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लखीमपुर खीरी: 2005 में बनी सड़क छह साल से जर्जर, श्रीनगर और कस्ता को जोड़ने वाला रास्ता 25 गांवों के लिए बना मुसीबतभारत
15 जून 2026, 11:25 am (135 दिन पहले)· 3

लखीमपुर खीरी: 2005 में बनी सड़क छह साल से जर्जर, श्रीनगर और कस्ता को जोड़ने वाला रास्ता 25 गांवों के लिए बना मुसीबत

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की कस्ता और श्रीनगर विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ने वाली नगरा–जैतापुर सड़क सालों से टूटी पड़ी है, और 20 से 25 गांवों के लोग रोज जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर हैं।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एक टूटी-फूटी सड़क सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के फासले की मिसाल बन गई है। प्रदेश सरकार भले ही सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने का अभियान चला रही हो, लेकिन कस्ता विधानसभा क्षेत्र में बिछी एक अहम सड़क की हालत इन दावों की पोल खोल देती है। नगरा से जैतापुर तक जाने वाली और दर्जनों गांवों को आपस में जोड़ने वाली यह सड़क लंबे समय से बदहाल पड़ी है।

2005 में बनी, अब हर कदम पर गड्ढा

इस सड़क का निर्माण साल 2005 में मंडी समिति ने कराया था। उस वक्त यह आसपास के इलाके के लिए आवाजाही का भरोसेमंद रास्ता थी, लेकिन वक्त के साथ इसकी सतह पूरी तरह उखड़ गई। करीब छह साल से यह सड़क जर्जर हालत में है। जगह-जगह बने बड़े और गहरे गड्ढे अब हादसों को न्योता दे रहे हैं। पैदल चलने वाले हों या वाहन चालक, हर किसी को यहां से गुजरते वक्त संभल-संभलकर कदम रखना पड़ता है।

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बरसात में और भी बिगड़ जाते हैं हालात

ग्रामीणों के मुताबिक सूखे दिनों में तो जैसे-तैसे काम चल जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में स्थिति बेकाबू हो जाती है। गड्ढों में पानी भर जाने से रास्ता पहचानना तक मुश्किल हो जाता है और आवागमन लगभग ठप पड़ जाता है। सड़क की इसी खस्ता हालत की वजह से आसपास के गांवों के लोग रोजाना जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।

दो विधानसभा क्षेत्रों की लाइफलाइन, फिर भी अनदेखी

इस सड़क की सबसे बड़ी अहमियत यह है कि यह दो विधानसभा क्षेत्रों — श्रीनगर और कस्ता — को आपस में जोड़ती है और 20 से 25 गांवों से होकर गुजरती है। इसके बावजूद दोनों क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि इसकी सुध नहीं ले रहे। ग्रामीणों का कहना है कि मरम्मत और निर्माण को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई और प्रार्थना पत्र भी दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्राउंड जीरो पर लोगों ने खोली दावों की पोल

मौके पर पहुंची TrendKia की टीम ने सड़क से गुजर रहे राहगीरों और स्थानीय लोगों से बात की, तो सरकारी दावों और हकीकत का अंतर साफ नजर आया।

अमित वर्मा ने बताया कि साल 2005 में मंडी समिति ने इस सड़क का निर्माण कराया था, लेकिन अब छह साल से ज्यादा का समय बीत चुका है और सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मरम्मत के लिए कई बार प्रार्थना पत्र दिए गए, मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह सड़क श्रीनगर और कस्ता दोनों विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ती है, फिर भी दोनों विधायक इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।

जैतापुर गांव के निवासी शिव सिंह ने बताया कि सड़क पर इतने बड़े-बड़े गड्ढे हैं कि पैदल निकलना तक मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार के दावे सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह गए हैं और जमीन पर कोई बदलाव नहीं दिखता। बरसात के मौसम में परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ जाती है, लेकिन समस्या का समाधान अब तक नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय विधायक सौरभ सिंह सोनू से भी कई बार इस बारे में कहा गया, मगर उन्होंने भी कोई ध्यान नहीं दिया।

सवाल-जवाब

यह सड़क कब और किसने बनवाई थी?
इस सड़क का निर्माण साल 2005 में मंडी समिति ने कराया था।
यह सड़क कौन-से इलाके और गांवों को जोड़ती है?
यह श्रीनगर और कस्ता विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ती है और 20 से 25 गांवों से होकर गुजरती है।
सड़क की हालत कब से खराब है?
ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क करीब छह साल से जर्जर हालत में पड़ी है।
लोगों ने शिकायत के लिए क्या किया है?
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से कई बार शिकायत की और प्रार्थना पत्र भी दिए, क्षेत्रीय विधायक सौरभ सिंह सोनू से भी कहा गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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