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लखनऊ में त्रिदंडी महासभा को लक्ष्मण टीले पर जलाभिषेक से रोका गया, सदस्यों ने कहा- जल जरूर चढ़ाएंगेउत्तर प्रदेश
24 अग॰ 2026, 3:04 pm (66 दिन पहले)· 2

लखनऊ में त्रिदंडी महासभा को लक्ष्मण टीले पर जलाभिषेक से रोका गया, सदस्यों ने कहा- जल जरूर चढ़ाएंगे

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में पुलिस ने त्रिदंडी महासभा को लक्ष्मण टीले पर जलाभिषेक करने से रोक दिया है। महासभा के सदस्य बिठूर से गंगाजल लेकर आए थे, लेकिन सुरक्षा और कानून व्यवस्था के मद्देनजर उन्हें रोक दिया गया, हालांकि महासभा ने जल चढ़ाने की अपनी जिद पर कायम रहने की बात कही है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बार फिर धार्मिक दावों और प्रशासनिक सख्ती का मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने अखण्ड आर्यावर्त आर्य त्रिदंडी महासभा को लक्ष्मण टीला परिसर में जलाभिषेक करने से रोक दिया। सावन के आखिरी सोमवार के मौके पर यह महासभा बिठूर से विशेष रूप से गंगाजल लेकर लखनऊ पहुंची थी। हालांकि कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका के चलते पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया और उसने महासभा के सदस्यों को सड़क पर तक नहीं निकलने दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए महासभा के दफ्तर के बाहर के साथ-साथ विवादित टीले वाली मस्जिद के आसपास भी भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

प्रशासनिक रोक के बावजूद महासभा के सदस्यों के तेवर कड़े नजर आ रहे हैं। उनका साफ तौर पर कहना है कि भले ही आज पुलिस ने उन्हें रोक दिया हो और वे जल नहीं चढ़ा पाए हों, लेकिन वे भविष्य में लक्ष्मण टीले पर जलाभिषेक जरूर करेंगे। इस पूरी जगह को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। वर्तमान में जिस स्थान पर टीले वाली मस्जिद स्थित है, वहां हिंदू पक्ष का दृढ़ विश्वास है कि असल में यह प्राचीन लक्ष्मण टीला और तिलेश्वर महादेव मंदिर है, जिसे मुगल काल में तोड़ा गया था। फिलहाल यह पूरा मामला अदालत के विचाराधीन है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं।

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हिंदू पक्ष की पूजा अधिकार की मांग

हिंदू पक्ष की ओर से पिछले कई सालों से लगातार यह मांग की जा रही है कि उन्हें लक्ष्मण के टीले पर निर्बाध रूप से पूजा-अर्चना करने का कानूनी अधिकार दिया जाए। हिंदू पक्ष का तर्क है कि लखनऊ के पुराने इलाके में बनी टीले वाली मस्जिद असल में एक प्राचीन लक्ष्मण टीला है। उनके अनुसार इस पावन स्थल पर शेष नागेश तिवेश्वर और शेष नागेश पटल कूप का मंदिर हुआ करता था। इतिहास का हवाला देते हुए यह आरोप भी लगाया जाता रहा है कि क्रूर मुस्लिम शासक औरंगजेब के शासनकाल में इस ऐतिहासिक लक्ष्मण टीला को बलपूर्वक ध्वस्त कर दिया गया और उसके मलबे व स्थान पर एक मस्जिद खड़ी कर दी गई, जिसे आज टीले वाली मस्जिद के नाम से जाना जाता है।

इस कानूनी लड़ाई ने तब और तूल पकड़ा जब फरवरी 2024 में हिंदू पक्ष ने लखनऊ की एक जिला अदालत के समक्ष अपनी बात रखी। अदालत में यह बयान दिया गया कि जून 2023 में जब कुछ लोग लक्ष्मण टीले पर पूजा-पाठ करने की मंशा से पहुंचे थे, तब दूसरे पक्ष के लोगों ने उन्हें खुलेआम धमकाया था। इसी घटना के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया गया और एक औपचारिक याचिका दायर कर बिना किसी रोक-टोक के नियमित पूजा की अनुमति मांगी गई। अदालत में इस संवेदनशील मामले पर अभी भी कानूनी सुनवाई का दौर जारी है, जिससे प्रशासन हर संवेदनशील अवसर पर सतर्कता बरत रहा है।

वाराणसी और मथुरा के अन्य विवाद

उत्तर प्रदेश की धार्मिक और ऐतिहासिक जमीन पर इस तरह के विवादों का यह अकेला मामला नहीं है। हालांकि अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण से जुड़ा ऐतिहासिक विवाद पूरी तरह सुलझ चुका है और वहां भव्य मंदिर का निर्माण हो चुका है, लेकिन राज्य के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को लेकर कानूनी लड़ाइयां अभी भी थमी नहीं हैं। वाराणसी स्थित प्रसिद्ध ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की पवित्र कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विवाद आज भी देश की अलग-अलग अदालतों में विचाराधीन हैं और उन पर नियमित सुनवाई चल रही है। मथुरा के मामले में विशेष तौर पर बाबरी या शाही ईदगाह को लेकर कानूनी खींचतान बनी हुई है।

सवाल-जवाब

त्रिदंडी महासभा लखनऊ क्यों आई थी?
त्रिदंडी महासभा के सदस्य बिठूर से गंगाजल लेकर सावन के आखिरी सोमवार के मौके पर लक्ष्मण टीले पर जलाभिषेक करने आए थे।
पुलिस ने त्रिदंडी महासभा को क्यों रोका?
लक्ष्मण टीले की जगह पर टीले वाली मस्जिद स्थित है और यह एक विवादित स्थल है, इसलिए कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने उन्हें रोका।
हिंदू पक्ष का लक्ष्मण टीले को लेकर क्या दावा है?
हिंदू पक्ष का दावा है कि टीले वाली मस्जिद के स्थान पर प्राचीन लक्ष्मण टीला और तिलेश्वर महादेव मंदिर था, जिसे औरंगजेब के काल में तोड़ा गया था।
यह मामला अदालत में कब पहुंचा?
फरवरी 2024 में हिंदू पक्ष ने लखनऊ की जिला अदालत में याचिका दायर कर बिना रोक-टोक के पूजा करने की अनुमति मांगी थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·65 दिन पहले

यह घटना उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और संवेदनशील धार्मिक स्थलों से जुड़े मुकदमों के बीच प्रशासन की सतर्कता को दर्शाती है। अदालत में मामला विचाराधीन होने के बावजूद इस प्रकार के आयोजनात्मक प्रयास और पुलिस बल की तैनाती यह संकेत देती है कि आने वाले दिनों में स्थानीय स्तर पर सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती रहेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·65 दिन पहले

यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि जब कोई संवेदनशील भूमि विवाद अदालत के विचाराधीन हो, तब इस तरह के आयोजनों के प्रयास कानून-व्यवस्था के लिए तात्कालिक चुनौती बन जाते हैं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने भले ही फिलहाल तनाव टाल दिया हो, लेकिन दोनों पक्षों के कड़े रुख से यह स्पष्ट है कि अदालती फैसले तक ज़मीनी स्तर पर प्रशासनिक सतर्कता और खुफिया तंत्र को बेहद सक्रिय रखना होगा ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

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