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कुंडली बॉर्डर पर फुटओवर ब्रिज निर्माण के चलते चार रातें बंद रहेगा मुख्य मार्ग, नोएडा में भी डायवर्जन लागूहरियाणा
20 सित॰ 2026, 4:36 pm (2 दिन पहले)· 4

कुंडली बॉर्डर पर फुटओवर ब्रिज निर्माण के चलते चार रातें बंद रहेगा मुख्य मार्ग, नोएडा में भी डायवर्जन लागू

नेशनल हाईवे 44 पर कुंडली सीमा के पास निर्माण कार्य के कारण 22 से 25 सितंबर तक रात में वाहनों की आवाजाही सर्विस लेन से होगी, जबकि ग्रेटर नोएडा में विशेष आयोजन को लेकर मालवाहक वाहनों पर पाबंदी लगाई गई है।

राजधानी से उत्तर की ओर सफर करने वाले मुसाफिरों और मालवाहक गाड़ियों के लिए आगामी दिनों में यातायात व्यवस्था में बदलाव देखने को मिलेगा। दिल्ली से सोनीपत की दिशा में आगे बढ़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 44 के मुख्य कैरिजवे पर चार दिनों तक रात के समय आवाजाही सीमित रहेगी। कुंडली सीमा क्षेत्र में पैदल यात्रियों के लिए ओवरब्रिज तैयार किया जा रहा है, जिसकी वजह से सुरक्षा कारणों से मार्ग को आंशिक तौर पर नियंत्रित करने का निर्णय लिया गया है।

सोनीपत मार्ग पर रात ग्यारह बजे से तड़के पांच बजे तक प्रतिबंध

यह यातायात नियमन मंगलवार, 22 सितंबर की रात से प्रभावी होकर शुक्रवार, 25 सितंबर के तड़के तक चलेगा। इस व्यवस्था के अंतर्गत पूरे दिन मार्ग अवरुद्ध नहीं रहेगा, बल्कि केवल रात्रि 11 बजे से अगली सुबह 5 बजे की समयावधि में ही पाबंदी लागू की जाएगी। इस दौरान मुख्य सड़क के करीब 400 मीटर के दायरे में सामान्य आवागमन प्रभावित रहेगा, ताकि क्रेन और भारी निर्माण उपकरणों के संचालन के समय किसी तरह की दुर्घटना का खतरा न रहे।

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निर्माण स्थल के समानांतर मौजूद सर्विस लेन पर गाड़ियों को भेजा जाएगा, जिससे सफर जारी रखा जा सके। ज़मीनी स्तर पर स्थिति नियंत्रित रखने और जाम से बचाव के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की गई है। अधिकारियों ने लंबी दूरी के चालकों और नियमित यात्रियों से आग्रह किया है कि वे इस तय समय सारिणी को ध्यान में रखकर ही अपनी यात्रा आरंभ करें और मौके पर तैनात कर्मियों के संकेतों का पालन करें।

गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में प्रेरणा विमर्श आयोजन के कारण मालवाहकों पर रोक

दूसरी ओर, गौतमबुद्धनगर जिले में भी रविवार को व्यापक रूट बदलाव लागू किए गए हैं। ग्रेटर नोएडा के गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित 'प्रेरणा विमर्श 2026' कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। सुबह 7 बजे से लेकर रात्रि 10 बजे तक नोएडा और ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाले एक्सप्रेसवे सहित आयोजन स्थल के नजदीकी रास्तों पर भारी, मध्यम और हल्के मालवाहक वाहनों के प्रवेश को पूरी तरह रोक दिया गया है।

हालांकि, आमजन की दैनिक जरूरतों को देखते हुए आवश्यक सेवाओं से जुड़ी गाड़ियों को इस रोक से बाहर रखा गया है। फल, हरी सब्जियां, दूध की आपूर्ति करने वाले वाहनों, दमकल गाड़ियों और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हल्के निजी वाहनों के लिए एक्सप्रेसवे पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन भीड़ बढ़ने की स्थिति में आवश्यकतानुसार उन्हें वैकल्पिक संपर्क मार्गों की तरफ मोड़ा जा रहा है।

चिल्ला और महामाया से लेकर परी चौक तक बदले हुए मार्ग

ट्रैफिक पुलिस की योजना के अनुसार, चिल्ला लाल बत्ती, डीएनडी टोल प्लाजा, फिल्म सिटी और महामाया फ्लाईओवर की ओर से परी चौक या जीरो प्वाइंट की तरफ जाने वाले वाहनों को रजनीगंधा चौराहे की ओर भेजा जा रहा है। ये गाड़ियां सेक्टर-18 तथा सेक्टर-37 अंडरपास से गुजरते हुए भंगेल एलिवेटेड रास्ते और सूरजपुर-कुलेसरा होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंच सकती हैं।

ग्रेटर नोएडा तथा यमुना एक्सप्रेसवे से नोएडा शहर में दाखिल होने वाले वाहनों को परी चौक से सूरजपुर तिराहा, कुलेसरा एवं फेज-2 के रास्तों का उपयोग करने का परामर्श दिया गया है। इसके अतिरिक्त, सेक्टर-132, 151 और 152 के कट से आने वाले चालकों की सुविधा के लिए जेनेसिस ग्लोबल स्कूल तथा डबल सर्विस लेन वाले संपर्क मार्गों को आवागमन के लिए निर्धारित किया गया है।

सवाल-जवाब

नेशनल हाईवे 44 पर कौन सा हिस्सा और कब बंद रहेगा?
दिल्ली से सोनीपत की ओर जाने वाला मुख्य मार्ग 22 से 25 सितंबर तक रोजाना रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक बंद रहेगा।
कुंडली बॉर्डर के पास रूट बंद करने की मुख्य वजह क्या है?
वहां राहगीरों की सुविधा के लिए एक नए फुटओवर ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसे सुरक्षित रूप से पूरा करने के लिए यह फैसला लिया गया है।
क्या एनएच-44 पर दिन के समय भी गाड़ियां रोकी जाएंगी?
नहीं, यह पाबंदी केवल रात के छह घंटों के लिए है और दिन के समय सामान्य यातायात जारी रहेगा।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर मालवाहक गाड़ियों पर रोक क्यों लगाई गई है?
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित 'प्रेरणा विमर्श 2026' कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और सुचारु यातायात के लिए भारी, मध्यम व हल्के मालवाहकों पर पाबंदी है।
ग्रेटर नोएडा में किन वाहनों को प्रतिबंध से छूट मिली है?
एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड तथा फल, सब्जी और दूध जैसी अनिवार्य वस्तुओं की ढुलाई करने वाले वाहनों को इस रोक से पूरी छूट दी गई है।
चिल्ला और डीएनडी से ग्रेटर नोएडा जाने वाले वाहनों के लिए क्या रास्ता तय किया गया है?
इन वाहनों को रजनीगंधा चौक, सेक्टर-18 और 37 अंडरपास से होते हुए भंगेल एलिवेटेड रोड और सूरजपुर-कुलेसरा मार्ग से भेजा जा रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·1 दिन पहले

मनोरंजन और फिल्म उद्योग के दृष्टिकोण से यह रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण है। नोएडा फिल्म सिटी और दिल्ली-एनसीआर का क्षेत्र वेब सीरीज, विज्ञापन और क्षेत्रीय फिल्मों की शूटिंग का एक बड़ा हब बन चुका है। रात 11 से सुबह 5 बजे तक के प्रतिबंधों और नोएडा एक्सप्रेसवे पर मालवाहकों पर रोक से रात के समय होने वाली शूटिंग (नाइट शूट्स) के लिए भारी उपकरण, लाइटें और वैनिटी वैन ले जाने वाले प्रोडक्शन वाहनों को भारी असुविधा होगी। लाइन प्रोड्यूसरों को अपनी यूनिट्स के सुचारू संचालन और समय पर काम पूरा करने के लिए अपने शूटिंग शेड्यूल और लॉजिस्टिक्स को तत्काल बदलना होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में बुनियादी ढांचे के विकास और बड़े सार्वजनिक आयोजनों के लिए यातायात डायवर्जन केवल स्थानीय पुलिस का मामला नहीं है, बल्कि यह अंतर-राज्यीय प्रशासनिक समन्वय और सार्वजनिक नीति की बड़ी चुनौती को दर्शाता है। दिल्ली-हरियाणा (NH-44) और दिल्ली-यूपी (नोएडा एक्सप्रेसवे) जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक गलियारों पर एक साथ लगने वाले ये प्रतिबंध माल ढुलाई और दैनिक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करते हैं। शासन के स्तर पर, ऐसे बड़े नीतिगत निर्णयों में राज्यों के बीच बेहतर पूर्व-नियोजन और वास्तविक समय में साझा सूचना तंत्र होना आवश्यक है ताकि एनसीआर की आर्थिक गतिशीलता बाधित न हो।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

अर्जुन जी की बात बिल्कुल सटीक है। जब हम आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण इन गलियारों (NH-44 और नोएडा एक्सप्रेसवे) को देखते हैं, तो यातायात में मामूली सा बदलाव भी औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और डिलीवरी लागत पर सीधा असर डालता है। मालवाहक वाहनों के डायवर्जन से न केवल ईंधन की खपत और यात्रा का समय बढ़ता है, बल्कि 'जस्ट-इन-टाइम' डिलीवरी पर निर्भर विनिर्माण इकाइयों और खुदरा व्यापार पर भी वित्तीय प्रभाव पड़ता है। बुनियादी ढांचे का विकास अनिवार्य है, लेकिन ऐसे नियोजित डायवर्जन के आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए राज्यों को समन्वित रूप से 'डिजिटल लॉजिस्टिक्स शेड्यूलिंग' अपनानी चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

बुनियादी ढांचे का विकास और बड़े आयोजनों का प्रबंधन एनसीआर में सुशासन की बड़ी परीक्षा है। कुंडली बॉर्डर पर रात में निर्माण कार्य से एनएच-44 पर दबाव तो कम रहेगा, लेकिन नोएडा एक्सप्रेसवे पर मालवाहकों पर लगी पाबंदी से लॉजिस्टिक्स और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। ऐसे में केवल डायवर्जन लागू करना काफी नहीं है; प्रशासन को वास्तविक समय में यातायात की स्थिति साझा करने और अंतर-राज्यीय समन्वय मजबूत करने की जरूरत है ताकि आर्थिक गतिविधियों को कम से कम नुकसान हो।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

यातायात डायवर्जन और बड़े आयोजनों का प्रबंधन केवल सुगम आवागमन का नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा का भी संवेदनशील मामला है। कुंडली बॉर्डर पर रात के समय और नोएडा में दिनभर मालवाहकों की आवाजाही रोकने से वैकल्पिक मार्गों पर अचानक दबाव बढ़ेगा। ऐसे में पुलिस और सुरक्षा बलों को अत्यधिक सतर्क रहना होगा, क्योंकि डायवर्जन वाले अंधेरे हिस्सों में रात के समय आपराधिक वारदातों और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, आपातकालीन सेवाओं के लिए निर्बाध मार्ग सुनिश्चित करना पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। जमीनी स्तर पर सख्त निगरानी और त्वरित सुरक्षा प्रतिक्रिया बल की तैनाती अनिवार्य है।

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