हवा में कॉकपिट के भीतर अचानक हुए घातक हमले और गंभीर चोटों के बावजूद अदम्य साहस दिखाते हुए विमान को सुरक्षित लैंड कराने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर के शौर्य की गूंज अब देश और दुनिया में सुनाई दे रही है। दुबई से इजरायल के तेल अवीव की उड़ान पर निकले फ्लाईदुबई के विमान FZ 1073 में 174 जिंदगियों को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकालने वाले इस जांबाज पायलट को अब भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पदक अशोक चक्र प्रदान करने की मांग तेज हो गई है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से लेकर प्रमुख हस्तियों ने केंद्र सरकार के समक्ष यह मांग रखी है। विश्व स्तर पर भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कैप्टन स्मित के इस अदम्य पराक्रम की सराहना कर चुके हैं।
शिवसेना सांसद मिलिंद देवरा ने प्रधानमंत्री को भेजा औपचारिक पत्र
इस वीरता को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजने की पहल करते हुए शिवसेना के राज्यसभा सांसद मिलिंद देवरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छर को प्रतिष्ठित अशोक चक्र से सम्मानित करने की पुरजोर पैरवी की है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पत्र साझा करते हुए मिलिंद देवरा ने कैप्टन स्मित को मुंबई का बेटा कहकर पुकारा। उन्होंने लिखा कि आसमान में अकल्पनीय और भयावह चुनौती से घिरने के बाद भी इस जांबाज पायलट ने अपनी जिंदगी की परवाह किए बिना यात्रियों की हिफाजत को सर्वोपरि रखा और लहूलुहान अवस्था में भी अपना फर्ज निभाते रहे। देवरा के अनुसार, यह साहसिक कार्य कर्तव्यनिष्ठा, आत्मबलिदान और निस्वार्थ सेवा की सबसे बड़ी मिसाल है।
लेखक शेफाली वैद्य और मेजर डीपी सिंह ने भी किया समर्थन
कैप्टन स्मित के पराक्रम को सम्मानित करने की यह आवाज समाज के अन्य प्रभावशाली वर्गों से भी उठ रही है। चर्चित लेखक शेफाली वैद्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए X पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर इस वर्ष कोई जांबाज वास्तव में अशोक चक्र का सच्चा हकदार है, तो वह केवल कैप्टन स्मित मच्छर हैं, जिन्होंने खुद गंभीर रूप से जख्मी होने के बावजूद 200 यात्रियों की जिंदगी की रक्षा की। इसी क्रम में वर्ष 2018 के राष्ट्रीय पुरस्कार और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से सम्मानित भारत के पहले ब्लेड रनर मेजर डीपी सिंह ने भी सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि कैप्टन स्मित शांतिकाल के सबसे बड़े वीरता सम्मान अशोक चक्र के वास्तविक हकदार हैं। उन्होंने इतिहास की याद दिलाते हुए उल्लेख किया कि वर्ष 1987 में ऐसी ही असाधारण बहादुरी के लिए नीरजा भनोट को मरणोपरांत यह सम्मान दिया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर जाना कैप्टन स्मित का हाल
देश के इस साहसी पायलट की कुशलता जानने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से शुक्रवार को कैप्टन स्मित से टेलीफोन पर बातचीत की। प्रधानमंत्री ने इस खौफनाक हमले में जख्मी हुए कैप्टन के स्वास्थ्य की विस्तृत जानकारी ली और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। इससे पहले गुरुवार को भी प्रधानमंत्री ने कैप्टन के परिजनों से बात कर उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया था। संयुक्त अरब अमीरात स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, कैप्टन स्मित की शारीरिक स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है और वे तेजी से रिकवर कर रहे हैं। भारत सरकार लगातार उनके परिवार और चिकित्सकों के संपर्क में बनी हुई है।
कॉकपिट में सह-पायलट का चाकू से जानलेवा हमला
यह रोंगटे खड़े कर देने वाला घटनाक्रम तब हुआ जब फ्लाईदुबई की उड़ान FZ 1073 हवा में सफर कर रही थी। उस दौरान विमान के कॉकपिट में मौजूद को-पायलट ने अचानक कैप्टन स्मित मच्छर पर चाकू से जानलेवा वार कर दिया। असहनीय दर्द और गंभीर रूप से लहूलुहान होने के बावजूद कैप्टन ने नियंत्रण नहीं खोया और विमान में सवार इजरायली नागरिकों समेत सभी 174 यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया। घटना के तुरंत बाद घायल कैप्टन को तबूक से एयरलिफ्ट करके अबू धाबी लाया गया, जहां के एक विशेष अस्पताल में उनका सघन उपचार और स्वास्थ्य लाभ चल रहा है।
क्या है शांतिकालीन सर्वोच्च वीरता पदक अशोक चक्र
अशोक चक्र भारत गणराज्य का सर्वोच्च शांतिकालीन सैन्य अलंकरण है, जो युद्ध के मैदान से इतर परिस्थितियों में दिखाए गए असाधारण साहस, अप्रतिम शौर्य अथवा सर्वोच्च आत्मबलिदान के लिए प्रदान किया जाता है। इस प्रतिष्ठित सम्मान की स्थापना का मुख्य उद्देश्य ऐसे जांबाज नागरिकों और सैन्यकर्मियों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देना है, जिन्होंने संकट के क्षणों में अपनी जान जोखिम में डालकर देश अथवा मानवता की रक्षा के लिए अद्वितीय कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया हो। कैप्टन स्मित का यह अदम्य पराक्रम इसी सर्वोच्च श्रेणी के शौर्य को रेखांकित करता है।

















