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लौकी की फसल से बंपर पैदावार हासिल करने के लिए अपनाएं 2जी और 3जी कटिंग का यह खास तरीकाभारत
20 अग॰ 2026, 2:53 pm (1 घंटे पहले)· 2

लौकी की फसल से बंपर पैदावार हासिल करने के लिए अपनाएं 2जी और 3जी कटिंग का यह खास तरीका

लौकी की खेती में 2जी और 3जी कटिंग तकनीक अपनाकर किसान अपनी पैदावार कई गुना बढ़ा सकते हैं। कृषि विशेषज्ञ बजरंग सिंह ने बेल प्रबंधन और औजारों की सफाई से जुड़े जरूरी नियम बताए हैं।

लौकी की वैज्ञानिक तरीके से खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी पैदावार हासिल करना काफी आसान हो जाता है। आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रयोग करके किसान अपनी लागत के मुकाबले कई गुना ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। हालांकि, इस फसल में सबसे बड़ी चुनौती बेल की बेलगाम बढ़वार को नियंत्रित करना होता है। यदि पौधे की अनावश्यक शाखाओं को समय रहते न काटा जाए, तो मिट्टी से मिलने वाले ज्यादातर पोषक तत्व केवल पत्तियों और बेल की लंबाई बढ़ाने में खर्च हो जाते हैं। इसका सीधा नुकसान फल देने की क्षमता पर पड़ता है। इस समस्या के समाधान के रूप में 2जी और 3जी कटिंग तकनीक काफी कारगर साबित हो रही है, जिससे पौधे की ऊर्जा को अधिक फल देने वाली शाखाओं की तरफ मोड़ा जा सकता है।

लौकी की फसल में बेल प्रबंधन क्यों है जरूरी?

लौकी के पौधे में अगर प्राकृतिक रूप से बढ़वार होने दी जाए, तो उसमें नर फूलों की संख्या अधिक होती है और मुख्य तना बिना ज्यादा फल दिए लंबा होता चला जाता है। ऐसे में बेल प्रबंधन की सही जानकारी होना हर किसान के लिए अनिवार्य है। कृषि विशेषज्ञ बजरंग सिंह के अनुसार, जब पौधे की अनियंत्रित शाखाओं को छांट दिया जाता है, तो बेल की पोषक तत्वों को सोखने की प्रक्रिया सुव्यवस्थित होती है। इससे पौधा अपनी पूरी ताकत उन शाखाओं को विकसित करने में लगाता है, जिन पर मादा फूल और फल अधिक मात्रा में आते हैं। यही कारण है कि उन्नत खेती में कटिंग को एक जरूरी प्रक्रिया माना गया है।

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क्या होती हैं 1जी, 2जी और 3जी शाखाएं?

कटिंग तकनीक को सही ढंग से समझने के लिए बेल की विभिन्न पीढ़ियों की शाखाओं को जानना जरूरी है। कृषि विशेषज्ञ बजरंग सिंह ने इन शाखाओं के वर्गीकरण के बारे में विस्तार से जानकारी दी है

  • 1जी (फर्स्ट जनरेशन): मुख्य बीज से निकलने वाला प्राथमिक तना 1जी शाखा कहलाता है। इसमें ज्यादातर नर फूल आते हैं, जो फल नहीं बनाते।
  • 2जी (सेकंड जनरेशन): मुख्य तने यानी 1जी शाखा से निकलने वाली उप-शाखाओं को द्वितीय पीढ़ी या 2जी शाखा कहा जाता है।
  • 3जी (थर्ड जनरेशन): 2जी शाखाओं के आगे विकसित होने वाली नई बेलों को 3जी यानी तीसरी पीढ़ी की शाखाएं कहा जाता है। इन शाखाओं में मादा फूलों की संख्या सबसे अधिक होती है, जिससे फल बनने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

कटिंग करने का सही समय और तरीका

पौधे पर कटिंग की प्रक्रिया सही समय पर शुरू करना बहुत महत्वपूर्ण है। आमतौर पर जब लौकी का पौधा लगभग 30 से 35 दिन का हो जाता है, तब उसका मुख्य तना और उससे निकलने वाली प्राथमिक शाखाएं स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगती हैं। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, किसानों को शुरुआती चरण में मुख्य तने की अनावश्यक बढ़वार को रोककर 2जी शाखाओं के निकलने का रास्ता साफ करना चाहिए। जब 2जी शाखाएं थोड़ी बड़ी हो जाएं, तो सिरों की कटिंग करके 3जी शाखाओं के विकास को बढ़ावा दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पौधे को किसी भी तरह की शारीरिक क्षति से बचाना चाहिए।

सावधानी: औजारों की सफाई और सही तकनीक का ध्यान रखें

छांटाई का कार्य करते समय किसानों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। शाखाओं को काटने के लिए हमेशा बहुत तेज धार वाले और पूरी तरह साफ औजार का ही प्रयोग करना चाहिए। यदि औजार गंदे होंगे या उन पर जंग लगा होगा, तो कटे हुए स्थान से पौधे में फंगल या बैक्टीरियल संक्रमण फैलने का बड़ा जोखिम रहता है। इसीलिए एक पौधे की कटिंग करने के बाद दूसरे पौधे पर जाने से पहले औजारों को विसंक्रमित या साफ कर लेना बेहतर रहता है। इसके अतिरिक्त, बहुत अधिक कटिंग करने से बचना चाहिए क्योंकि अत्यधिक छंटाई से पौधे पर तनाव बढ़ता है और बीमारियों का खतरा भी पैदा हो सकता है।

2जी और 3जी तकनीक अपनाने के मुख्य फायदे

2जी और 3जी कटिंग तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह पौधे के अनियंत्रित फैलाव पर रोक लगाती है और उसे अधिक पैदावार के लिए तैयार करती है। जब 3जी शाखाएं बहुतायत में निकलती हैं, तो बेल पर फूल और फल लगने का दायरा काफी बढ़ जाता है। इससे फसल का फलन क्षेत्र सुव्यवस्थित हो जाता है। साथ ही, पौधे की कटाई-छंटाई सही होने से खेत में सिंचाई करना, खाद देना और कीटों की निगरानी करना बेहद आसान हो जाता है। इस वैज्ञानिक तरीके को अपनाकर किसान एक ही पौधे से कई बार भारी मात्रा में लौकी की तुड़ाई कर सकते हैं।

सवाल-जवाब

लौकी की खेती में 2जी और 3जी कटिंग तकनीक का क्या उद्देश्य है?
इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य लौकी की बेल में अनियंत्रित शाखाओं की बढ़वार को रोककर पौधे की ऊर्जा को अधिक फल देने वाली शाखाओं के विकास में लगाना है।
1जी, 2जी और 3जी शाखाओं में क्या अंतर होता है?
मुख्य तने को 1जी शाखा कहते हैं, जिससे निकलने वाली उप-शाखाएं 2जी कहलाती हैं। 2जी शाखाओं से निकलने वाली नई शाखाएं 3जी कहलाती हैं, जिन पर सबसे ज्यादा फल आते हैं।
लौकी के पौधे में कटिंग की प्रक्रिया कब शुरू करनी चाहिए?
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, जब लौकी का पौधा लगभग 30 से 35 दिन का हो जाए और उसकी शाखाएं स्पष्ट दिखने लगें, तब कटिंग करनी चाहिए।
बेल की कटिंग करते समय औजारों को लेकर क्या सावधानी रखनी चाहिए?
कटिंग के लिए हमेशा तेज और साफ औजारों का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि गंदे या जंग लगे औजारों से पौधे के कटे हुए भाग में संक्रमण फैल सकता है।
ज्यादा कटिंग करने से पौधे पर क्या नुकसान हो सकता है?
आवश्यकता से अधिक कटिंग करने से पौधे तनावग्रस्त हो सकते हैं और उनमें विभिन्न प्रकार के रोगों का प्रकोप बढ़ने की आशंका रहती है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 मिनट पहले

यह खबर कृषि प्रबंधन और वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से फसल की पैदावार बढ़ाने पर केंद्रित है। हालाँकि यह आपराधिक मामला या अदालती कार्रवाई से संबंधित नहीं है, फिर भी कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े ऐसे मामलों में संसाधनों के सही आवंटन और तकनीकी दक्षता का विशेष महत्व होता है। बेल प्रबंधन जैसी प्रक्रियाएं किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने और उत्पादन सुधारने में मदद करती हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·16 मिनट पहले

यह तकनीकी दृष्टिकोण ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि नीति के उस पहलू को उजागर करता है जहाँ संसाधनों के कुशल उपयोग से किसानों की आय बढ़ सकती है। जब वैज्ञानिक पद्धतियों को ज़मीनी स्तर पर लागू किया जाता है, तो यह खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास दोनों के लिए नीतिगत रूप से एक सकारात्मक कदम साबित होता है।

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