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जयपुर में घर के बाहर खड़ी मोटरसाइकिल खुद ले गई पुलिस, झाड़ियों से जब्ती का नाटक सीसीटीवी फुटेज से उजागरराजस्थान
9 सित॰ 2026, 5:43 pm (16 दिन पहले)· 3

जयपुर में घर के बाहर खड़ी मोटरसाइकिल खुद ले गई पुलिस, झाड़ियों से जब्ती का नाटक सीसीटीवी फुटेज से उजागर

जयपुर के शांति नगर में पुलिस पर घर के बाहर खड़ी बाइक खुद उठाकर झाड़ियों से बरामदगी का नाटक रचने का आरोप लगा है। पीड़ित के घर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद पुलिस के सरकारी दावों की पोल खुल गई है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर के गुर्जर की थड़ी इलाके से पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाने वाला एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शांति नगर में वाहन चोरी के एक मामले की जांच करने पहुंची पुलिस पर आरोप लगा है कि उन्होंने एक स्थानीय निवासी के घर के बाहर खड़ी मोटरसाइकिल को खुद ही उठवा लिया। इसके बाद उस वाहन को झाड़ियों में छिपाकर चोरों की निशानदेही पर बरामद दिखाने का एक फर्जी ढांचा तैयार कर लिया गया। हालांकि, घर के बाहर लगे सुरक्षा कैमरों की रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद पूरी कहानी पलट गई और पुलिस के दावों की पोल खुल गई।

गुर्जर की थड़ी और शांति नगर में 2 सितंबर का घटनाक्रम

यह पूरा वाकया 2 सितंबर की रात का है, जब स्थानीय पुलिस की टीम चोरी की मोटरसाइकिलों की बरामदगी के सिलसिले में शांति नगर इलाके में दाखिल हुई थी। उस समय पुलिस ने वाहन चोरी के आरोप में 2 संदिग्धों को हिरासत में ले रखा था। हिरासत में लिए गए चोरों द्वारा दी गई कथित जानकारी या भ्रम की स्थिति के बीच, पुलिसकर्मी अपने साथ कुछ अन्य युवकों को लेकर एक लोडिंग टेंपो में सवार होकर पहुंचे। यह टीम शांति नगर निवासी राजेंद्र शर्मा के घर के बाहर रुकी।

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राजेंद्र शर्मा के मकान के बाहर उनकी मोटरसाइकिल सामान्य रूप से खड़ी हुई थी। वहां पहुंचे पुलिसकर्मियों और उनके सहयोगियों ने बिना किसी झिझक के उस मोटरसाइकिल को उठाया और लोडिंग टेंपो में लादकर वहां से रवाना हो गए। इसके बाद उस गाड़ी को ले जाकर शहर के एक सुनसान इलाके में झाड़ियों के पीछे छिपा दिया गया। बाद में आधिकारिक दस्तावेजों में यह फर्जी रिपोर्ट तैयार की गई कि पकड़े गए दोनों संदिग्ध चोरों की निशानदेही पर इस मोटरसाइकिल को झाड़ियों से बरामद किया गया है।

सीसीटीवी फुटेज ने उजागर की पुलिसिया कहानी की हकीकत

अगली सुबह जब राजेंद्र शर्मा और उनके परिवार के सदस्यों ने घर के बाहर खड़ी अपनी मोटरसाइकिल गायब देखी, तो उन्हें लगा कि रात में कोई अज्ञात चोर उनकी गाड़ी चुरा ले गया है। सच्चाई का पता लगाने के लिए परिवार ने तुरंत अपने घर और आसपास की इमारतों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। जब कैमरों की रिकॉर्डिंग प्ले की गई, तो उसमें नजर आए दृश्यों ने परिवार समेत पूरे इलाके के लोगों को हैरान कर दिया।

सीसीटीवी कैमरों की वीडियो रिकॉर्डिंग में साफ दिखाई दिया कि रात के अंधेरे में पुलिसकर्मी कुछ युवकों के साथ लोडिंग टेंपो लेकर राजेंद्र शर्मा के घर के बाहर पहुंचे थे। फुटेज में पुलिसकर्मी खुद ही राजेंद्र शर्मा की मोटरसाइकिल को उठाकर टेंपो में डालते हुए नजर आए। इस वीडियो साक्ष्य के सार्वजनिक होते ही पुलिस की उस कहानी पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए, जिसमें कहा गया था कि वाहन को चोरों की निशानदेही पर झाड़ियों से जब्त किया गया था। राजेंद्र शर्मा ने स्पष्ट आरोप लगाया कि उनकी मोटरसाइकिल कभी चोरी हुई ही नहीं थी, बल्कि पुलिस टीम ने खुद उसे उठाकर फर्जी जब्ती का नाटक रचा।

पुलिस कार्रवाई की विश्वसनीयता पर उठते प्रशासनिक सवाल

सुरक्षा कैमरों के फुटेज सामने आने के बाद अब यह मामला महज एक गाड़ी की बरामदगी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने पुलिस विभाग की कार्यशैली और कागजी कार्यवाहियों की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवार का कहना है कि जब गाड़ी को पुलिसकर्मियों ने खुद घर के बाहर से उठाया था, तो उसे सरकारी रिकॉर्ड में झाड़ियों से बरामद क्यों दिखाया गया? क्या अपनी उपलब्धि और बरामदगी का आंकड़ा बढ़ाने के लिए इस प्रकार की फर्जी पटकथा तैयार की गई थी?

इस पूरे घटनाक्रम के बाद उच्चस्तरीय प्रशासनिक जांच की मांग जोर पकड़ रही है। जानकारों का मानना है कि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और पुलिसिया दस्तावेजों के बीच मौजूद इस भारी अंतर की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसकी शह पर इस तरह की गलत कार्रवाई को अंजाम दिया गया और इसके पीछे जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।

जयपुर में कानून-व्यवस्था की स्थिति और हालिया अन्य घटनाक्रम

जयपुर में पुलिस कार्रवाई पर खड़े हुए इन सवालों के बीच शहर में कानून-व्यवस्था से जुड़ी अन्य घटनाओं को लेकर भी तनाव देखा गया है। हाल ही में जयपुर के ऐतिहासिक आमेर क्षेत्र में एक टूरिस्ट गाइड पर चाकू से हमला किए जाने की गंभीर घटना सामने आई थी। चाकूबाजी की इस घटना में गंभीर रूप से घायल हुए टूरिस्ट गाइड ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिसके बाद स्थानीय लोगों और गाइडों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

टूरिस्ट गाइड की दुखद मौत और उसके बाद भड़के जन आक्रोश को देखते हुए प्रशासन को आमेर के किले को पर्यटकों के लिए पूरी तरह से बंद करना पड़ा। राजधानी में एक तरफ अपराध और चाकूबाजी की घटनाएं और दूसरी तरफ पुलिस द्वारा की जा रही संदिग्ध कार्यवाहियों ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिया तंत्र की जवाबदेही पर कई सवाल खड़ा कर दिए हैं।

सवाल-जवाब

जयपुर में बाइक बरामदगी का यह विवादित मामला किस क्षेत्र का है?
यह मामला जयपुर के गुर्जर की थड़ी स्थित शांति नगर इलाके का है, जहां 2 सितंबर की रात को यह घटना हुई थी।
पुलिसकर्मियों पर पीड़ित परिवार ने क्या आरोप लगाया है?
पीड़ित राजेंद्र शर्मा का आरोप है कि उनकी बाइक चोरी नहीं हुई थी, बल्कि पुलिसकर्मियों ने खुद घर के बाहर से बाइक उठवाई और उसे झाड़ियों से बरामद होना बताया।
सीसीटीवी फुटेज में पुलिस की क्या हरकत कैद हुई?
सीसीटीवी फुटेज में पुलिसकर्मी कुछ युवकों के साथ लोडिंग टेंपो लेकर पहुंचे और घर के बाहर खड़ी बाइक को टेंपो में डालकर ले जाते हुए दिखाई दिए।
जयपुर में हाल ही में आमेर का किला क्यों बंद किया गया था?
जयपुर के आमेर क्षेत्र में चाकूबाजी की घटना में घायल टूरिस्ट गाइड की मृत्यु के बाद हुए भारी विरोध प्रदर्शन के कारण आमेर के किले को बंद करना पड़ा था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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