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'महिलाओं को ढाल बनाकर खुद पीछे छिपे नेता': संसद मार्च के बवाल के बाद सीजेपी में टूट, अभिजीत दीपके पर साथी ने ही लगाए गंभीर आरोपभारत
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'महिलाओं को ढाल बनाकर खुद पीछे छिपे नेता': संसद मार्च के बवाल के बाद सीजेपी में टूट, अभिजीत दीपके पर साथी ने ही लगाए गंभीर आरोप

संसद मार्च के दौरान भड़की हिंसा के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) में खुली बगावत शुरू हो गई है। एक पूर्व सदस्य ने नेतृत्व पर आम आदमी पार्टी की 'बी-टीम' के रूप में काम करने और गिरफ्तारी से बचने के लिए महिला प्रदर्शनकारियों को जानबूझकर पुलिस के सामने करने का आरोप लगाया है।

संसद की ओर किए गए ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान भड़की हिंसा और भारी बवाल के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के भीतर की कलह पूरी तरह से सतह पर आ गई है। लगभग एक महीने तक इस छात्र आंदोलन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले एक पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने अब संगठन से किनारा कर लिया है। उन्होंने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और पूरे नेतृत्व पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। वीरू भाई का स्पष्ट कहना है कि जो आंदोलन कभी छात्रों के हकों के लिए शुरू हुआ था, वह अब पूरी तरह से अपनी निष्पक्षता खो चुका है और गहरी राजनीतिक साजिशों का शिकार हो गया है।

गैर-राजनीतिक मंच से आम आदमी पार्टी की 'बी-टीम' तक का सफर

इस आंदोलन की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की एक अहम टिप्पणी के बाद हुई थी, और तब से ही यह मंच खुद को पूरी तरह से गैर-राजनीतिक होने का दावा करता रहा था। लेकिन अब संगठन के ही पूर्व सदस्य ने इन दावों की पोल खोल दी है। वीरू भाई ने आरोप लगाया है कि सीजेपी की वर्तमान दिशा पूरी तरह से भटक चुकी है और यह संगठन अब सिर्फ आम आदमी पार्टी (आप) की 'बी-टीम' बनकर रह गया है। उनका दावा है कि आंदोलन में ऐसे कई उपद्रवी और बाहरी तत्व जानबूझकर शामिल कराए गए, जिनका छात्रों के असली मुद्दों या उनके हितों से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था। इन तत्वों की मौजूदगी ने पूरे प्रदर्शन की साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

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बड़े नेताओं के ना आने से छात्रों में भारी निराशा

आंदोलन को जिस तरह से राजनीतिक रंग दिया जा रहा था, उसे देखते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों को यह पक्का भरोसा दिलाया गया था कि आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेता उनके समर्थन में सड़कों पर उतरेंगे। छात्रों को उम्मीद थी कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया या फिर संजय सिंह जैसे कद्दावर नेता उनके साथ मार्च में कदम ताल करेंगे। पूर्व प्रदर्शनकारी ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि अगर इस पूरे आंदोलन को इतने सारे सांसदों और बड़े नेताओं का खुला समर्थन हासिल था, तो फिर संसद मार्च वाले दिन जब छात्रों को सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब कोई भी बड़ा नेता पुलिस का सामना करने के लिए सामने क्यों नहीं आया।

नेतृत्व पर कायरता और लड़कियों को ढाल बनाने का आरोप

इस पूरे विवाद में सबसे गंभीर आरोप सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके और उनकी कोर टीम की रणनीति पर लगे हैं। वीरू भाई का कहना है कि जब यह साफ हो गया था कि आगे बढ़ने पर पुलिस के साथ सीधा और हिंसक टकराव होना तय है, तब भी संगठन के नेता खुद आगे नहीं आए। आरोप है कि पुलिस के डंडों और गिरफ्तारी से खुद को बचाने के लिए इन नेताओं ने बेहद चालाकी से महिला प्रदर्शनकारियों को भीड़ में सबसे आगे कर दिया। प्रमुख चेहरे सुरक्षित रूप से पीछे छिपे रहे, जिसका नतीजा यह हुआ कि जो मासूम छात्र पहली बार किसी प्रदर्शन का हिस्सा बने थे, वे बिना किसी मार्गदर्शन के सीधे पुलिसिया कार्रवाई का शिकार हो गए।

बिना अनुमति के मार्च और बैरिकेडिंग की अनदेखी

रणनीतिक स्तर पर भी कई गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने कई दिन पहले ही यह साफ कर दिया था कि संसद की तरफ किसी भी तरह के मार्च की कोई अनुमति नहीं दी जाएगी, और पूरे इलाके में भारी बैरिकेडिंग लगा दी गई थी। ऐसे हालात में यह सवाल उठ रहा है कि नेतृत्व ने छात्रों को जबरन आगे बढ़ने का आदेश क्यों दिया। पूर्व सदस्य का कहना है कि अगर आयोजकों को जमीनी हकीकत और पुलिस की सख्ती का अंदाजा था, तो यह उनकी नैतिक जिम्मेदारी थी कि वे खुद सबसे आगे खड़े होते और लाठियां खाते, न कि भोले-भाले छात्रों को ढाल बनाते।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और पुलिस से झड़प

सोमवार को आयोजित किए गए इस विवादित ‘संसद चलो’ मार्च का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा मांगना था। लेकिन यह मार्च जल्द ही एक हिंसक झड़प में तब्दील हो गया। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें अंधाधुंध पथराव करना, सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाना और ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों पर जानलेवा हमला करना शामिल है। वहीं दूसरी ओर, सीजेपी अपने रुख पर कायम है कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण था और पुलिस ने बिना किसी उकसावे के छात्रों पर बर्बरता से लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे।

सैकड़ों घायल और जेपी नड्डा से मुलाकात का दावा

सोमवार की इस हिंसा में दोनों तरफ से भारी नुकसान हुआ है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस भीषण झड़प में कुल 178 लोग बुरी तरह घायल हुए हैं। इनमें 118 पुलिसकर्मी और लगभग 60 प्रदर्शनकारी शामिल हैं, हालांकि सीजेपी का दावा है कि घायल छात्रों की असली संख्या इससे कहीं ज्यादा है। इन सब विवादों के बीच, सीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ एक अहम बैठक की है। सीजेपी नेतृत्व इस मुलाकात को आंदोलन की पहली बड़ी जीत के रूप में पेश कर रहा है। उनका कहना है कि सरकार ने उनकी सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का ठोस आश्वासन दिया है, हालांकि आधिकारिक तौर पर सरकार की तरफ से अभी तक कोई भी अंतिम फैसला नहीं सुनाया गया है।

सवाल-जवाब

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) में विवाद क्यों हो रहा है?
संगठन के पूर्व सदस्य वीरू भाई ने नेतृत्व पर छात्र आंदोलन का राजनीतिकरण करने, आम आदमी पार्टी की 'बी-टीम' की तरह काम करने और पुलिस कार्रवाई के दौरान छात्रों को जानबूझकर आगे करने का गंभीर आरोप लगाया है।
सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके पर क्या आरोप लगे हैं?
अभिजीत दीपके पर आरोप है कि उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद को सुरक्षित पीछे रखा और चालाकी से महिला प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड्स पर पुलिस का सामना करने के लिए सबसे आगे कर दिया।
छात्रों ने संसद की तरफ मार्च क्यों किया था?
सीजेपी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को 'संसद चलो' मार्च का आयोजन किया था।
इस हिंसक झड़प में कितने लोग घायल हुए?
दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस हिंसा में कुल 178 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 118 पुलिसकर्मी और लगभग 60 प्रदर्शनकारी शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक का क्या नतीजा निकला?
सीजेपी नेताओं ने जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद दावा किया कि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने का ठोस आश्वासन दिया है, हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
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