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कर्जत में 100 एकड़ पर शुरू हुआ अनंत आश्रय का काम, 5000 जरूरतमंदों को मिलेगा जीवनभर का सहाराभारत
1 नव॰ 2026, 10:58 pm (2 घंटे पहले)· 0

कर्जत में 100 एकड़ पर शुरू हुआ अनंत आश्रय का काम, 5000 जरूरतमंदों को मिलेगा जीवनभर का सहारा

मुंबई के पास कर्जत में रिलायंस फाउंडेशन ने नीता मुकेश अंबानी अनंत आश्रय का भूमि पूजन किया है। इस 100 एकड़ के परिसर में अनाथ बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों समेत 5,000 लोगों को आजीवन रहने, पढ़ने और इलाज की विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी।

मुंबई के पास कर्जत में समाज के वंचित तबके, बेसहारा बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों को स्थायी सुरक्षा देने के मकसद से एक विशाल आवासीय परिसर की नींव रखी गई है। रिलायंस फाउंडेशन की संस्थापक और चेयरपर्सन नीता एम अंबानी तथा डायरेक्टर ईशा अंबानी ने इस विशेष परियोजना के लिए भूमि पूजन संपन्न किया। 100 एकड़ में फैलने वाली इस एकीकृत टाउनशिप का नाम नीता मुकेश अंबानी अनंत आश्रय रखा गया है, जहां लगभग 5,000 लोगों को जीवनभर के लिए सुरक्षित छत, पारिवारिक माहौल, आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल और उच्च स्तरीय शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

हर उम्र के जरूरतमंदों के लिए पारिवारिक माहौल

इस सामाजिक पहल के पीछे की सोच को स्पष्ट करते हुए नीता अंबानी ने बताया कि एक मां के तौर पर बच्चों को सुरक्षित, स्वस्थ और खुशहाल देखना सबसे बड़ा सुख होता है। हर बच्चे को समाज में प्यार और सुरक्षा मिलनी चाहिए, चाहे उसकी पारिवारिक स्थिति जैसी भी हो। अनंत आश्रय उन तमाम व्यक्तियों को एक नया परिवार देने का प्रयास है, जिन्होंने अपनों को खो दिया है या जो कभी पारिवारिक स्नेह और सुरक्षा से वंचित रहे हैं।

नीता अंबानी के अनुसार, यह परिसर ऐसा सुरक्षित ठिकाना बनेगा जहां बच्चे भयमुक्त होकर पढ़ेंगे और अपने सपनों को साकार करेंगे। वहीं दूसरी ओर, बुजुर्गों को अकेलापन महसूस नहीं होगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन के साथ उनकी हर जरूरत का पूरा ध्यान रखे जाने का भरोसा मिलेगा। प्राकृतिक परिवेश, हरियाली और पशु-पक्षियों के बीच विकसित होने वाले इस केंद्र में संवेदनशील मानवीय देखभाल के साथ जरूरी चिकित्सीय सहायता भी चौबीसों घंटे सुलभ रहेगी।

आठ आवासीय गांव और कस्टमाइज्ड केयर सिस्टम

कर्जत में आकार लेने वाली इस 100 एकड़ की टाउनशिप को प्रकृति और पर्यावरण के पूरी तरह अनुकूल बनाया जा रहा है। इसके मास्टर प्लान में आठ अलग-अलग आवासीय गांव शामिल किए गए हैं, जिनका नामकरण भारत की पवित्र नदियों के नाम पर किया जाएगा। इन गांवों के भीतर छोटे-छोटे घरों का निर्माण होगा, ताकि वहां रहने वाले लोगों को किसी बड़े संस्थान की बजाय एक वास्तविक परिवार जैसा अनुभव मिले।

हर घर में समर्पित देखभालकर्ता और हाउस पैरेंट्स तैनात रहेंगे, जो सदस्यों की दिनचर्या और देखभाल की निगरानी करेंगे। इतना ही नहीं, परिसर में रहने वाले प्रत्येक सदस्य की शारीरिक सेहत, बीमारियों के इतिहास, शैक्षिक स्तर और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर अलग से व्यक्तिगत देखभाल योजनाएं बनाई जाएंगी। इससे हर बच्चे, बुजुर्ग या विशेष जरूरत वाले व्यक्ति को उसकी आवश्यकता के अनुरूप विशेष सहयोग मिल सकेगा।

स्वास्थ्य, स्कूल और वोकेशनल ट्रेनिंग की व्यापक सुविधाएं

टाउनशिप की रूपरेखा इस तरह तैयार की गई है कि निवासियों को अपनी बुनियादी और आधुनिक जरूरतों के लिए बाहर न जाना पड़े। परिसर के अंदर ही एक अत्याधुनिक अस्पताल और पुनर्वास केंद्र स्थापित किया जा रहा है, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टर, प्रशिक्षित नर्सें और विभिन्न थेरेपिस्ट सेवाएं देंगे। इसके साथ ही एक समावेशी स्कूल, खेल के मैदान, हरे-भरे पार्क और वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर की व्यवस्था भी की जा रही है।

परियोजना के तहत हॉस्पिस विंग का भी निर्माण होगा, जहां गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को जीवन के अंतिम पड़ाव में गरिमापूर्ण और दर्दमुक्त देखभाल दी जा सकेगी। इसके अलावा परिसर में एक बेकरी, कैफे, हस्तशिल्प स्टूडियो और एक विशेष फार्म भी तैयार होगा, जहां निवासी जानवरों के साथ समय बिता सकेंगे और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में भाग ले सकेंगे।

विशेष दिव्यांगता के लिए निरंतर मेडिकल सहायता और स्थानीय रोजगार

यह केंद्र ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मिर्गी और अन्य गंभीर दिव्यांगताओं का सामना कर रहे व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से मददगार साबित होगा, जिन्हें नियमित थेरेपी, मेडिकल निगरानी और निरंतर व्यक्तिगत सहारे की आवश्यकता होती है। यहां विशेषज्ञ दल की देखरेख में आधुनिक पुनर्वास सेवाएं लगातार उपलब्ध रहेंगी।

परियोजना का सामाजिक प्रभाव केवल चारदीवारी के भीतर रहने वाले 5,000 सदस्यों तक ही सीमित नहीं रहेगा। कर्जत और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लगभग 1,000 स्थानीय निवासियों को भी इस पहल से सीधा लाभ पहुंचेगा। उन्हें परिसर के जरिए कम्युनिटी हेल्थकेयर, थेरेपी सेवाएं, शिक्षा और सीधे रोजगार के व्यापक अवसर मुहैया कराए जाएंगे। आवश्यक प्रशासनिक और वैधानिक मंजूरियां मिलने के बाद इस गैर-लाभकारी परियोजना का निर्माण चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

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सवाल-जवाब

नीता मुकेश अंबानी अनंत आश्रय परियोजना कहां बनाई जा रही है?
यह परियोजना मुंबई के पास कर्जत में लगभग 100 एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही है।
इस परिसर में कितने लोगों को रहने की सुविधा मिलेगी?
इस टाउनशिप में लगभग 5,000 जरूरतमंदों, अनाथ बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को जीवनभर के लिए आवास मिलेगा।
इस परियोजना की आधारशिला किसने रखी?
रिलायंस फाउंडेशन की संस्थापक और चेयरपर्सन नीता एम अंबानी तथा डायरेक्टर ईशा अंबानी ने इसका भूमि पूजन किया और नींव रखी।
परिसर में आवासीय व्यवस्था किस प्रकार की होगी?
परिसर में भारत की पवित्र नदियों के नाम पर आठ आवासीय गांव बनाए जाएंगे, जिनमें हाउस पैरेंट्स और देखभालकर्ताओं के साथ छोटे-छोटे पारिवारिक घर होंगे।
टाउनशिप के अंदर स्वास्थ्य और शिक्षा की क्या सुविधाएं होंगी?
परिसर के भीतर एक समर्पित अस्पताल, पुनर्वास केंद्र, समावेशी स्कूल, खेल मैदान, हॉस्पिस विंग और वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
क्या इस परियोजना से स्थानीय ग्रामीणों को भी कोई फायदा होगा?
हां, कर्जत के आसपास के लगभग 1,000 स्थानीय ग्रामीणों को सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाएं, थेरेपी और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
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टिप्पणियाँ 5

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·38 मिनट पहले

अमेरिका में ऐसी प्राइवेट कम्युनिटी इनिशिएटिव्स काफी आम हैं जहाँ बड़े फाउंडेशन बुजुर्गों और अनाथों के लिए पूरा टाउनशिप बनाते हैं, लेकिन 100 एकड़ का ऐसा प्रोजेक्ट वाकई बहुत बड़ा स्केल है।

Ravikash Gupta@ravikash·59 मिनट पहले

5000 बेसहारा लोगों के लिए 100 एकड़ में ऐसा घर बनना सचमुच बड़ी बात है। कॉरपोरेट सीएसआर फंड का अगर ऐसा सही इस्तेमाल हो, तो समाज के जरूरतमंदों को वाकई बहुत बड़ा सहारा मिल जाता है।

Aisha Khan@aisha-khan·59 मिनट पहले

रविकेश, बात तो बिल्कुल सही कही आपने। पर क्या सच में यहाँ 5000 लोगों को संभाल पाना मुमकिन होगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

बेसहारा बुजुर्गों और बच्चों के लिए इतनी बड़ी जगह बनना वाकई बहुत सुकून की बात है, वरना ऐसे लोगों की सुध लेने वाला कोई नहीं होता।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

करण भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर क्या इतने बड़े परिसर में हर बुजुर्ग और बच्चे को वाकई वैसा ही घरेलू माहौल मिल पाएगा?

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