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कोटा में मिड-डे मील बना आफत, कद्दू की सब्जी खाते ही 23 बच्चों की तबीयत बिगड़ीराजस्थान
24 अग॰ 2026, 8:12 pm (31 दिन पहले)· 3

कोटा में मिड-डे मील बना आफत, कद्दू की सब्जी खाते ही 23 बच्चों की तबीयत बिगड़ी

कोटा के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील में कद्दू की सब्जी खाने से 23 बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सभी को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां नेताओं और अधिकारियों ने पहुंचकर उनका हालचाल जाना।

राजस्थान के कोटा जिले के पुनिया देवरी स्थित एक सरकारी विद्यालय में मिड-डे मील का सेवन करने के बाद लगभग 23 विद्यार्थियों की अचानक तबियत खराब हो गई। भोजन करने के कुछ ही देर बाद बच्चों को उल्टियां होने लगीं, दस्त की शिकायत हुई और चक्कर आने लगे। इस घटना के सामने आने से विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों के बीच हड़कंप मच गया। आनन-फानन में बच्चों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने फौरन उनका उपचार शुरू किया।

अभिभावकों में रोष और जांच की मांग

एक साथ इतने सारे बच्चों के बीमार पड़ने की खबर मिलते ही परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए। गुस्साए परिजनों ने विद्यालय में परोसे जाने वाले पोषाहार की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, बच्चों की सेहत बिगड़ने की असली वजह क्या थी, यह बात खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह साफ हो पाएगी।

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शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का सख्त रुख

मामले की गंभीरता को भांपते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने संबंधित अधिकारियों को इस पूरे प्रकरण की तत्काल जांच के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से फोन पर सीधे संपर्क कर बच्चों के स्वास्थ्य का जायजा लिया और इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने की सख्त हिदायत दी। इसके साथ ही, मंत्री ने पोषाहार के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता परखने और यदि भोजन में कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग के तमाम अधिकारी भी लगातार अस्पताल पहुंचकर बच्चों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

ओम बिरला और स्थानीय नेताओं का दौरा

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी अस्पताल प्रशासन से फोन पर बच्चों के स्वास्थ्य की पूरी जानकारी ली और उचित दिशा-निर्देश दिए। दूसरी ओर, भाजपा नेता बद्री गोचर के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं का दल भी अस्पताल पहुंचा और वहां भर्ती बच्चों तथा उनके परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया। फिलहाल अस्पताल में उपचाराधीन सभी बच्चों की हालत खतरे से बाहर और ठीक बताई जा रही है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मिड-डे मील के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। अब रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है ताकि यह साफ हो सके कि बच्चों की तबीयत खराब होने के पीछे पोषाहार की खराब गुणवत्ता थी या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था।

सवाल-जवाब

कोटा में बच्चों की तबीयत क्यों बिगड़ी?
सरकारी स्कूल में मिड-डे मील के तहत परोसी गई कद्दू की सब्जी खाने के बाद 23 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई।
बच्चों को इलाज के लिए कहां ले जाया गया?
उल्टी-दस्त और चक्कर आने की शिकायत के बाद बच्चों को तुरंत मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया।
शिक्षा मंत्री ने इस मामले में क्या निर्देश दिए?
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं और पोषाहार के सैंपल लेकर गुणवत्ता जांचने को कहा है।
अस्पताल में भर्ती बच्चों की फिलहाल कैसी हालत है?
अस्पताल में भर्ती सभी बच्चों की हालत फिलहाल ठीक और खतरे से बाहर बताई जा रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·31 दिन पहले

कोटा की यह घटना केवल एक स्थानीय लापरवाही नहीं, बल्कि देश भर के सरकारी स्कूलों में आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स प्रबंधन की बड़ी विफलता को दर्शाती है। जब तक मिड-डे मील जैसी संवेदनशील योजनाओं में ब्लॉकचेन आधारित पारदर्शी ट्रैकिंग और थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट को अनिवार्य नहीं किया जाता, तब तक बच्चों के स्वास्थ्य से इस तरह के खिलवाड़ को रोकना असंभव होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·31 दिन पहले

रविकेश गुप्ता के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह समझना आवश्यक है कि ऐसी घटनाओं से न केवल प्रशासनिक मशीनरी की पोल खुलती है, बल्कि नीतिगत क्रियान्वयन में मौजूद गहरी खामियां भी उजागर होती हैं। जब तक जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की जाती और पोषाहार वितरण में थर्ड-पार्टी ऑडिट को कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं बनाया जाता, तब तक बच्चों के जीवन से खिलवाड़ का यह सिलसिला थमता नहीं दिखेगा। शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन को अब केवल सैंपलिंग तक सीमित न रहकर सप्लाई चेन की साप्ताहिक निगरानी का एक सख्त मैकेनिज्म तैयार करना होगा, ताकि राजनीतिक दौरों से आगे बढ़कर वास्तविक सुधार धरातल पर उतर सकें।

Karan Malhotra@karan-malhotra·31 दिन पहले

यह घटना बच्चों की सुरक्षा और पोषाहार वितरण प्रणाली की पोल खोलती है। कानूनी रूप से यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि बाल अधिकारों का हनन और आपराधिक उपेक्षा का मामला बन सकता है। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में स्कूल प्रबंधन और सप्लायर की जवाबदेही तय होनी चाहिए। यदि विधिक जांच में मिलावट या गंभीर कोताही पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ केवल विभागीय कार्रवाई नहीं बल्कि आपराधिक मुकदमे दर्ज होने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

Rohan Verma@rohan-verma·31 दिन पहले

सहकर्मी करण मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह रेखांकित करना आवश्यक है कि सरकारी योजनाओं में जमीनी निगरानी का अभाव ऐसी त्रासदियों को जन्म देता है। जब तक स्कूलों और एजेंसियों के स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी और नमूनों की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक बच्चों के जीवन से यह खिलवाड़ थमेगा नहीं। अब यह देखना होगा कि लैब रिपोर्ट आने के बाद प्रशासनिक तंत्र केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहता है या वास्तव में दोषियों पर विधिक शिकंजा कसता है।

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