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खाटूश्याम जी में वीकेंड पर उमड़ा आस्था का सैलाब, जलझूलनी एकादशी पर दिन-रात खुले रहेंगे कपाटराजस्थान
21 सित॰ 2026, 12:06 pm (4 दिन पहले)· 1

खाटूश्याम जी में वीकेंड पर उमड़ा आस्था का सैलाब, जलझूलनी एकादशी पर दिन-रात खुले रहेंगे कपाट

राजस्थान के सीकर स्थित खाटूश्याम जी मंदिर में वीकेंड पर लाखों भक्तों के पहुंचने के बाद मंदिर कमेटी ने 22 सितंबर को पड़ने वाली जलझूलनी एकादशी के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं, जिसके तहत मंदिर 24 घंटे खुला रहेगा।

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित सुप्रसिद्ध खाटू धाम में सप्ताहांत के दौरान आस्था और श्रद्धा का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। शनिवार की अलसुबह मंगला आरती के समय से ही देश भर से आए श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था, जो रविवार को भी लगातार जारी रहा। भक्तों के अपार जनसैलाब को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सामान्य दिनों में दोपहर के वक्त होने वाले कपाट बंदी के नियम को स्थगित कर दिया, जिससे दिनभर दोनों दिन दर्शन का सिलसिला बिना किसी रुकावट के चलता रहा। श्रद्धालुओं की भारी तादाद को सुगमता से दर्शन कराने के लिए 14 समानांतर कतारों की व्यवस्था अमल में लाई गई, साथ ही भीषण गर्मी से बचाव के लिए श्री श्याम मंदिर कमेटी ने भक्तों की सुख-सुविधा से जुड़े विशेष बंदोबस्त किए।

श्रृंगार दर्शन और रूट डायवर्जन के पुख्ता इंतजाम

सप्ताहांत की इस विशेष भीड़ के बीच बाबा श्याम का अलौकिक और मनमोहक श्रृंगार आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस दिव्य श्रृंगार के लिए देश की राजधानी दिल्ली से खास तौर पर सफेद, हरे और गुलाबी रंग के सुगंधित ताजे फूल मंगवाए गए थे। बाबा को श्रृंगार आरती के साथ-साथ संध्या आरती के दौरान भी भव्य रूप से सुसज्जित किया गया। सोमवार को आने वाले दर्शनार्थियों के लिए सुगम मार्ग प्रबंधन सुनिश्चित किया गया है। भक्तों को तोरणद्वार, अस्पताल चौराहा, शनि मंदिर और लामियां तिराहा के तयशुदा रास्ते से होते हुए मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंचाया जा रहा है।

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मंदिर परिसर के भीतर 75 फीट चौड़े विशाल मार्ग पर 14 पंक्तियों में कतारबद्ध होकर श्रद्धालु गर्भगृह के सामने पहुंच रहे हैं। व्यवस्था को नियंत्रित रखने के मकसद से कतार प्रबंधन, मजबूत बैरिकेडिंग और सुरक्षा कर्मियों की चाक-चौबंद तैनाती की गई है। व्यवस्था बनाए रखने के लिए सामान्य वीआईपी दर्शन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है, और केवल प्रोटोकॉल श्रेणी के अंतर्गत आने वाले व्यक्तियों को ही इस मार्ग से प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।

जलझूलनी एकादशी पर 24 घंटे दर्शन और विशेष पूजन

आगामी 22 सितम्बर को जलझूलनी एकादशी का पावन पर्व मनाया जाएगा, जिसको लेकर खाटूश्याम जी में अगले दो से तीन दिनों तक श्रद्धालुओं की संख्या में और भी भारी इजाफा होने का अनुमान लगाया गया है। इस पावन तिथि पर बाबा श्याम के विशेष श्रृंगार के बीच भगवान श्री कृष्ण के बाल गोपाल स्वरूप को भी प्रतिष्ठित किया जाएगा। उत्सव के दिन आयोजित होने वाली पांचों आरतियों में बाल गोपाल की विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न होगी। भोग आरती के शुभ अवसर पर बाबा श्याम और बाल गोपाल को पारंपरिक माखन, मिश्री और मावे का महाभोग अर्पित किया जाएगा।

उत्सव के आकर्षण को बढ़ाने के लिए देश-विदेश से जुटाए गए दुर्लभ खुशबूदार फूलों से मंदिर और विग्रह का मनमोहक श्रृंगार किया जाएगा, जबकि बाबा श्याम को नवरत्न जड़ित स्वर्ण निर्मित नया मुकुट भी धारण कराया जाएगा। श्रद्धालुओं की संभावित प्रचंड भीड़ को संभालने के लिए मंदिर प्रबंधन ने निर्णय लिया है कि जलझूलनी एकादशी पर मंदिर के कपाट पूरे 24 घंटे खुले रखे जाएंगे। सामान्य दिनों में दोपहर 2:00 बजे से लेकर 4:00 बजे तक मंदिर के पट बंद रहते हैं, सिवाय शनिवार, रविवार तथा शुक्ल पक्ष की एकादशी एवं द्वादशी के। इसके अलावा आम रातों में रात्रि 10.30 बजे शयन आरती के उपरांत मंदिर बंद हो जाता है, लेकिन इस उत्सव पर दिन अथवा रात में कपाट बिल्कुल बंद नहीं होंगे।

हारे का सहारा बनने की पौराणिक गाथा

धार्मिक मान्यताओं में बाबा श्याम को कलयुग में हारे का सहारा माना जाता है और उन्हें साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का अवतार मानकर पूजा जाता है। महाभारत काल के प्रसंग के अनुसार, महाबली भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों के पक्ष से युद्ध भूमि में उतरने की तैयारी कर रहे थे। उसी समय भगवान श्रीकृष्ण ने एक ब्राह्मण का रूप धारण कर उनसे शीश का दान मांग लिया। वीर बर्बरीक ने बिना किसी संकोच अथवा हिचकिचाहट के अपना शीश काटकर भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया। उनके इस सर्वोच्च बलिदान और समर्पण से अत्यंत प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान प्रदान किया कि कलयुग के समय में वे उनके ही स्वरूप यानी श्याम नाम से पूजे जाएंगे और संसार में हर हारे हुए एवं निराश व्यक्ति का संबल बनेंगे। इसी दैवीय वरदान के कारण सदियों से बाबा श्याम को श्रद्धालु हारे के सहारे के रूप में भजते आ रहे हैं।

सवाल-जवाब

खाटूश्याम जी में जलझूलनी एकादशी कब मनाई जाएगी?
खाटूश्याम जी मंदिर में जलझूलनी एकादशी का पावन पर्व 22 सितम्बर को मनाया जाएगा।
जलझूलनी एकादशी पर मंदिर में दर्शन के समय क्या रहेंगे?
भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए जलझूलनी एकादशी पर मंदिर के कपाट पूरे 24 घंटे खुले रहेंगे और दिन में भी पट बंद नहीं होंगे।
एकादशी पर बाबा श्याम का श्रृंगार किस प्रकार किया जाएगा?
बाबा श्याम का श्रृंगार देश-विदेश से लाए गए खुशबूदार फूलों से होगा और उन्हें 9 रत्न जड़ित सोने का नया मुकुट पहनाया जाएगा।
श्रद्धालुओं के प्रवेश के लिए कौन सा मार्ग तय किया गया है?
श्रद्धालुओं को तोरणद्वार, अस्पताल चौराहा, शनि मंदिर और लामियां तिराहा होते हुए 75 फीट चौड़े मार्ग की 14 कतारों से प्रवेश दिया जा रहा है।
क्या वर्तमान में मंदिर में वीआईपी दर्शन की अनुमति है?
मंदिर में सामान्य वीआईपी दर्शन पूरी तरह बंद हैं और केवल आधिकारिक प्रोटोकॉल के तहत ही वीआईपी प्रवेश दिया जा रहा है।
बाबा श्याम को 'हारे का सहारा' क्यों कहा जाता है?
महाभारत काल में बर्बरीक द्वारा श्रीकृष्ण को शीश दान करने पर उन्हें वरदान मिला था कि कलयुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे और हारे हुए लोगों का सहारा बनेंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

खाटूश्याम जी मंदिर में वीकेंड की भारी भीड़ और आगामी जलझूलनी एकादशी पर 24 घंटे कपाट खुले रखने के निर्णय से स्पष्ट है कि धार्मिक पर्यटन अब बड़े पैमाने पर स्थानीय आर्थिकी और लॉजिस्टिक्स को संचालित कर रहा है। 14 समानांतर कतारों और वीआईपी दर्शन पर रोक जैसे प्रशासनिक कदम इस बात का संकेत हैं कि भीड़ प्रबंधन अब आयोजनों की सफलता और सुरक्षा की पहली शर्त बन चुका है।

Aisha Khan@aisha-khan·3 दिन पहले

धार्मिक उत्सवों का यह विराट स्वरूप अब आधुनिक इवेंट मैनेजमेंट और मास टूरिज्म का एक ऐसा मॉडल बन चुका है, जहाँ तकनीक, सुरक्षा प्रोटोकॉल और लॉजिस्टिक्स सीधे तौर पर किसी बड़े वैश्विक आयोजन की तर्ज पर काम कर रहे हैं। जिस तरह से दिल्ली के फूलों से लेकर 14 कतारों और वीआईपी पास पर रोक जैसे कड़े फैसले लिए गए हैं, उससे यह साफ है कि आने वाले समय में देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन ही मंदिर प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता और चुनौती दोनों रहने वाली है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

भीड़ प्रबंधन और जलझूलनी एकादशी पर चौबीस घंटे कपाट खुले रखने का निर्णय धार्मिक पर्यटन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव और स्थानीय बुनियादी ढांचे पर दबाव को रेखांकित करता है। ऐसे आयोजनों में वीआईपी दर्शन पर रोक का निर्णय और चौदह समानांतर कतारों जैसी व्यवस्थाएं बड़े पैमाने पर भीड़ नियंत्रण के लिए मॉडल बन सकती हैं, बशर्ते जिला प्रशासन आने वाले दिनों में सुरक्षा और यातायात के दबाव को प्रभावी ढंग से संभाल सके।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

जलझूलनी एकादशी पर चौबीस घंटे कपाट खुले रखने और वीआईपी दर्शन रोकने का निर्णय मंदिर प्रबंधन की एक व्यावहारिक प्रशासनिक पहल है। भारी भीड़ के बीच चौदह समानांतर कतारों और सात फीट चौड़े मार्ग जैसी व्यवस्थाएं भक्तों को सुगम दर्शन कराने में मददगार साबित होंगी, हालांकि आने वाले दिनों में और अधिक जनसैलाब उमड़ने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा बलों को अतिरिक्त सतर्क रहना होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

भीड़ प्रबंधन के लिहाज से चौबीस घंटे कपाट खुले रखने और वीआईपी दर्शन पर रोक लगाने का कदम सराहनीय है, लेकिन आने वाले दिनों में जब लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे, तब स्थानीय पुलिस और प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। मंदिर परिसर के भीतर चौदह समानांतर कतारों और तयशुदा रूट चार्ट के बावजूद, संभावित भगदड़ या अव्यवस्था को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती और निरंतर निगरानी बेहद जरूरी होगी, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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