तुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानपीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानपंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया यादजीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन के सख्त नियमों पर फेडरल रिजर्व ने मांगी जनता से रायदैनिक राशिफल 25 सितंबर 2026: कुंभ में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग, जानें सभी 12 राशियों का हालचीन और अमेरिका के बीच टकराव से दोनों को नुकसान, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वाशिंगटन में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर दिया जोरगाजा युद्ध में पीछे न हटने के पीछे नेतन्याहू ने सुनाई 1967 की दास्तान, भाई के वो 5 शब्द बने इजरायल की सैन्य नीतिसऊदी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमलों के बाद तेल की कीमतों में उछाल, तुर्किये और पाकिस्तान के साथ आपात बैठक
हवाई सफर से उड़ान भरेंगे ग्रामीण प्रतिभाओं के सपने, दिल्ली और जयपुर की ऐतिहासिक यात्रा पर भेजे गए बांसवाड़ा के बोर्ड टॉपरराजस्थान
15 सित॰ 2026, 5:49 pm (10 दिन पहले)· 0

हवाई सफर से उड़ान भरेंगे ग्रामीण प्रतिभाओं के सपने, दिल्ली और जयपुर की ऐतिहासिक यात्रा पर भेजे गए बांसवाड़ा के बोर्ड टॉपर

बांसवाड़ा जिले के वडलीपाड़ा स्कूल के 12 मेधावी छात्र-छात्राओं को बोर्ड परीक्षाओं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने पर हवाई यात्रा और ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण का तोहफा मिला है।

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के एक सुदूर ग्रामीण इलाके में शिक्षा के प्रति उत्साह जगाने और मेधावी बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिए एक बेहद अनूठी कोशिश की गई है। बागीदौरा क्षेत्र के वडलीपाड़ा गांव में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के बारह होनहार विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के इनाम के तौर पर पहली बार हवाई जहाज की यात्रा का अवसर मिला। इन सभी छात्र-छात्राओं ने अपनी कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए थे, जिसके बाद उनके इस सपने को सच करने का जिम्मा क्षेत्र के ही एक युवा समाजसेवी ने उठाया।

पहली बार बादलों के पार जाने का रोमांच

सोमवार को आयोजित की गई इस विशेष यात्रा के दौरान विद्यार्थियों ने दिल्ली से जयपुर तक विमान में सफर किया। ग्रामीण परिवेश से आने वाले इन बच्चों के लिए यह जीवन का पहला मौका था जब वे आसमान की ऊंचाइयों को छू रहे थे, जिससे उनका उत्साह देखने लायक था। इस पूरी पहल का उद्देश्य केवल एक मनोरंजक यात्रा कराना नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से इन होनहार बच्चों को देश की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना भी था। दिल्ली पहुँचने पर विद्यार्थियों ने वहाँ के कई प्रमुख दर्शनीय और ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया और उनके महत्व को गहराई से समझा।

ये भी पढ़ें

कला और संस्कृति का व्यावहारिक पाठ

दिल्ली भ्रमण समाप्त करने के बाद इन छात्र-छात्राओं ने हवाई मार्ग से जयपुर का रुख किया। जयपुर में भी उनके लिए एक विशेष पर्यटन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जहाँ उन्हें गुलाबी नगरी की ऐतिहासिक विरासत और प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की सैर कराई गई। राजस्थान की पारंपरिक कला, अनूठी संस्कृति और बेजोड़ स्थापत्य कला को इतने करीब से देखने के बाद बच्चों का ज्ञानवर्धन हुआ और उनमें नई चीजों को समझने की जिज्ञासा पैदा हुई। इस पूरी यात्रा के दौरान बच्चों के चेहरे पर नया कुछ सीखने और देखने की एक अलग ही चमक और उत्सुकता दिखाई दे रही थी।

आत्मविश्वास और सपनों को नई दिशा देना

इस पूरी यात्रा की रूपरेखा तैयार करने वाले युवा समाजसेवी निलेश सिंघाड़ा ने बताया कि उनका मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले प्रतिभावान बच्चों को पढ़ाई और कड़ी मेहनत के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण पृष्ठभूमि में रहने के कारण कई बार बेहद होनहार बच्चों को भी अपने जीवन में ऐसे बड़े अनुभव पाने का मौका नहीं मिल पाता। ऐसे में जब इन बच्चों को हवाई यात्रा और देश के ऐतिहासिक शहरों का भ्रमण कराया जाता है, तो उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। इससे वे भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होते हैं और उनके मन में आगे बढ़ने की नई उमंग पैदा होती है।

मुस्कान फाउंडेशन का सामाजिक सरोकार

निलेश सिंघाड़ा पिछले करीब दो वर्षों से शिक्षा के प्रसार और विभिन्न सामाजिक कार्यों में लगातार सक्रिय योगदान दे रहे हैं। वे अपने संगठन मुस्कान फाउंडेशन के माध्यम से अनाथ, जरूरतमंद और असहाय बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। इस फाउंडेशन की ओर से समय-समय पर बच्चों को स्कूल की पोशाक, बस्ते, स्टेशनरी और अन्य जरूरी अध्ययन सामग्री मुफ्त में बांटी जाती है। बोर्ड परीक्षा के मेधावी छात्रों के लिए आयोजित की गई यह हवाई यात्रा भी इसी सामाजिक मुहिम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो ग्रामीण भारत के बच्चों को यह संदेश देती है कि मेहनत और लगन से मिली सफलता उनके लिए विकास के नए और असीमित द्वार खोल सकती है।

सवाल-जवाब

वडलीपाड़ा स्कूल के बच्चों को हवाई यात्रा का उपहार क्यों मिला?
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय वडलीपाड़ा के इन 12 बच्चों ने अपनी कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए थे, जिसके इनाम के रूप में उन्हें यह यात्रा कराई गई।
इस अनूठी यात्रा का आयोजन किसने किया था?
इस हवाई यात्रा और ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण का आयोजन वडलीपाड़ा निवासी युवा समाजसेवी निलेश सिंघाड़ा ने अपने संगठन मुस्कान फाउंडेशन के माध्यम से किया था।
विद्यार्थियों को किन शहरों का भ्रमण कराया गया?
विद्यार्थियों को दिल्ली से जयपुर की हवाई यात्रा कराई गई और इस दौरान उन्हें इन दोनों शहरों के प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया गया।
मुस्कान फाउंडेशन बच्चों की मदद के लिए और क्या कार्य करता है?
मुस्कान फाउंडेशन पिछले दो वर्षों से जरूरतमंद और अनाथ बच्चों को स्कूल ड्रेस, बैग, स्टेशनरी और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने का कार्य कर रहा है।
इस यात्रा को आयोजित करने के पीछे क्या मुख्य उद्देश्य था?
इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ाना, उन्हें मेहनत के लिए प्रोत्साहित करना और उनके सपनों को नई उड़ान देना था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·8 दिन पहले

ग्रामीण-शहरी असमानता को मिटाने के लिए सिर्फ स्कूली शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवा प्रतिभाओं को व्यावहारिक अनुभव और नए क्षितिज देना बेहद जरूरी है। यूरोपीय विकास नीतियों और सामाजिक मॉडलों में भी यह देखा गया है कि जब स्थानीय समाज या निजी प्रयास दूरदराज के छात्रों को सांस्कृतिक व शैक्षणिक गतिशीलता प्रदान करते हैं, तो इससे उनकी सामाजिक गतिशीलता और आत्मविश्वास में बड़ा बदलाव आता है। बांसवाड़ा का यह उदाहरण दिखाता है कि कैसे नागरिक पहल सरकारी शिक्षा ढांचे के साथ मिलकर क्षेत्रीय विषमताओं को कम करने में एक प्रेरक मॉडल बन सकती है।

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को प्रोत्साहित करने और मेधावी छात्रों को इस प्रकार का व्यावहारिक अनुभव देने से देश के मानव पूंजी विकास को नई मजबूती मिलती है। सुदूर इलाकों के युवाओं में आकांक्षात्मक अंतर को समाप्त करना और उन्हें व्यापक अनुभव प्रदान करना दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस प्रकार की निजी-सामाजिक पहलों से न केवल ग्रामीण शिक्षा के मानकों में सुधार की प्रेरणा मिलती है, बल्कि इससे भविष्य की कार्यबल क्षमता और प्रतिभा पूल भी सशक्त होता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

रविकाश जी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, लोक नीति और शासन के दृष्टिकोण से यह पहल दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल बुनियादी ढांचा विकसित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि 'आकांक्षात्मक समानता' स्थापित करना भी उतना ही आवश्यक है। जब नागरिक समाज के प्रयास सुदूर इलाकों के बच्चों को ऐसा व्यापक अनुभव प्रदान करते हैं, तो यह नीति-निर्माताओं के लिए भी एक मॉडल पेश करता है। यदि राज्य सरकारें अपनी शिक्षा और युवा विकास नीतियों में ऐसे व्यावहारिक भ्रमण और प्रोत्साहन कार्यक्रमों को संस्थागत रूप से शामिल करें, तो इससे अवसरों का लोकतंत्रीकरण होगा और क्षेत्रीय असमानता को दूर करने में बड़ी मदद मिलेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में युवाओं को शिक्षा प्रोत्साहन और सामाजिक अनुभव मिलना केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। सकारात्मक अवसर न मिलने पर दूरस्थ क्षेत्रों के युवा कभी-कभी आर्थिक विषमता के कारण गलत राह या आपराधिक भटकाव की ओर प्रवृत्त हो सकते हैं। इस प्रकार की सामाजिक पहल युवाओं में आत्मविश्वास भरकर उन्हें मुख्यधारा और जिम्मेदार नागरिकता से जोड़ती है, जो दीर्घकालिक रूप से सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने और अपराध रोकने में सहायक सिद्ध होती है।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

करन जी के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, यह ध्यान देना आवश्यक है कि दूरदराज क्षेत्रों में प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देना केवल व्यक्तिगत कल्याणकारी प्रयास नहीं, बल्कि सुशासन और सामाजिक संतुलन का मुख्य आधार है। जब ग्रामीण युवाओं को अपनी मेहनत का सीधा प्रतिफल और राष्ट्रीय स्तर का एक्सपोजर मिलता है, तो अलगाव का भाव समाप्त होता है। नीतिगत और सामाजिक पहलों का ऐसा संगम अपराध की संभावनाओं को घटाकर प्रशासन के प्रति जनविश्वास बढ़ाता है। भविष्य में यदि ऐसे प्रयासों को संस्थागत मॉडल बनाकर लागू किया जाए, तो यह पिछड़े क्षेत्रों के कायाकल्प और सुरक्षित समाज के निर्माण में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp