेत्र को विद्युत आपूर्ति के विषय पर मुख्यमंत्री ने पिछली और वर्तमान व्यवस्था की विस्तृत तुलना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने अपने ढाई साल के कार्यकाल के दौरान राज्य में बारह हजार पांच सौ मेगावॉट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की क्षमता विकसित की है। इसके विपरीत पिछली सरकार अपने पूरे पांच साल के कार्यकाल में केवल तीन हजार दो सौ पचास मेगावॉट बिजली उत्पादन क्षमता ही जोड़ पाई थी।
किसानों की सिंचाई समस्याओं को हल करने के लिए सरकार ने वर्ष दो हजार सत्ताईस तक सभी कृषि उपभोक्ताओं को दिन के समय गुणवत्तापूर्ण बिजली देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के सत्ताईस जिलों में किसानों को दिन के वक्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे रात में खेतों की सिंचाई करने की परेशानी समाप्त हो रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान परियोजनाओं के पूरा होने पर राजस्थान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अन्य राज्यों को बिजली निर्यात करने वाला सक्षम राज्य बनकर उभरेगा।
जल संरक्षण और भूजल संवर्धन के लिए सामुदायिक प्रयास
पानी की कमी से जूझते इलाकों के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कर्मभूमि से मातृभूमि तक अभियान की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस अनूठी पहल के माध्यम से देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे प्रवासी राजस्थानियों को अपनी जड़ों से जोड़ा गया है। इन प्रवासी नागरिकों ने अपने पैतृक गांवों को गोद लिया है और वहां जल संरक्षण के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जिम्मेदारी उठाई है।
इस अभियान के अंतर्गत तालाबों, छोटे और बड़े बांधों के निर्माण तथा जल संचयन के विभिन्न कार्यों के लिए करीब दो सौ पचास करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन ढांचों के माध्यम से मानसूनी बारिश के पानी को व्यर्थ बहने से रोका जाएगा और भूजल स्तर को तेजी से रीचार्ज किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराज्यीय जल समझौतों और आधुनिक प्रबंधन प्रणालियों के लागू होने के बाद वह यह भरोसा दिला सकते हैं कि आने वाले दौर में राजस्थान को कभी पानी के गंभीर संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।
औद्योगिक निवेश और राइजिंग राजस्थान की धरातलीय प्रगति
राज्य में औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केवल कागजों पर सहमति पत्रों के हस्ताक्षर तक सीमित नहीं रहना चाहती थी। इसी सोच के कारण सत्ता में आने के प्रथम वर्ष में ही राइजिंग राजस्थान शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया, ताकि निवेशकों को वास्तविक धरातल पर काम शुरू करने का वातावरण मिल सके।
उन्होंने बताया कि इस पहल के फलस्वरूप वर्तमान समय में राज्य भर में लगभग नौ लाख करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ी परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से न केवल आधारभूत ढांचे का आधुनिकीकरण हो रहा है, बल्कि उत्पादन और सेवा क्षेत्रों में अभूतपूर्व गतिविधियों का सूत्रपात हुआ है। शेष स्वीकृत प्रस्तावों को भी तय समयसीमा के भीतर लागू करने के लिए प्रशासनिक तंत्र को उत्तरदायी बनाया गया है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक व्यवस्था पर दृष्टिकोण
एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने अपने जीवन के शुरुआती दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता की प्रबल इच्छा थी कि वह एक शिक्षक के रूप में अपना जीवन बिताएं और समाज को शिक्षित करें। उन्होंने कहा कि जीवन में नियति जो तय करती है, मनुष्य का मार्ग उसी ओर मुड़ जाता है। उन्होंने कहा, “मैं किसान का बेटा हूं और वो जादूगर के बेटे हैं।” यह टिप्पणी उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के संदर्भ में पूछे गए एक सवाल पर की, जिसमें उन्होंने बताया कि जादूगर शब्द का उपयोग पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण ही किया जाता है।
अपनी व्यक्तिगत आस्था पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखते हैं और गिरिराज जी उनके प्रमुख आराध्य हैं, इसलिए वे नियमित रूप से उनकी परिक्रमा करने जाते हैं। संगठन की कार्यसंस्कृति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी का ढांचा ही ऐसा है जहां एक साधारण कार्यकर्ता, जो जमीन से जुड़ा हो, शीर्ष दायित्वों तक पहुंच सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसका सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत बताते हुए उन्होंने कहा कि एक बेहद साधारण किसान परिवार से आने के बावजूद उन्हें राजस्थान के आठ करोड़ नागरिकों की सेवा का पावन दायित्व सौंपा गया है।
विपक्ष की कार्यशैली और सत्ता की निरंतरता पर विचार
विपक्षी दल की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि कुछ दलों के भीतर सत्ता के बिना रहने की छटपटाहट साफ दिखाई देती है। उन्होंने विपक्ष के नेताओं द्वारा सरकारी स्कूलों के दौरों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे दौरों का उद्देश्य वास्तविक सुधार देखना नहीं, बल्कि भीड़ जुटाकर राजनीतिक हंगामा खड़ा करना होता है।
राजस्थान में पिछले कई दशकों से हर पांच साल में सरकार बदलने की परंपरा रही है। जब उनसे पूछा गया कि क्या आगामी चुनावों में यह सिलसिला बदलेगा, तो उन्होंने दृढ़ विश्वास जताया कि इस बार भारतीय जनता पार्टी फिर से सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि, जनकल्याणकारी नीतियों और केंद्र व राज्य सरकार के विकास कार्यों के आधार पर जनता इस बार सत्ता परिवर्तन की पुरानी परिपाटी को समाप्त कर विकास की निरंतरता को चुनेगी। उन्होंने अंत में दोहराया कि जब सरकार ने कार्यभार संभाला था, तब राज्य की प्रशासनिक और वित्तीय स्थिति अत्यंत जर्जर थी, जिसे पटरी पर लाने के लिए सरकार ने दिन-रात परिश्रम किया है।



















