हवाई जहाज के भीतर सैकड़ों जिंदगियों की रक्षा करने वाले कैप्टन स्मित मच्छार की वीरता पर देश भर में प्रशंसा हो रही है, लेकिन मुख्य विपक्षी दल की चुप्पी पर सत्ताधारी दल ने कड़ा रुख अपनाया है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने रविवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस आलाकमान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने रेखांकित किया कि जहां देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं पायलट से फोन पर संवाद कर उनका हौसला बढ़ाया और अमेरिका तथा इजरायल के राष्ट्रपति भी इस दिलेरी की सराहना कर चुके हैं, वहीं कांग्रेस की ओर से प्रशंसा का एक औपचारिक संदेश तक जारी नहीं हुआ।
आतंकवादी संगठन के समर्थन और कांग्रेस की चुप्पी पर खड़े किए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने मामले के दूसरे पहलू को सामने रखा। उन्होंने बताया कि जिस सह-पायलट इमाम अल हमामी पर गंभीर आरोप लगे हैं, उसकी तारीफ आतंकी गुट अल-कायदा द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई है। त्रिवेदी ने सवाल दागा कि क्या यह घटनाक्रम सामान्य माना जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल अपने चुनावी समीकरणों को बिगड़ने के डर से इस असाधारण वीरता पर मौन साधे बैठा है।
सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर सीधा प्रहार करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि जिनके दिलों में दिल्ली के चर्चित बाटला हाउस मामले में मारे गए संदिग्धों के लिए दर्द उमड़ता था, वे आज एक जांबाज पायलट के लिए संवेदना का एक शब्द भी नहीं निकाल पा रहे हैं। उन्होंने कहा, "सोनिया गांधी की आंखों में बाटला हाउस एनकाउंटर के आरोपियों के लिए आंसू थे, उनकी आंखों में करुणा का एक भी भाव कैप्टन स्मित मच्छार के लिए दिखाई नहीं दे रहा है." उन्होंने राहुल गांधी के पुराने बयानों और सोशल मीडिया पर विदेशी मुद्दों, खासकर गाजा संघर्ष पर लगातार लिखे जाने वाले पत्रों का हवाला देते हुए तंज कसा कि वोटबैंक की फिक्र में उन्होंने इस राष्ट्रीय गौरव के क्षण पर चुप्पी साध ली है।
विपक्ष के पुराने रुख की याद दिलाई
भाजपा सांसद ने विपक्षी नेताओं के पूर्ववर्ती बयानों की श्रृंखला गिनाते हुए दावा किया कि यह दोहरा चरित्र पार्टी की पुरानी कार्यप्रणाली का हिस्सा रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह वही राजनीतिक धारा है जिसमें कई लोगों ने जाकिर नाइक जैसे उपदेशकों को शांति दूत की तरह देखा, संसद हमले के मुजरिम अफजल गुरु को प्रतिकूल परिस्थितियों का शिकार करार दिया और घाटी के आतंकी बुरहान वानी को केवल गुमराह नौजवान का तमगा दिया। इतना ही नहीं, मुंबई धमाकों के दोषी याकूब मेमन को दी गई फांसी को कानूनी हत्या का नाम देने वाले लोग आज अपनी जान पर खेलकर यात्रियों को सुरक्षित उतारने वाले कैप्टन स्मित के पक्ष में कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं।
त्रिवेदी ने चिंता व्यक्त की कि तुष्टिकरण की इस तरह की संकीर्ण राजनीति पूरे मुल्क के भविष्य को गहरे संकट की तरफ धकेल सकती है। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्र की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा करने वाले असली नायकों को नजरअंदाज किया जाने लगे, तो यह समूचे समाज और लोकतंत्र के लिए विचारणीय प्रश्न बन जाता है।
उत्तर प्रदेश में नियुक्तियों और इमरान मसूद पर प्रहार
पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए प्रवक्ता ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस में हाल ही में हुए संगठनात्मक बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सत्य और अहिंसा के प्रतीक महात्मा गांधी की जयंती के दिन पार्टी ने इमरान मसूद को राज्य इकाई का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने का फैसला लिया। त्रिवेदी ने याद दिलाया कि वर्ष 2014 के आम चुनाव के दौरान इसी नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अत्यंत भड़काऊ और अमर्यादित बयानबाजी की थी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विवादित बयान देते वक्त मसूद समाजवादी पार्टी के सदस्य थे, मगर ऐसे व्यक्ति को सम्मानजनक सांगठनिक पद सौंपने से कांग्रेस की मंशा पूरी तरह उजागर होती है।
मल्लिकार्जुन खड़गे के चुनाव और कद पर उठाए प्रश्न
संवाददाता सम्मेलन के अंतिम हिस्से में सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि खड़गे जैसे अनुभवी नेता को पार्टी के भीतर लगातार हार का सामना कर रहे नेतृत्व की प्राथमिकताओं का समर्थन करने से बचना चाहिए। भाजपा नेता ने पार्टी के आंतरिक चुनावों की वैधता को चुनौती देते हुए कहा कि अध्यक्ष पद के मतदान के समय कई नेताओं ने मतदाता सूची की मांग की थी, जिसे सार्वजनिक नहीं किया गया।
त्रिवेदी ने गांधी परिवार के प्रभाव की ओर इशारा करते हुए एक पुराने घटनाक्रम का उल्लेख किया, जब नामांकन दाखिल करने के दौरान शीर्ष परिवार के सदस्य कमरे के भीतर मौजूद थे, जबकि खड़गे को औपचारिकता पूरी होने से पहले कक्ष में प्रवेश नहीं करने दिया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे तमाम वाकये बताते हैं कि मुख्य विपक्षी दल की कार्यप्रणाली में वास्तविक लोकतंत्र और राष्ट्रीय सरोकारों की कितनी अनदेखी की जाती है।





















