स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान प्रशासनिक मशीनरी की कार्यशैली को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। खैरथल में आयोजित एक सभा के दौरान पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने अधिकारियों पर चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता त्यागने का आरोप लगाते हुए तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ऐसे तमाम प्रशासनिक और पुलिस अफसरों की सूची तैयार करने का आह्वान किया, जिन पर तय नियमों की अनदेखी करने या किसी खास राजनीतिक दल के पक्ष में काम करने के आरोप लगे हैं।
अफसरों की भूमिका पर सवाल और लाल डायरी की बात
सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिन अधिकारियों ने अपनी सेवा शर्तों और पद की संवैधानिक शपथ का उल्लंघन कर राजनीतिक पक्षपात किया है, उनके नाम एक लाल डायरी में दर्ज किए जाएंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर ऐसे अधिकारियों का ब्योरा जुटाने और उनके नाम नेतृत्व को सौंपने को कहा। उनका कहना था कि अधिकारी अपनी निष्पक्षता छोड़कर राजनीतिक पक्ष बन गए, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक मर्यादा के खिलाफ है।
सत्ता परिवर्तन के बाद सख्त कानूनी कदम उठाने का दावा
प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि महज तबादला किसी भी अनियमितता या मनमानी का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने दावा किया कि डेढ़ साल बाद जब सत्ता में बदलाव होगा और कांग्रेस की सरकार बनेगी, तब नियमों की अनदेखी करने वाले अफसरों के खिलाफ केवल सामान्य स्थानांतरण तक सीमित रहने के बजाय सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सोशल मीडिया पर भी उनके इस भाषण और बयानों से जुड़े अंश तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। राहुल गांधी के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले और अलवर के पूर्व राजघराने से संबंध रखने वाले जितेंद्र सिंह ने सीधे तौर पर व्यवस्था को चेतावनी दी।
खैरथल नगर परिषद में बहुमत के बाद भी बोर्ड न बनने की पृष्ठभूमि
इस पूरे राजनीतिक टकराव के केंद्र में स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे और उसके बाद बना सियासी समीकरण है। 45 वार्डों वाली खैरथल नगर परिषद में कांग्रेस ने 20 वार्डों में जीत दर्ज की थी, जबकि 17 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे थे। दूसरी तरफ बीजेपी को महज 8 वार्डों में ही जीत हासिल हुई थी। संख्या बल के आधार पर बढ़त में होने के बावजूद कांग्रेस वहां अपना बोर्ड और सभापति बनाने में असफल रही।
चुनावी परिणाम घोषित होने के बाद खैरथल नगर परिषद में कांग्रेस के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और पार्षद विक्रम उर्फ विक्की चौधरी ने राजनीतिक पाला बदल लिया और बीजेपी में शामिल हो गए। वे अपने साथ कांग्रेस के 11 अन्य पार्षदों को भी ले गए। इसके बाद बीजेपी ने विक्की चौधरी को सभापति पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया, जिसके चलते कांग्रेस बढ़त में रहने के बाद भी सत्ता से बाहर हो गई और नगर परिषद पर बीजेपी का कब्जा हो गया।
तिजारा नगरपालिका का विवाद और पुलिस पर लगे आरोप
कांग्रेस ने निकाय चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुंचाया। पार्टी का आरोप है कि तिजारा नगरपालिका के पार्षदों को हरियाणा पुलिस की मदद से पंचकूला में रोका गया और उन्हें मतदान प्रक्रिया में भाग नहीं लेने दिया गया। पार्षदों को वोटिंग से रोके जाने के इस घटनाक्रम ने भी क्षेत्र में काफी राजनीतिक तूल पकड़ा था, जिसे लेकर प्रशासनिक निष्पक्षता पर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
























