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किन्नौर कांग्रेस कमेटी पर बढ़ा विवाद, कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ खोला मोर्चाहिमाचल प्रदेश
18 सित॰ 2026, 5:19 pm (4 दिन पहले)· 0

किन्नौर कांग्रेस कमेटी पर बढ़ा विवाद, कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ खोला मोर्चा

हिमाचल प्रदेश के कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने किन्नौर जिला कांग्रेस कमेटी के पुनर्गठन को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए संगठन में बाहरी और निष्क्रिय लोगों को शामिल करने का आरोप लगाया है।

हिमाचल प्रदेश की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलावों को लेकर शुरू हुआ आंतरिक विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। किन्नौर जिले में पार्टी के भीतर पिछले कई महीनों से सुलग रही चिंगारी ने अब एक बड़े सियासी घमासान का रूप ले लिया है। हिमाचल सरकार के कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगत सिंह नेगी ने नवगठित जिला कांग्रेस कमेटी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने संगठन के नए ढांचे पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इस नई कार्यकारिणी में उन पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है जिन्होंने लंबे समय तक पार्टी को सींचा है।

जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी पर तीखे आरोप

जगत सिंह नेगी ने नई जिला कांग्रेस कमेटी के गठन पर बेहद तल्ख टिप्पणी की है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए दावा किया कि नई कमेटी में किन्नौर की असली कांग्रेस से जुड़े एक भी सच्चे कार्यकर्ता को जगह नहीं दी गई है। मंत्री ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि संगठन में केवल स्लीपर सेल और जय चन्दों को तरजीह दी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठा दिया गया है जो पहले कभी भी कांग्रेस के सक्रिय संगठनात्मक ढांचे या जमीनी गतिविधियों का हिस्सा नहीं रहे हैं।

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नई जिला कांग्रेस कमेटी यानी DCC के पुनर्गठन की प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगाते हुए नेगी ने कहा कि नेतृत्व को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि पुरानी कार्यकारिणी के साथ क्या किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि किन्नौर में वर्षों से कांग्रेस के लिए पसीना बहाने वाले वफादार कार्यकर्ताओं को नई समिति में कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। नेगी के अनुसार, वास्तविक और कर्मठ कांग्रेसियों की इस तरह की उपेक्षा पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित होगी और यह कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ने वाला कदम है।

'पैराशूट नेताओं' के प्रवेश पर साधा निशाना

संगठन में अचानक ऊंचे पदों पर काबिज होने वाले नेताओं पर तंज कसते हुए कैबिनेट मंत्री ने 'पैराशूट नेताओं' को जगह दिए जाने पर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किन्नौर जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्र में कांग्रेस का संगठन दशकों की कड़ी मेहनत, संघर्ष और कार्यकर्ताओं के बलिदान के बाद खड़ा हुआ है। नेगी ने जोर देकर कहा कि जिन कार्यकर्ताओं ने विपरीत परिस्थितियों और पार्टी के सबसे मुश्किल दौर में भी कांग्रेस का झंडा थामे रखा, उन्हें इस तरह से अपमानित नहीं किया जाना चाहिए।

विवाद की मुख्य वजह 56 सदस्यों वाली नई जिला कांग्रेस कमेटी का गठन है। नेगी का दावा है कि पुरानी कार्यकारिणी के अनुभवी और सक्रिय नेताओं को दरकिनार करके इस नई कमेटी को तैयार किया गया है। उन्होंने मांग की कि संगठन के पुराने और कर्मठ कार्यकर्ताओं को ही DCC में उचित और सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए था। उनका कहना है कि निष्क्रिय और नए लोगों को सीधे संगठन के शीर्ष पर बिठाने से पार्टी के भीतर असंतोष की भावना तेजी से फैल रही है।

ब्लॉक कमेटियों को भंग करने के फैसले का विरोध

जिला स्तर पर बदलावों के अलावा, जगत सिंह नेगी ने ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को अचानक भंग किए जाने के निर्णय पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने संगठनात्मक नियमों का हवाला देते हुए कहा कि ब्लॉक कमेटियां पहले से ही सुचारू रूप से काम कर रही थीं और जिला कांग्रेस कमेटी का गठन तो उनके बाद हुआ था। ऐसे में नेगी ने सवाल उठाया कि जब ब्लॉक स्तर पर संगठन मजबूत और सक्रिय था, तो फिर पूरे ढांचे को इस तरह से बदलने की क्या जरूरत आन पड़ी थी।

किन्नौर में अपने परिवार के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए नेगी ने पार्टी आलाकमान को अपने गहरे जुड़ाव का अहसास कराया। उन्होंने बताया कि उनके पिता दो बार विधायक रहे और उन्होंने उस कठिन दौर में कांग्रेस का प्रचार किया जब किन्नौर में लोग इस पार्टी के नाम से भी वाकिफ नहीं थे। खुद जगत सिंह नेगी भी कई दशकों से निरंतर कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं और वर्तमान में वह पांचवीं बार विधायक चुने गए हैं। कैबिनेट मंत्री के इस खुले विद्रोह ने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में चल रही गुटबाजी और अंतर्विरोध को पूरी तरह से उजागर कर दिया है।

सवाल-जवाब

किन्नौर जिला कांग्रेस कमेटी पर किसने सवाल उठाए हैं?
हिमाचल प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ नेता जगत सिंह नेगी ने नवगठित किन्नौर जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जगत सिंह नेगी ने नई कार्यकारिणी के सदस्यों को लेकर क्या आरोप लगाया है?
नेगी का आरोप है कि असली जमीनी कार्यकर्ताओं को दरकिनार करके केवल 'स्लीपर सेल' और 'जय चन्दों' को ही कमेटी में जगह दी गई है।
नई किन्नौर जिला कांग्रेस कमेटी में कुल कितने सदस्य हैं?
नई गठित की गई जिला कांग्रेस कमेटी में कुल 56 सदस्य शामिल किए गए हैं।
जगत सिंह नेगी का किन्नौर कांग्रेस में क्या ऐतिहासिक महत्व है?
नेगी वर्तमान में पांचवीं बार विधायक हैं और उनके पिता भी इस क्षेत्र से दो बार विधायक रहे हैं, जिन्होंने किन्नौर में कांग्रेस की स्थापना में बड़ी भूमिका निभाई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 दिन पहले

हिमाचल प्रदेश में जगत सिंह नेगी का अपनी ही सरकार के खिलाफ यह सार्वजनिक असंतोष कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे के भीतर अंतर्विरोधों को उजागर करता है। किन्नौर जैसे सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से संवेदनशील जिले में जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से पार्टी का मनोबल प्रभावित हो सकता है। यदि इस असंतोष को समय रहते उच्च नेतृत्व द्वारा नहीं संभाला गया, तो यह आगामी राजनीतिक और चुनावी समीकरणों में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में कांग्रेस के भीतर उपजा यह घमासान केवल स्थानीय स्तर की कलह नहीं, बल्कि पहाड़ी राज्यों में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की कमजोरी को उजागर करता है। जब सरकार के वरिष्ठ मंत्री ही जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी और 'पैराशूट नेताओं' के वर्चस्व का सार्वजनिक रूप से विरोध करते हैं, तो इससे निवेशकों और कॉर्पोरेट जगत के बीच भी राज्य की राजनीतिक स्थिरता को लेकर गलत संदेश जाता है। यदि समय रहते इस आंतरिक असंतोष को शांत नहीं किया गया, तो आगामी राजनीतिक समीकरणों और विकास कार्यों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है, जो अंततः क्षेत्रीय आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी प्रभावित करेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 दिन पहले

जगत सिंह नेगी जैसे कद्दावर मंत्री का सार्वजनिक रूप से मोर्चा खोलना यह संकेत देता है कि पार्टी में समन्वय की भारी कमी है। यदि शीर्ष नेतृत्व ने इस असंतोष को समय रहते दूर नहीं किया, तो इसका सीधा असर आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों और संगठन की एकजुटता पर पड़ेगा, जिससे विपक्ष को राजनीतिक लाभ मिलने की पूरी संभावना है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

हिमाचल प्रदेश की सियासत में किन्नौर कांग्रेस का यह आंतरिक घमासान प्रशासनिक और राजनीतिक स्थिरता दोनों के लिए संवेदनशील मोड़ पर आया है। कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी द्वारा 'स्लीपर सेल' और 'पैराशूट नेताओं' जैसे गंभीर आरोप लगाना यह दर्शाता है कि संगठनात्मक असंतोष अब केवल अंदरूनी खींचतान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सार्वजनिक अनुशासनहीनता का रूप ले चुका है। यदि आलाकमान ने समय रहते इस 56-सदस्यीय जिला कमेटी के विवाद को नहीं सुलझाया, तो यह फूट आगामी चुनावी रणनीतियों और जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ को कमजोर कर सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

जगत सिंह नेगी जैसे वरिष्ठ और जमीनी नेता का अपनी ही सरकार के कार्यकाल में इस तरह का खुला विद्रोह हिमाचल के सत्ता समीकरणों में गहरी दरार का संकेत है। किन्नौर जैसे सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिले में वफादार कैडर की उपेक्षा से पार्टी का जमीनी नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हो सकता है, जिससे विपक्ष को राजनीतिक लाभ मिलने की पूरी संभावना बन रही है।

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